भारत को 'अतुल्य भारत' कहा जाता है। यहां ऐसी-ऐसी चीजें मौजूद हैं, जिनके बारे में विश्व का कोई और देश कल्पना भी नहीं कर सकता है। इसी बात को सच साबित करता है महाराष्ट्र का एक गांव। इस गांव के लोग कुछ ऐसा करते हैं, जिसके बारे में दुनिया तो दूर भारत में ही किसी और जगह के लोग सोच भी नहीं सकते हैं।

दरअसल, इस गांव के लोग जहरीले सांपों को अपने घरों में पनाह देते हैं। जी हां, आपने सही सुना। महाराष्ट्र के इस गांव के लोग कोबरा जैसे जहरीले सांपों को अपने घरों में रखते हैं। पर क्यों इस गांव में रहने वाला हर परिवार इस तरह के खतरे से खेलता है? क्या इन परिवारों के लोगों को अपने बच्चों की सुरक्षा का डर भी नहीं सताता है?
कहां है यह गांव?
महाराष्ट्र के शोलापुर जिले में मौजूद शेतपाल गांव काफी अनोखा है। भगवान शिव की पूजा हो या नागपंचमी, जब पूरे देश में लोग इन खास मौकों पर ही सिर्फ सांप की पूजा कर उसका आर्शिवाद लेने की हिम्मत जुटा पाते हैं, तब शेतपाल गांव के लोग जहरीले सांपों के साथ रहते हैं। यह गांव पुणे से लगभग 200 किमी की दूरी पर स्थित है। गांव के किसी भी घर में सांपों के आने-जाने पर ना तो कोई रोक-टोक होती है और ना ही लोग यहां सांपों को देखकर घबराकर चिल्लाने लगते हैं। सांप भी इस गांव में किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
क्यों हर घर में बनाया जाता है सांप का बिल?

शेतपाल गांव के हर एक घर में सांपों के रहने के लिए बिल बनाया जाता है। सांपों के लिए बिल सिर्फ गांव के पुराने घरों में ही नहीं बल्कि नये बनने वाले घरों में भी बनाया जाता है। ये बिल घर के किसी ऐसे कोने में बनाया जाता है, जहां अधिक शोर-शराबा नहीं होता हो और सांपों को रहने में कोई परेशानी ना हो। सांप भी गांव में रहने वाले लोगों के साथ घुल-मिलकर रहते हैं। वे किसी भी ग्रामीण को ना तो डंसते हैं और ना ही कोई नुकसान पहुंचाते हैं। बताया जाता है कि आज तक ऐसा कोई भी मामला सुनने में नहीं आया है कि सांप ने किसी भी ग्रामिण पर हमला किया हो या किसी को डंसा हो।
सांपों से खेलते हैं बच्चे

शेतपाल गांव में लोग सांपों और जहरीले नागों को पालतू जानवरों की तरह मानते हैं। बच्चे जब स्कूल जाते हैं, तो कई बार इन सांपों को हाथों पर किसी चुड़ी या कंगन की तरह लपेटकर जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस गांव का हर बच्चा सांप को अपना दोस्त मानता है और उनसे नहीं डरता है। दरअसल, यह बचपन से ही इन खतरनाक जानवरों के साथ रहने का नतीजा है, कि सांप भी ग्रामिणों को देखकर कभी उनपर हमला करने की कोई कोशिश नहीं करते हैं। बच्चों से बिल्कुल किसी रस्सी के तरह लिपटे पड़े रहते हैं।
कैसे पहुंचे शेतपाल?
शेतपाल गांव में सांपों के साथ लोग कब से और क्यों रहने लगे, इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि शेतपाल आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ गांव है। इसलिए संभवतः अपनी आजीविका का साधन बनाने के लिए शेतपाल गांव के लोगों ने सांपों को पालना या उनके साथ रहना शुरू कर दिया था। इस गांव में जाना किसी भी व्यक्ति के लिए काफी हिम्मत का काम है।
अगर आप यह हिम्मत दिखाना चाहते हैं और इन सांपों को अपना भी दोस्त बनाना चाहते हैं तो आपको इनके लिए दुध, अंडे और खाने के दूसरे सामान लेकर यहां जाना पड़ेगा। शेतपाल गांव का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मोदनिंब स्टेशन है। यहां से लोकल गाड़ियों से आप शेतपाल गांव पहुंच सकते हैं। अगर आप एयरपोर्ट से शेतपाल गांव जाना चाहते हैं तो नजदीकी एयरपोर्ट पुणे एयरपोर्ट है, जहां से इस गांव के लिए कैब मिल जाएगी।



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