जब भी कहीं बाहर आना-जाना होता है, तो हम अक्सर पूरा तैयार होने के बाद ही कैब बुक करते हैं। कभी-कभी तो कैब बड़ी ही आसानी से उपलब्ध हो जाता है लेकिन कई बार कैब बुक करने में भारी परेशानी होती है। कभी ऐप पर कैब ही उपलब्ध नहीं दिखाता तो कभी ड्राइवर द्वारा कैब कैंसिल कर देने की समस्या आती है। लेकिन इन सबके अलावा यात्रियों को जो समस्या सबसे ज्यादा झेलनी पड़ती है, वह है किराया या सरचार्ज समेत किराया।
अब यात्रियों की इस परेशानी को दूर करने और ड्राइवर द्वारा मनमाना किराया वसूलने की शिकायतों को बंद करने के उद्देश्य से ही पुणे के कैब ड्राइवर संगठन की ओर से एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। इस फैसले के तहत अब पुणे व आसपास के कुछ इलाकों में ऐप आधारित सभी कैब ड्राइवर सरकार द्वारा निर्धारित किराया ही वसूलेंगे।

Indian Express की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार पिछले शुक्रवार (18 अप्रैल) को इंडियन गिग वर्कर्स फ्रंट (IGWF), जो इस क्षेत्र में कैब ड्राइवरों का प्रतिनिधित्व करता है, के साथ प्रतिनिधियों के साथ ऐप कैब ड्राइवरों की बैठक हुई। इस बैठक में फैसला लिया गया कि ऐप कैब ड्राइवर भी अब ऑटोरिक्शा ड्राइवरों के किराया संरचना के आधार पर ही यात्रियों से किराया वसूलेंगे।
इस बारे में मीडिया से बात करते हुए IGWF के अध्यक्ष केशव क्षीरसागर ने बताया कि यह पहल यात्रियों और ड्राइवर, दोनों के बीच पारदर्शिता को बनाए रखने और किराए को लेकर होने वाले झगड़ों व बहसबाजी को खत्म करने के उद्देश्य से ही लिया गया है।
कब से लागू होगी नई किराया पद्धति और क्या होगा नया किराया?
केशव क्षीरसागर का कहना है कि अब तक 10 किमी की दूरी को तय करने में ऐप कैब का किराया जहां ₹249 तक देना पड़ता था, उसमें सरचार्ज ही पहले ₹175 जोड़ दिया जाता था। लेकिन नई किराया पद्धति के लागू होने के बाद वह नहीं लगेगा।
नई किराया पद्धति के लागू होने के बाद ऐप कैब का किराया पहले 1.5 किमी के लिए ₹37 और उसके बाद अतिरिक्त दूरी में हर किमी के लिए किराया ₹25 देना होगा। उन्होंने बताया कि नई किराया पद्धति 1 मई 2025 से लागू होने वाली है। हालांकि पीक ट्रैफिक समय में किराया कभी-कभी थोड़ा बढ़ जाती है।

IGWF ने एक नई वेबसाइट को भी लॉन्च किया है, जिसपर जाकर यात्री अपने पूरे ट्रिप का किराया कैलकुलेट कर सकेंगे। हर राइड के किराए का कैलकुलेशन यात्री आसानी से और सही तरीके से कर सकें, इसे सुनिश्चित करने के लिए कैब में एक QR कोड होगा, जो वेबसाइट से लिंक किया हुआ रहेगा। राइड पूरा होने के बाद यात्री को www.onlymeter.in वेबसाइट पर जाना होगा। यहां उन्हें कैब या ऑटो में से कोई एक विकल्प चुनना पड़ेगा और यात्रा की दूरी बतानी पड़ेगी।
इसके बाद सरकार द्वारा निर्धारित किराए के आधार पर उनका कितना किराया होगा, इसकी जानकारी मिल जाएगी। इस वेबसाइट पर जाने पर जहां आप राइड के किमी के संबंध में जानकारी भरेंगे, ठीक उसी जगह पर एक छोटा सा चेकबॉक्स भी होगा, जिसमें ऐप कैब AC है या नहीं, इसकी जानकारी देनी होगी। केशव क्षीरसागर ने बताया कि वेबसाइट पर AC कैब के लिए सरकार द्वारा निर्धारित किराया भी वहां दी गयी है, जिसे यात्री खुद से भी जांच सकेंगे।
केशव का कहना है कि इस पहल से कैब ड्राइवरों पर भी किराया कम लेने का दबाव कम हो जाएगा। इससे यह सुनिश्चित हो जाएगा कि यात्रियों को भी किराए के संबंध में पूरी जानाकीर है और ड्राइवर भी सही किराया ले सकेंगे। इससे यात्रियों और ड्राइवर दोनों को भी संतुलन बनाने में सुविधा होगी और दोनों को ही फायदा मिलेगा।
तो 1 मई के बाद से अगर आप ओला, उबर, रैपिडो जैसे ऐप कैब से यात्रा करने वाले हो या ऑटोरिक्शा से, आप सरकार द्वारा निर्धारित किराए पर ही यात्रा करेंगे। IGWF का यह फैसला खासतौर पर पुणे, पिंपरी-चिंचवाड और बारामती इलाकों में लागू होने वाला है।



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