फिल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' याद है, जिसमें राहुल (नाम तो सुना ही होगा) यानी शाहरुख खान अपनी मीनाम्मा (दीपिका पादुकोण) से कल्याणम मनाने के वास्ते थंगाबली (निकितिन धीर) से भी टकरा जाता है। अब जरा सोचिए, आप किसी ऐसी जोड़ी के कल्याणम (शादी) में शामिल हो रहे हैं जिनकी मौत 25 साल पहले हो चुकी हो...तो। लगा न झटका! जी हां, कुछ ऐसी ही हालत उडुपी की रहने वाली 16 साल की उर्मिला की भी हुई थी।
जब उसने पहले सुना कि उसका परिवार किसी शादी में शामिल होने जाने वाला है तो वह बहुत खुश हो गयी। अपना नया लहंगा, मैचिंग चुड़ियां, ज्वेलरी, मेकअप, कैसा हेयर स्टाइल होगा, सब कुछ उसने तय कर लिया। लेकिन उर्मिला को अचानक कुछ ऐसा पता चला जिसे सुनकर वह सहम सी गयी। उसका परिवार जिन लोगों की शादी में शामिल होने की तैयारियां कर रहा था, उन्हें मरे लगभग 25 साल बीत चुके थे। जी हां, यह परिवार 'प्रेता कल्याणम' में शामिल होने वाला था।

कर्नाटक और केरल में मुख्य रूप से यह अनोखी रस्म निभायी जाती है जिसमें परिवार के सालों पहले मर चुके बच्चों की शादियां करवायी जाती है। इसे स्थानीय लोग 'प्रेता कल्याणम' यानी Ghost Wedding कहते हैं। यह रस्म एक प्रकार से लोगों को जीवन और इस जीवन के बाद वाली जिंदगी से जोड़ता है। या यूं कहें, परिवार के वो सदस्य जो सालों पहले इस दुनिया को छोड़कर चले गये हैं, से खुद को जोड़े रखने के लिए ही लोग सदियों से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं।
क्यों होती है 'प्रेथा कल्याणम'?
'प्रेता कल्याणम' की परंपरा मूल रूप से केरल के कासरगोड जिले के कर्नाटक से सटे गांवों में रहने वाले कुछ खास समुदायों द्वारा निभायी जाती है। इस परंपरा के तहत परिवार के उन मृत बच्चों की शादियां करवायी जाती हैं जिनकी नवजात अवस्था अथवा 18 साल से कम आयु में किसी वजह से मौत हो गयी थी। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अगर इन आत्माओं की शादी करवायी जाती है तो मरने के बाद Afterlife में इन्हें खुशियां मिलती हैं और ये परिवार के लिए सौभाग्य लाते हैं।

30 पहले मरी बेटी के लिए परिवार ने ढूंढा वर
पिछले दिनों कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के पुत्तुर से ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जिसमें 30 साल पहले मर चुकी परिवार की बेटी के लिए वर ढूंढते हुए परिवार ने स्थानीय न्यूज पेपर में विज्ञापन छपवाया था। विज्ञापन में मृत लड़की की जाति और गोत्र का विवरण देते हुए 30 साल पहले मरे किसी वर की तलाश की जा रही थी। हालांकि अलग जाति या गोत्र होने पर भी परिवार को इस शादी से कोई आपत्ति नहीं थी।
यह विज्ञापन सोशल मीडिया पर खुब छाया भी हुआ था। परिवार की तरफ से बताया गया कि करीब 50 लोगों ने उनकी बेटी शोभा कुलाल से अपने बेटे की शादी करवाने का प्रस्ताव दिया था। परिवार को 30 साल पहले मरे चंदप्पा कुलाल अपनी मृत बेटी के लिए भा गये और उनकी धूमधाम से शादी करवा दी गयी।
बता दें, शोभा और चंदप्पा कुलाल दोनों जब नवजात शिशु थे, तभी उनकी मौत हो गयी थी। गले में खाना फंस जाने की वजह से सांस अटक जाने से शोभा कुलाल की मौत 27 दिन की उम्र में और बीमारी की वजह से चंदप्पा कुलाल की मौत 7 दिन की उम्र में 30 साल पहले हो गयी। अब दोनों के परिवारों ने मिलकर उनकी अरेंज मैरिज करवायी है। इस शादी में दोनों परिवारों की तरफ से शादी (कल्याणम) से जुड़े सभी रस्मों-रिवाजों को निभाया गया।

क्या है इसकी अध्यात्मिक मान्यताएं?
'प्रेता कल्याणम' में जो लोग शामिल होते हैं, उनका मानना है कि मरने के बाद भी हमारे परिजन प्रेत-आत्माओं के रूप में हमारे आसपास ही रहते हैं। माना जाता है कि ये मृतात्माएं परिवार में बरकत और सौभाग्य लाती हैं। इसलिए 'प्रेता कल्याणम' की परंपरा को बड़े ही दिल से खुशी-खुशी मनायी जाती है। इसे जीवन के बाद दूसरी दुनिया के साथ इस दुनिया के संपर्क के तौर पर देखा जाता है। इसमें अगर परिवार के किसी बच्चे की मौत छोटी आयु में होने पर भी उसके जीवन को पूर्णता प्रदान करने के लिए उसकी मौत के बाद भी शादी करवायी जाती है।
कैसे होती है यह शादी/कल्याणम?
दक्षिण भारत के इन दोनों राज्यों यानी कर्नाटक व केरल में जैसे आम शादियां होती हैं, ठीक उसी तरह से ही 'प्रेता कल्याणम' का आयोजन भी किया जाता है। इस शादी में भी मृत आत्माओं का अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे, मंगलसूत्र बांधना आदि सारे रस्म निभाए जाते हैं। वर पक्ष की तरफ से दुल्हन के लिए शादी का जोड़ा 'धारी साड़ी' भी लायी जाती है।
इसके अलावा शादी में शामिल होने वाले रिश्तेदार व सभी लोग शगुन के तौर पर कुछ न कुछ रुपए जरूर नवविवाहित मृत जोड़ी को देते हैं। ठीक इसी तरह से हाल ही में शोभा और चंदप्पा की शादी भी संपन्न करवायी गयी। दोनों का स्थान भी परिवर्तन करवाया गया जिसके साथ ही यह माना गया कि अब हमेशा के लिए वे दोनों एक साथ रहेंगे।



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