योगनगरी ऋषिकेश सिर्फ अध्यात्म, एडवेंचर और योगाभ्यास के लिए ही नहीं बल्कि अपनी एक अलग धार्मिक पहचान भी रखता है। क्या आप जानते हैं देश और विदेशों में फैले 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ कुंजापुरी ऋषिकेश के पास ही मौजूद है। हर साल शारदीय नवरात्रि के समय कुंजापुरी में न सिर्फ बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं बल्कि अपनी मनोकामना भी मांगते हैं।
9 दिनों तक इस मंदिर को केंद्र में रखकर नवरात्रि का भव्य मेला लगता है जिसे देखने और माता के दर्शन करने के लिए दूर-दराज के इलाकों से भी लोग देवभूमि उत्तराखंड के ऋषिकेश में पहुंचते हैं।
क्यों कहलाता है कुंजापुरी?
ऋषिकेश से थोड़ी दूरी पर ही मौजूद कुंजापुरी मंदिर 51 शक्तिपीठ में से एक है। समुद्रतल से लगभग 1676 मीटर की ऊंचाई पर यह मंदिर स्थित है, जिसकी पौराणिक मान्यताएं हैं। यह देवी दुर्गा का एक मंदिर है जो शिवालिक रेंज में 13 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यताओं के अनुसार प्रजापति दक्ष के यज्ञ में महादेव का अपमान सुनकर देवी सती ने अपने आप की यज्ञकुंड में ही आहुति दे दी थी।
देवी सती की मृत्यु के शोक में महादेव उनका पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे थे। महादेव को इस शोक से मुक्त करवाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर को कई टुकड़ों में काट डाला था। माता सती के शरीर के टुकड़े और उनके आभूषण जहां-जहां गिरे वहां शक्तिपीठ बन गया। कहा जाता है कि कुंजापुरी में देवी सती की शरीर का ऊपरी हिस्सा गिरा था।
दिखता है पहाड़ों का शानदार नजारा
देवी कुंजापुरी मंदिर से गढ़वाल पहाड़ियों का बहुत ही खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। अगर मौसम साफ रहा तो यहां से पहाड़ों की कई महत्वपूर्ण चोटियां जैसे बंदरपंच, स्वर्गारोहिणी, गंगोत्री और चौखम्भा आदि को देख सकते हैं। इसके साथ ही अगर आप दक्षिण दिशा की ओर अपनी नजरें दौड़ाएं तो यहां आपको ऋषिकेश और हरिद्वार की मनोरम घाटियां नजर आएंगी। तो जब भी कुंजापुरी मंदिर जाएं तो अपने साथ मोबाइल अथवा अपना कैमरा लेकर जाना बिल्कुल मत भूलें।
गिरा था देवी सती के शरीर का हिस्सा
कुंजापुरी में देवी सती के शरीर का ऊपरी हिस्सा यानी कुंज गिरा था। इसलिए इस स्थान को कुंजापुरी कहा जाता है। यह मंदिर ऋषिकेश से लगभग 25 किमी की दूरी पर मौजूद है। हर साल नवरात्रि के समय यहां आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नवरात्रि के समय इस मंदिर में जौ को बोया जाता है, जो बाद में हरियाली के रूप में उग जाता है।
इस हरियाली को ही बाद में प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित किया जाता है। इस मंदिर के प्रति यहां आने वाले श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मंदिर हर दिन खुला रहता है। अगर आप नवरात्रि के समय ऋषिकेश जाने की योजना बना रहे हैं तो अपनी योजना में कुंजापुरी माता का मंदिर को शामिल करें।
कैसे पहुंचे कुंजापुरी मंदिर?
कुंजापुरी राष्ट्रीय राजमार्ग ऋषिकेश-गंगोत्री के आगराखाल के पास मौजूद है जो ऋषिकेश से लगभग 25 किमी की दूरी पर है। यह मंदिर नरेंद्रनगर से मात्र 8 किमी की दूरी पर ही स्थित है। ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग से बस या कार से हिडोलाखाल जाएं। वहां से कुंजापुरी मंदिर तक जाने के लिए किराए पर छोटी गाड़ियां आसानी से मिल जाएंगी।
इसके अलावा नई टिहरी जिला मुख्यालय से भी आगराखाल के रास्ते कुंजापुरी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। यहां से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून का जौलीग्रांट एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से मंदिर तक पहुंचने के लिए किराए पर गाड़ियां ले सकते हैं। अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश का योगनगरी रेलवे स्टेशन है। स्टेशन से भी मंदिर के लिए गाड़ियां किराए पर मिल जाएंगी।



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