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शारदीय नवरात्र 2017: कोलकाता का काली घाट..जहां गिरी थी मां सती के पैर की उंगलियाँ

कोलकाता का कालीघाट क्षेत्र अपने काली माता के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। कालीघाट का काली मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है।

By Goldi

मान्यता है कि माता कालरात्रि की पूजा करने से मनुष्य समस्त सिद्धियों को प्राप्त कर लेता है. माता कालरात्रि पराशक्तियों (काला जादू) की साधना करने वाले जातकों के बीच बेहद प्रसिद्ध हैं। मां की भक्ति से दुष्टों का नाश होता है और ग्रह बाधाएं दूर हो जाती हैं।

असुरों को वध करने के लिए दुर्गा मां बनी कालरात्रि
देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है इनके बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में विधुत की माला है। इनके चार हाथ हैं जिसमें इन्होंने एक हाथ में कटार और एक हाथ में लोहे का कांटा धारण किया हुआ है। इसके अलावा इनके दो हाथ वरमुद्रा और अभय मुद्रा में है। इनके तीन नेत्र है तथा इनके श्वास से अग्नि निकलती है।कालरात्रि का वाहन गर्दभ(गधा) है।

जैसा कि हम आपको बता चुके हैं हमारी ये पूरी सीरीज मां दुर्गा और नवरात्रि को समर्पित है तो आज इसी क्रम में हम आपको अवगत करायेंगे कालीघाट शक्तिपीठ से।

कालीघाट शक्तिपीठ

कालीघाट शक्तिपीठ

कालीघाट शक्तिपीठ (बांग्ला: কালীঘাট মন্দির) कोलकाता का एक क्षेत्र है, जो अपने काली माता के मंदिर के लिये प्रसिद्ध है। इस शक्तिपीठ में स्थित प्रतिमा की प्रतिष्ठा कामदेव ब्रह्मचारी (सन्यासपूर्व नाम जिया गंगोपाध्याय) ने की थी। शक्तिपीठ बनने का मुख्य कारण माँ सती के दाये पैर की कुछ अंगुलिया इसी जगह गिरी थी। आज यह जगह काली भक्तो के लिए सबसे बड़ा मंदिर है। माँ की प्रतिमा में जिव्हा सोने की है जो की बाहर तक निकली हुई है।PC: Sankarrukku

आस्था का अनुठा केंद्र

आस्था का अनुठा केंद्र

यह कालिका का मंदिर काली घाट के नाम से भी पहचाना जाता है और पूरे भारत में आस्था का अनुठा केंद्र है।माँ की मूरत का चेहरा श्याम रंग में है और आँखे और सिर सिन्दुरिया रंग में है। सिन्दुरिया रंग में ही माँ काली के तिलक लगा हुआ है और हाथ में एक फांसा भी इसी रंग में रंगा हुआ है। देवी को स्नान कराते समय धार्मिक मान्यताओं के कारण प्रधान पुरोहित की आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है।PC: Balajijagadesh

अघोर साधना और तांत्रिक साधना के लिए प्रसिद्ध

अघोर साधना और तांत्रिक साधना के लिए प्रसिद्ध

कालीघाट का मंदिर अघोर साधना और तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। कालीघाट के पास स्थित केवड़तला श्मशान घाट को किसी जमाने में शव साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता था।PC: Clyde Waddell

मां शीतला का मंदिर

मां शीतला का मंदिर

कालीघाट परिसर में मां शीतला का मंदिर भी है। मां शीतला को भोग में समिष भोज चढ़ाया जाता है। यानी मांस, मछली अंडा सब कुछ। मंदिर में मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा होती है। मैंने देखा लोग मंदिर में बने काउंटर से से मांसाहारी प्रसाद खरीदते हैं और मां को अर्पित कर उसे प्रसाद के रुप में वहीं ग्रहण करते हैं।

खुलने का समय

खुलने का समय

कालीघाट मां का मंदिर सुबह 5 बजे खुल जाता है। दोपहर 12 से 3.30 बजे तक बंद रहता है। शाम को 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक फिर मंदिर खुला रहता है। अगर आप मंदिर दर्शन करने आए हैं तो यहां पंडों से सावधान रहें। विजयादशमी और बंगला नव वर्ष के दिन यहां अपार भीड़ उमड़ती है।

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

यहां के मुख्य स्थल धर्मतल्ला से बस मेट्रो और ट्राम से कालीघाट पहुंचा जा कता है। कालीघाट में कोलकाता मेट्रो का स्टेशन भी है। कालीघाट ट्राम से भी पहुंचा जा सकता है। हावड़ा रेलवे स्टेशन से कालीघाट की दूरी सात किलोमीटर है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पुश्तैनी घर काली घाट इलाके में ही है।

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