सर्दी का मौसम चल रहा है और ऊपर से दो दिन बाद नया साल भी.. तो ऐसे में कहीं जाने की तो प्लानिंग की ही होगी और अगर नहीं भी की है तो कोई बात नहीं। क्योंकि हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में शायद ही कभी आपने सुना हो। हम बात कर रहे हैं 'मरीन ड्राइव' की लेकिन मुंबई वाले नहीं, उत्तर प्रदेश वाला।
सही कहा था न मैंने कि आपने इस जगह के बारे में नहीं सुना होगा। इस लेख में हम बात करेंगे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित 'रामगढ़ ताल' की, जिसे पूर्वांचल का मरीन ड्राइव भी कहा जाता है। ये स्थान वीकेंड मनाने के लिए बिल्कुल परफैक्ट है। यहां आप अपने परिवार, दोस्त या पार्टनर किसी के साथ जा सकते हैं।

सर्दी के मौसम में यूपी थोड़ा धुंधमय दिखाई देता है, लेकिन इस बीच अगर धूप निकल जाए तो फिर मानिए ऐसा लगता है, जैसे प्रकृति अपनी स्वर्णिम आभा बिखेरी हुई धरती पर अपनी बाहें फैलाई हो और बस... हमारा इंतजार कर रही हो। इस बात को सच करता दिखाई देता है रामगढ़ ताल..।
न्यू ईयर मनाने के लिए इस खूबसूरत स्थान के अलावा भला और क्या हो सकता है? तो अगर गोरखपुर के आसपास रहते हैं तो रजाई से निकलिए और गाड़ी उठाइए और पहुंच जाइए रामगढ़ ताल। प्रकृति की स्वर्णिम आभा के बीच आपको खुद प्रकृति की गोद में बैठे होने का एहसास मिलेगा।

रामगढ़ ताल का ऐतिहासिक महत्व
गोरखपुर की गरिमा को बढ़ाता हुआ यह ताल सिर्फ जिले में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। कहते है 600 ईसा पूर्व में गोरखपुर का नाम रामग्राम था और यहां कोलीय गणराज्य था। यह वही वंश है, जिससे गौतम बुद्ध की माता और उनकी पत्नी आती थी। उन दिनों इसी रामगढ़ ताल से उनका आना जाना हुआ करता था, जिसका राप्ती नदी का ही हिस्सा था लेकिन बाद में नदी की दिशा बदलने पर यह एक ताल के रूप में उभरकर सबके सामने आया। फिर स्थानीय लोगों ने रामग्राम के नाम पर ही इस ताल का नाम 'रामगढ़ ताल' रख दिया।
रामगढ़ ताल के बारे में किवदंती
रामगढ़ ताल को लेकर आसपास के लोग एक किवदंती भी कहते हैं। कहा जाता है, प्राचीन काल में यहां एक विशाल नगर (राज्य) हुआ करता था, जो एक ऋषि के श्राप से तबाह हो गया और एक ताल बन गया। शुरुआत में यह तालाब 18 वर्ग किमी में फैला था लेकिन अतिक्रमण के चलते अब यह बस 7 वर्ग किमी में ही सिमट कर रह गया है।
पूर्वांचल का मरीन ड्राइव कहलाता है यह ताल
24 सितम्बर, 1985 को जब वीर बहादुर सिंह राज्य के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने रामगढ़ ताल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई लेकिन 1989 में उनके असामयिक मृत्यु से यह योजना एक योजना ही बनकर रह गई। इसके बाद जब राज्य की कमान योगी आदित्यनाथ के कंधों पर आई तो उन्होंने ताल को लेकर नई योजनाएं बनाई की कीमत को एक फिर बार समझा और इसे लेकर नई योजनाएं बनाईं, जिसके चलते आज ये रामगढ़ ताल से पूर्वांचल का मरीन ड्राइव बन चुका है। इसकी सुंदरता देखने के लिए लोग दूर-दूर आते हैं और अपनी शाम को और भी हसीन कर जाते हैं। शाम के समय यहां पर्यटकों का जमावड़ा लगता है।
रामगढ़ ताल क्यों जाए?
कहा जाता है कि जहां प्राकृतिक सुंदरता हो, वहां किसी और चीज की जरूरत नहीं पड़ती। हरियाली के बीच बसे इस ताल की भी कुछ यही कहानी है, जो यहां आने वाले पर्यटक महसूस करते हैं। यहां नैनीताल की तरह बोटिंग का भी आनंद लिया जा सकता है और राजस्थान की तरह ऊंट की सवारी का भी।
यहां पर फाउंटेन भी है। शाम 7 बजे आप यहां फाउंटेन लाइट म्यूजिकल शो का भी आनंद ले सकते हैं, जो चांदनी रात में देखने पर और भी खूबसूरत दिखाई देता है। अब इतना जानने के बाद तो आपके अंदर एक ललक तो पैदा हो ही गई होगी कि आप पूर्वांचल के इस खूबसूरत मरीन ड्राइव घूमने जाए तो तैयार हो जाइए और रामगढ़ ताल के साथ एक बेहतरीन न्यू ईयर मनाइए।
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