पुणे से बेंगलुरु के बीच बन रहा एक्सप्रेसवे एक शानदार परियोजना है जो इन दोनों शहरों के बीच की दूरी को आधा से भी कम कर देगा। भारतमाला परियोजना के दूसरे चरण के तहत इस एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से पुणे में भी जुड़ जाएगा, जिसके बाद इससे होकर बेंगलुरु से मुंबई तक की दूरी को तय करना बड़ा ही आसान बन जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह माना जा रहा है कि इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से न सिर्फ दोनों शहरों के बीच की दूरी घट जाएगी जिससे लोगों को आने-जाने में सुविधा होगी बल्कि महाराष्ट्र का दक्षिण भारत के साथ संपर्क भी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर बन जाएगा।

कितनी लंबाई?
Times Now की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे (Pune-Bangalore Expressway) लगभग 700 किमी लंबा होने वाला है। आम तौर पर सड़क मार्ग से पुणे से बेंगलुरु के बीच की दूरी को तय करने में लगभग 15 घंटे का समय लगता है लेकिन इस एक्सप्रेसवे से होकर पुणे से बेंगलुरु तक आने-जाने में आधा से भी कम यानी लगभग 7 घंटे का समय लगेगा।
यह एक्सप्रेसवे इन दोनों राज्यों और शहरों में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आर्थिक उन्नति का भी कारण बनेगा, जिससे काम और व्यापार के सिलसिले में दोनों शहरों के बीच आना-जाना आसान बन जाएगा।
क्या होगा रूट?
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे महाराष्ट्र के जिन जिलों से होकर गुजरेगी, उनमें शामिल है -
- सांगली
- सातारा
- पुणे
इसके बाद यह एक्सप्रेसवे कर्नाटक में प्रवेश करेगी, जहां यह ग्रामीण इलाकों से होकर जाएगी-
- बेलगावी
- बगलकोट
- गडग
- कोप्पल
- विजयनगर
- देवनगरे
- चित्रदुर्ग
- टुमकुरु
- बेंगलुरु
बताया जाता है कि यह एक्सप्रेसवे बेंगलुरु में बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के मुथगदहल्ली इलाके में प्रस्तावित सैटेलाइट रिंग रोड पर जाकर खत्म होगा।

लागत, विशेषताएं और कब खुलेगा?
केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना के फेज 2 पहल के तहत पुणे-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। बताया जाता है कि 700 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में करीब ₹700 करोड़ की लागत आएगी। यह एक्सप्रेसवे 6 लेन चौड़ा होने वाला है, जिसपर अधिकतम 120 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से गाड़ियों को चलाने की अनुमति दी जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट में किये गये दावों को सच माने तो इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने का लक्ष्य वर्ष 2028 रखा गया है। इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह से बन जाने के बाद यह नेशनल हाईवे 48 का एक तेज रफ्तार विकल्प बनकर उभरेगा, जिसकी वजह से इस रूट से आने-जाने वाली गाड़ियों को निश्चित रूप से सुविधा होने वाली है।



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