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मंदिरों के बाद अब जानिये भारत की कुछ चुनिंदा मस्जिदों के बारे में

By Belal Jafri

अब तक हमने आपको भारत के आलिशान मंदिरों से अवगत कराया है। हमने आपको ये बताया कि किस तरह ये मंदिर भारत की खूबसूरती में चार चाँद लगाते हैं और भारत को एक रिलिजियस टूरिज्म हब बनाते हैं। इसी क्रम में आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत की कुछ चुनिंदा मस्जिदों के बारे में। बात जब भारत की मस्जिदों पर हो और ऐसे में हम मुगल काल का वर्णन न करें तो बात लगभग अधूरी होती है।

भारत की स्‍थापत्‍य कला का स्‍वर्ण-युग माना जाता है। उनके शासनकाल में कई खूबसूरत इमारतों, स्‍तूपों का निर्माण किया गया।

उन्‍हीं के काल में निर्मित मस्जिदें आज भी स्‍थापत्‍य कला का बेजोड़ नमूना मानी जाती हैं। अगर आप इन मस्जिदों को गौर से देखें तो आपको मिलेगा कि कहीं इन मस्जिदों पर भारतीय मंदिरों की छाप है तो कहीं पर ईरानी वास्तुकला को बड़ी ही खूबसूरती के साथ दर्शाया गया है।

आइये अब जाने भारत में बनी उन मस्जिदों के बारे में जिनको देखने के बाद आप हतप्रभ हो जाएंगे।

पढ़ें - कामाख्या मंदिर: देवी के मासिक धर्म के रक्त से यहां लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र

जामा मस्जिद, दिल्ली

जामा मस्जिद, दिल्ली

जामा मस्जिद भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। इस मस्जिद को सम्राट शाहजहां द्वारा बनवाया गया था। इस मस्जिद का निर्माण 1650 में शुरू किया गया था जो 1656 में पूरा हुआ। ये मस्जिद चोवरी बाज़ार रोड पर स्थित है। मस्जिद पुरानी दिल्ली के मुख्य आकर्षणों में से एक है।

इस विशाल मस्जिद में 25,000 भक्त एक साथ प्रार्थना कर सकते हैं। इसमें तीन राजसी द्वार हैं, 40 मीटर ऊंची चार मीनारें हैं जो लाल बलुआ पत्थरों एवं सफ़ेद संगमरमर से बनी हुई हैं। इस मस्जिद में सुंदरता से नक्काशी किये गए लगभग 260 स्तंभ हैं जिनमें हिन्दू एवं जैन वास्तुकला की छाप दिखाई देती है।

ताज-उल-मस्जिद, भोपाल

ताज-उल-मस्जिद, भोपाल

भोपाल स्थित यह मस्जिद भारत की सबसे विशाल मस्जिदों में एक है। इस मस्जिद का निर्माण कार्य भोपाल के आठवें शासक शाहजहां बेगम के शासन काल में प्रारंभ हुआ था, लेकिन पैसों की कमी के कारण उनके ज़िंदा रहते ये मस्जिद बन न सकी। गौरतलब है कि 1971 में भारत सरकार के दखल के बाद यह मस्जिद पूरी तरह से बन के तैयार हो सकी। गुलाबी रंग की इस विशाल मस्जिद की दो सफेद गुंबदनुमा मीनारें हैं, जिन्‍हें मदरसे के तौर पर इस्‍तेमाल किया जाता है। तीन दिन तक चलने वाली यहां की वार्षिक इजतिमा प्रार्थना भारत भर से लोगों का ध्‍यान खींचती है।

 मक्का मस्जिद हैदराबाद

मक्का मस्जिद हैदराबाद

मक्का मस्जिद, भारत में स्थित एक प्रसिद्ध मस्जिद और एक ऐतिहासिक इमारत है। इस मस्जिद का शुमार भारत कि सबसे पुराणी और सबसे बड़ी मस्जिदों में होता है। इस मस्जिद का निर्माण मुहम्मद क़ुली क़ुत्ब शाह, जो कि हैदराबाद के 6वें सुलतान थे ने 1617 मे मीर फ़ैज़ुल्लाह बैग़ और रंगियाह चौधरी के सहयोग से किया। बताया जाता है कि यह काम अब्दुल्लाह क़ुतुब शाह और तना शाह के वक़्त में ज़ारी रहा और 1694 में मुग़ल सम्राट औरंग़ज़ेब के वक़्त में पुरा हुआ। कहते है कि इसे बनाने मे लगभग 8000 राजगीर और 77 वर्ष लगे।

 जामा मस्जिद, श्रीनगर

जामा मस्जिद, श्रीनगर

श्रीनगर में बनी हई मस्जिदों में से सबसे पुरानी और खास जामा मस्जिद को 1400 ई. में बनवाया गया था। स्‍थानीय लोग इस मस्जिद को शुक्रवार मस्जिद के नाम से भी जानते हैं। जामा मस्जिद को पुराने समय में विवादों के चलते कई बार नष्‍ट कर दिया गया था। हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया था, आखिरी बार महाराजा प्रताप सिंह ने इसको अपनी देखरेख में बनवाया था उस समय से आज तक यह ठीक है। यह मस्जिद भारतीय सामग्री और मुस्लिम कलाकृति से मिलकर बना हुआ बेमिसाल धार्मिक केंद्र है। इस मस्जिद की वास्‍तुकला को ब्रिटिश वास्‍तुकारों ने डिजायन किया था जिसे इंडो - सारासेनिक वास्‍तुकला के नाम से जाना जाता है। इस अद्भूत डिजायन का परिणाम यह है कि इस मस्जिद में शिखर पर एक गुंबद नहीं है जो अक्‍सर हर मुस्लिम कलाकृतियों और धार्मिक स्‍थलों पर हुआ करती है।

जामा मस्जिद, आगरा

जामा मस्जिद, आगरा

जामा मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने 1648 में अपनी प्यारी बेटी जहांआरा बेगम को श्रद्धांजलि देने के लिए किया था। इसे जामी मस्जिद और जुमा मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। साधारण डिजाइन से बने इस मस्जिद का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है और इसे सफेद संगमरमर से सजाया गया है। इसके दीवार और छत पर नीले पेंट का प्रयोग किया गया है। शहर के बीच में आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन के सामने स्थित यह मस्जिद भारत के विशाल मस्जिदों में से एक है।

जामा मस्जिद लखनऊ

जामा मस्जिद लखनऊ

जुमा मस्जिद, तीन गुंबदों और दो मीनारों के साथ लखनऊ में अवध के नवाबों के युग की विलासिता और संपन्‍नता के लिए एक उल्‍लेखनीय गवाह के रूप में खड़ा आज भी अपनी दास्‍ंता कहता है। नबाव मोहम्‍मद अली शाह एक ऐसी मस्जिद बनाना चाहते थे जो देश के अन्‍य मस्जिदों से ज्‍यादा भव्‍य और आकर्षक हो। हालांकि, बाद में वह जीर्ण गठिया से पीडि़त हो गए थे और उनकी मृत्‍यु हो गई थी। उनकी मौत से उनका ड्रीम प्रोजेक्‍ट अधूरा ही रह गया और बाद में उनकी बेगम ने इसे पूरा करवाया। यह बड़ी सी मस्जिद 4950 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैली हुई है। इस मस्जिद की वास्‍तुकला डिजाइन, अति सुंदर सजावट, नक्‍काशी और मस्जिद की दीवारों पर की गई लिखाई, हिंदू और जैन धर्म के प्रभाव को दर्शाती है।

सर सैय्यद मस्जिद, अलीगढ

सर सैय्यद मस्जिद, अलीगढ

सर सैय्यद मस्जिद, अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर के अंतर्गत आने वाले सर सैय्यद हॉल में है। इस मस्जिद का शुमार भारत की चुनिंदा मस्जिदों में होता है। विश्वविद्यालय क्रिकेट ग्राउंड से ही आप इस मस्जिद को देख सकते हैं। इस मस्जिद की ख़ास बात ये है की विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैय्यद अहमद खान की भी समाधी इसी मस्जिद में है। अगर आप इस मस्जिद को ध्यान से देखें तो आपको मिलेगा कि इस मस्जिद की संरचना पाकिस्तान के लाहौर में मौजूद मुग़ल बादशाही मस्जिद से काफी मिलती जुलती है।

मलिक दीनार मस्जिद, कासरगोड

मलिक दीनार मस्जिद, कासरगोड

मलिक दीनार मस्जिद एक ऐतिहासिक स्मारक है जो कासरगोड में इस्लाम की स्थापना की निशानी है। इसकी स्थापना मलिक इबिन दीनार द्वारा की गयी थी जिन्होंने भारत में सबसे पहले इस्लाम धर्म का प्रचार किया। यह न केवल भारतीय मुसलमानों के लिए, बल्कि दुनिया भर के मुसलमानों विशेष रूप से पश्चिमी तट वासियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

हर साल, मलिक इब्न दिनार के आगमन को मनाने के लिए इस माजिद में एक भव्य त्यौहार आयोजित किया जाता है। इस त्योहार में पूरे भारत से श्रद्धालु भाग लेते है। मस्जिद की वास्तुकला पारंपरिक केरल शैली की है और अत्यंत सुंदर एवं आकर्षक है।

टीपू सुल्तान शाही मस्जिद, कोलकाता

टीपू सुल्तान शाही मस्जिद, कोलकाता

टीपू सुल्तान शाही मस्जिद का शुमार कोलकाता की सबसे प्रसिद्ध मस्जिदों में होता है। ये मस्जिद जहां एक तरफ बेहद खूसूरत है तो वहीँ दूसरी तरफ ये एक बेहतरीन वास्तुकला को भी बखूबी दर्षाती है। इस मस्जिद का निर्माण 1832 में प्रिंस गुलाम मुहम्मद द्वारा कराया गया था, जो टीपू सुल्तान के छोटे बेटे थे।

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