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पुणे में रोमांच का डोज़ होगा डबल! 8 पर्यटन स्थलों पर बनेंगे Ropeways, जानिए कौन-कौन सी जगहें?

महाराष्ट्र के पर्वतीय और धार्मिक स्थलों पर आम लोगों के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों की पहुंच को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 45 जगहों पर रोपवे परियोजना (Ropeways Project) की घोषणा की है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इनमें से 16 रोपवे का निर्माण राज्य सरकार द्वारा और बाकी बचे 29 जगहों पर केंद्रीय नेशनल हाईवेज लॉजिस्टिक मैनेजमेंट (NHLML) की तरफ से रोपवे का निर्माण करने का फैसला लिया गया है।

राज्य भर में जिन 45 जगहों पर रोपवे का निर्माण किया जाएगा, उनमें से 8 ऐसी जगहें हैं, जो पुणे और पड़ोसी जिला सातारा में मौजूद है। बताया जाता है कि देशभर के पहाड़ी जगहों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की पर्वतमाला योजना के तहत इस रोपवे परियोजना की शुरुआत करने के बारे में विचार किया जा रहा है।

pune ropeway locations

बड़े-बड़े शहरों से दूर पहाड़ी और छोटे गांवों में रोपवे जैसी सुविधाएं मुख्य रूप से किलों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए तैयार करने की योजना है। उम्मीद की जा रही है कि इससे न सिर्फ ज्यादा पर्यटक इन अनछुई जगहों की तरफ आकर्षित होंगे बल्कि इससे स्थानीय इलाकों की आर्थिक उन्नति भी होगी और जिले का सर्वांगिन विकास भी होगा। Punepulse की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने रोपवे परियोजना को अपनी मंजूरी दे दी है और आधिकारिक तौर पर काम शुरू करने का आदेश भी जारी कर दिया गया है।

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पुणे व आसपास में जिन 8 जगहों पर रोपवे बनाने का प्रस्ताव है उनमें शामिल हैं -

  • खंडोबा, नीमगांव (खेड तालुका)
  • भीमाशंकर (खेड तालुका)
  • शिवनेरी (जुन्नार तालुका)
  • लेनयाद्री (जुन्नार तालुका)
  • दर्या घाट (जुन्नार तालुका)
  • सिंहगढ़ (पुणे तालुका)
  • जेजुरी (पुरंदर तालुका)
  • राजगढ़ (वेल्हा तालुका)
pune maharashtra ropeways project

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया है कि इनमें से 3 जगहें जुन्नार तालुका और 2 खेड तालुका में है। बाकी की सभी जगहें पुणे, पुरंदर और वेल्हा तालुका में मौजूद है। रोपवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर दो विकल्प दिये गये हैं। अब जिस जगह पर रोपवे बनाने की योजना बनायी गयी है, वह भूमि लोक निर्माण विभाग (PWD) की है तो उसे 30 सालों के लिए NHLML को लीज पर दी जाएगी।

लेकिन जमीन अगर सरकारी या किसी की निजी है, तो पहले PWD उस जमीन का अधिग्रहण करेगी और उसके बाद NHLML को सौंपी जाएगी। उम्मीद की जा रही है कि एक बार पूरी तरह से निर्माण पूरा होने के बाद ये रोप वे न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि इलाके के पूर्ण विकास और आर्थिक उन्नति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Hindustan Times की मीडिया रिपोर्ट में पता चला है कि सबसे पहले सिंहगढ़ रोपवे परियोजना का प्रस्ताव वर्ष 2015 में रखा गया था। उस समय पुणे शहरी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMRDA) को इसे पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। हालांकि कई तरह के अध्ययनों और चर्चाओं के बावजूद PMRDA इस परियोजना को पूरा नहीं कर पायी थी। लेकिन अब PWD को इन सभी जगहों पर रोपवे बनाने और इस काम की देखरेख करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

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