आज हम एक ऐसे मंदिर के बारे में बात करने जा रहे हैं जो अपनी राजशाही अंदाज के लिए जाना जाता है। यह मंदिर किसी महल से कम नहीं लगता है, यहां तक की यहां प्रवेश के लिए जो समय निश्चित है, वो भी बाकी मंदिरों से अलग है। अरावली पर्वत श्रृंखला में बना यह मंदिर अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है। जी हां, राजस्थान के पाली जिले में स्थित यह मंदिर रणकपुर जैन मंदिर के नाम से जाना जाता है।
यह मंदिर अपनी विशाल आकृति, वास्तुकला और सुंदरता के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। यह जैन धर्म के पांच प्रमुख मंदिरों में से एक है, जो जैन तीर्थंकर आदिनाथ जी को समर्पित है। चारों तरफ जंगलों से घिरा हुआ यह मंदिर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। इस खूबसूरत सी मंदिर की नक्काशी और डिजाइन देख आप हैरान हो जाएंगे, आपको लगेगा ही नहीं कि आप किसी मंदिर में खड़े हैं बल्कि आपको एक महल की अनुभूति होगी।

रणकपुर जैन मंदिर का इतिहास
रणकपुर जैन मंदिर के इतिहास के बारे में बात की जाए तो यह मंदिर करीब 600 साल पुराना है। जी हां, 6 शाताब्दी पहले बना यह मंदिर अपनी राजशाही अंदाज के लिए जाना जाता है, जिसे उस समय बनाने में करीब 99 लाख रुपये का खर्च आया था। राणा कुम्भा के शासनकाल में तैयार हुई यह मंदिर अपनी रोचक कहानी के लिए भी जाना जाता है।
कहा जाता है कि राणा कुम्भा ने मंदिर बनाने के लिए अपनी जमीन को धरनशाह को दे दी थी और साथ ही एक नगर बसाने का भी प्रस्ताव रखा था। इस भव्य मंदिर के रखरखाव के लिए साल 1953 में इसकी देखरेख की जिम्मेदारी एक ट्रस्ट को दे दी गई, जिसके बाद इसकी सुंदरता को एक आयाम मिला। आज यह महल जैसा दिखने वाला मंदिर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।
रणकपुर जैन मंदिर का आकर्षण
इस मंदिर में 4 प्रवेश द्वारा हैं। मंदिर में जैन तीर्थंकर आदिनाथ की संगमरमर से बनी 4 मूर्तियां हैं, जिनके मुख चारों दिशाओं की ओर हैं। इन सभी मूर्तियों की ऊंचाई 6 फीट है। इसीलिए इसे चतुर्मुख मंदिर भी कहा जाता है। इसके अलावा मंदिर चार-चार बड़े-बड़े पूजा स्थल व प्रार्थना कक्ष और 76 छोटे गुम्बद जैसे दिखने वाले स्थान भी है, जो मनुष्य के काल-चक्र की 84 योनियों को दर्शाते हैं।

रणकपुर जैन मंदिर का प्रवेश शुल्क
रणकपुर जैन मंदिर बाकी मंदिरों से थोड़ा अलग है। इसमें प्रवेश करने के लिए भारतीयों के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है लेकिन विदेशियों के लिए यहां 200 रुपये का प्रवेश शुल्क लगता है।
रणकपुर जैन मंदिर खुलने व बंद होने का समय - दोपहर 12:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे तक।
रणकपुर जैन मंदिर में जाने का सही समय
जंगलों से घिरे इस मंदिर में जाने का सही समय जुलाई से सितंबर तक का है। लेकिन आप यहां कभी भी जा सकते हैं। यहां पूरे साल पर्यटकों को देखा जा सकता है, जो मंदिर में दर्शन करने कम और यहां की खूबसूरती और भव्यता देखने अधिक आते हैं। राजशाही अंदाज वाले इस मंदिर में जबरदस्त फोटोग्राफी भी की जा सकती है।
रणकपुर जैन मंदिर का खासियत
1. इस मंदिर में 1444 खंभे (पिलर) हैं, जो इसकी भव्यता को दिखाते हैं।
2. इन खंभों की डिजाइन इस तरह से की गई है कि कहीं से भी देखने पर मुख्य पूजा स्थल को देखने में बाधा नहीं पहुंचती है।
3. मंदिर की छत पर भी बेहतरीन नक्काशी की गई है, जो पर्यटकों को खूब लुभाती है।
4. सभी खंभों पर अलग-अलग तरह नक्काशी बनाई गई है, जिसे आप देखते रह जाएंगे।
5. इसे आप खंभों वाला मंदिर भी कह सकते हैं।
रणकपुर जैन मंदिर कैसे पहुंचें?
नजदीकी हवाई अड्डा - उदयपुर एयरपोर्ट (106 किमी)
नजदीकी रेलवे स्टेशन - उदयपुर रेलवे स्टेशन (92 किमी)



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