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इस रहस्यमयी एक शिवलिंग के हैं 359 चेहरे, हर चेहरे पर है अलग-अलग भाव

हमारे देश में भगवान शिव के कई मंदिर हैं जहां आए दिन कोई ना कोई चमत्कारिक घटना घटती रहती है। महाराष्ट्र में भी एक ऐसा मंदिर है जो अपने आप में कई राज और रहस्यों को समेटे हुए है। यह मंदिर सोलापूर जिले में स्थित हरिहरेश्वर मंदिर है।

harihareshwar temple

इस मंदिर में भगवान शिव का एक ऐसा शिवलिंग स्थापित है जिसके एक या दो नहीं बल्कि सैंकड़ों चेहरे हैं।

आइए आपको हरिहरेश्वर मंदिर के बहुमुखी शिवलिंग के बारे में बताते हैं :

एकलौता मंदिर जहां शिव-विष्णु साथ में पूजे जाते

महाराष्ट्र के सोलापूर जिले के कुंडल संगम में है हरिहरेश्वर मंदिर। सोलापूर में हरिहरेश्वर मंदिर एकलौता ऐसा मंदिर है, जहां भगवान शिव और विष्णु एक साथ में पूजे जाते हैं। हरिहरेश्वर मंदिर में हुए उत्खनन में बहुमुखी शिवलिंग को खोद कर निकाला गया था। इसके बाद आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने इस शिवलिंग को संरक्षित किया। देश भर में अपने आप में यह एकलौता सबसे अनोखा शिवलिंग है।

एक शिवलिंग के चेहरे अनेक

bahumukhi shivling

हरिहरेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग तो एक है लेकिन इसके चेहरे कई हैं। इस शिवलिंग में 9 पंक्तियों में भगवान शिव के चेहरे उकेरे हुए हैं। शिवलिंग में कुल मिलाकर 359 चेहरे हैं और खास बात यह है कि भगवान शिव के प्रत्येक चेहरे के भाव अलग-अलग हैं। इस शिवलिंग को बहुमुखी शिवलिंग कहा जाता है। शिवलिंग का वजन लगभग 4.5 टन बताया जाता है। यह शिवलिंग 11वीं शताब्दी का बना बताया जाता है। शिवलिंग की लंबाई लगभग 1.99 मीटर है। दूर-दराज के इलाकों से भक्त यहां भगवान शिव के इस अनोखे शिवलिंग के दर्शन करने आते रहते हैं।

यूं मिला शिवलिंग

1999 में सोलापूर के एक कॉलेज के प्रोफेसर ने इस मंदिर को सर्वप्रथम खोजा था। अपने विद्यार्थियों के साथ यहां आने पर उन्हें पत्थरों के नीचे छिपा यह मंदिर मिला था। इस मंदिर में स्वर्ग मंडप (खुला मंडप) है, जो उस समय के मंदिरों में काफी कम देखने को मिलता था। हरिहरेश्वर मंदिर में शिवलिंग खुदाई के दौरान मिला था। इस प्राचिन मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए आर्कियोलॉजी की टीम मंदिर परिसर में पहुंची थी। पुराने पड़े पत्थरों को हटाने के क्रम में पता चला कि मंदिर का कुछ हिस्सा जमीन के अंदर धंसा हुआ है। उसी स्थान पर खुदाई करने के बाद उन्हें शिवलिंग मिला था।

पश्चिममुखी मंदिर और दो गर्भगृह

bahumukhi shivling

शिवलिंग में ऊपरी भाग की तरफ उकेरे गये चेहरों में भगवान शिव के सिर्फ चेहरे और जटाएं दिखायी देती हैं। लेकिन नीचे की तरफ के चेहरों में भगवान शिव ध्यानमग्न अवस्था में बैठी हुई मुद्रा में दिखायी देते हैं। आमतौर पर सभी मंदिर पूर्व या फिर उत्तरमुखी होते हैं लेकिन हरिहरेश्वर मंदिर पश्चिममुखी मंदिर है। इस मंदिर में एक नहीं बल्कि दो गर्भगृह हैं। एक गर्भगृह में भगवान विष्णु यानी हर और दूसरे गर्भगृह में भगवान शिव यानी हरि स्थापित हैं। यह मंदिर भीमा और सीमा नदियों के संगम स्थल पर स्थित है। यह जगह महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमाओं को भी चिन्हित करता है।

FAQs
हरिहरेश्वर मंदिर का शिवलिंग कितना पुराना है?

हरिहरेश्वर मंदिर का शिवलिंग 11वीं शताब्दी का बना हुआ बताया जाता है। इस शिवलिंग के साथ ही मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना है।

हरिहरेश्वर मंदिर के शिवलिंग में कितने चेहरे बने हैं?

हरिहरेश्वर मंदिर के शिवलिंग में भगवान शिव के 359 चेहरे बने हुए हैं। ये चेहरे 9 पंक्तियों में अंकित हैं। इन चेहरों में कुछ में भगवान शिव का चेहरा और जटाएं दिख रही हैं और कुछ में भगवान शिव ध्यानमग्न मुद्रा में बैठे हुए नजर आ रहे हैं।

हरिहरेश्वर मंदिर की खासियत क्या है?

महाराष्ट्र के सोलापूर में स्थित हरिहरेश्वर मंदिर में एक साढ़े 4 टन भारी शिवलिंग है। इस शिवलिंग की सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें भगवान शिव के 359 चेहरे बने हुए हैं। हर चेहरा अलग-अलग भावों को दर्शाता है।

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