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पुणे की गणेश चतुर्थी : 5 पंडाल जो हैं Must Visit और जानिए कब निकलेगी दगड़ू सेठ की 'बारात'

गणेश चतुर्थी को पूरे देश में ही काफी धुमधाम से मनाया जाता है लेकिन महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की बात ही अलग होती है। सिर्फ राजधानी मुंबई ही नहीं बल्कि पुणे में भी गणेश चतुर्थी की धुम मची रहती है। इसकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी है। बता दें, देश भर में गणेश चतुर्थी का उत्सव 19 सितंबर को मनाया जाएगा।

lord ganesh

अगर इस साल गणेशोत्सव के मौके पर आप पुणे या आसपास में कहीं रहने वाले हैं तो पुणे के इन 5 पंडालों में गणपति दर्शन के लिए जाना तो बनता है। इस साल महाराष्ट्र सरकार ने गणपति उत्सव के दौरान पुणे मेट्रो के समय में भी परिवर्तन किया है। साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि इस साल पुणे के विख्यात दगड़ू सेठ की 'बारात' कब निकाली जाएगी।

सबसे पहले आपको पूणे के 5 Must Visit पंडाल बताते हैं :

1. श्री कस्बा गणपति सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल

lord ganesh file photo

इस गणेश चतुर्थी पंडाल की स्थापना 1893 में की गयी थी। यह पुणे के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित गणपति में से एक हैं। हर साल इस पूजा मंडल की प्रतिमा का विसर्जन ही सबसे पहले किया जाता है। काफी संख्या में लोग इस पंडाल में भगवान गणेश के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

पता : 159, कस्बा पेठ, पुणे

2. तुलसीबाग गणपति

laal bagh cha raja

तुलसीबाग गणपति में भगवान गणेश के दर्शन करने के लिए लोग काफी उत्साहित रहते हैं। इस पूजा पंडाल में हर साल अलग-अलग थीम पर सजावट की जाती है। इसके अलावा भगवान गणेश की मूर्ति की ऊंचाई करीब 15 फीट होती है, जो लोगों के उत्साह का प्रमुख कारण बनता है। इस पूजा के दौरान तुलसीबाग मार्केट की महिलाओं को भी विशेष सम्मान प्रदान किया जाता है।

पता : तुलसीबाग, बुधवार पेठ, पुणे

3. तम्बडी जोगेश्वरी गणपति

lord ganesh

इस गणपति पूजा का शुभारंभ वर्ष 1893 में स्वयं लोकमान्य तिलक के हाथों हुआ था। गणेशोत्सव के समय पुणे जाने वाले लोगों के लिए इसे अपनी Must Visit लिस्ट में जरूर शामिल करनी चाहिए। इस पूजा पंडाल की सबसे बड़ी खासियत है कि हर साल एक ही प्रकार की भगवान गणेश की मूर्ति बनती है। इतना ही नहीं मूर्ति का निर्माण भी एक ही परिवार पिछले 4 पीढ़ियों से करता आ रहा है। तम्बडी जोगेश्वरी गणपति को पुणे का रक्षक माना जाता है।

पता : 33 (A) बुधवार पेठ, पुणे

4. केसरीवाड़ा गणेशोत्सव ट्रस्ट

Ganesha

यह पुणे का एक बेहद लोकप्रिय गणेश उत्सव मंडल है। इसकी स्थापना वर्ष 1894 में हुई थी। जिस समय इस गणेशोत्सव की शुरुआत हुई थी, तब यह विनचुरकर वाड़ा में होती थी। जो कुमठेकर रोड पर स्थित है। यह तिलक का पैतृक निवास भी थी। वर्तमान स्थान पर यानी केसरीवाड़ा में यह पूजा वर्ष 1905 में शुरू हुई।

5. गुरुजी तालीम गणपति

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पुणे के सबसे पुराने गणपति मंडल में से एक गुरुजी तालीम गणपति की स्थापना वर्ष 1887 में हुई थी। पूणे के निवासियों का इस पूजा पंडाल पर काफी आस्था है। गणपति उत्सव के परंपरागत स्वरूप को देखने और समझने के लिए पूणे का गुरुजी तालीम गणपति बेस्ट जगह है। इस गणपति उत्सव पर पुणे के इस पूजा पंडाल को मिस करने की गलती बिल्कुल मत किजीए।

पता : लक्ष्मी रोड, पूणे

कब निकलेगी दगड़ू सेठ की 'बारात'

प्लेग में अपने बेटे को खोने के बाद कोलकाता के हलवाई दगड़ू सेठ, जो पूणे में अपनी पत्नी और बेटे के साथ गये थे, ने बेटे की आत्मा की शांति के लिए भगवान गणेश के मंदिर की 1893 में स्थापना करवायी थी। बाल गंगाधर तिलक ने इस मंदिर में गणेशोत्सव की शुरुआत की थी, जो आज तक काफी धुमधाम से मनायी जाती है। दगड़ू सेठ गणपति की मूर्ति के दोनों कान सोने से बने हुए हैं।

ganesh ji

इसके साथ मूर्ति का मुकुट भी 9 किलो वजनी सोने का बना हुआ है। इस साल विसर्जन के लिए दगड़ू सेठ की बारात शाम को 4.30 बजे निकलेगी। कहा जाता है कि इस मंदिर में अगर कोई व्यक्ति अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखता है तो वह 30 दिनों के अंदर जरूर पूरी होती है।

महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की है कि इस साल गणेश चतुर्थी के दिन पुणे मेट्रो रात को 12 बजे तक चलेगी

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