सूरत-चेन्नई एक्सप्रेसवे, दो प्रमुख शहरों को जोड़ने वाला एक्सप्रेसवे जो रास्ते में कई दूसरे शहरों को जोड़ता हुआ आगे बढ़ेगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया का एक बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट जो न सिर्फ इन दोनों शहरों के बीच यातायात और संपर्कों को आसान व बढ़ावा देगा बल्कि इस वजह से इन शहरों की अर्थव्यवस्था को भी उछाल मिलने की संभावना है।
यह एक्सप्रेसवे सुरत, जो कपड़ा उद्योग का गढ़ है और आईटी हब के तौर पर उभर रहे चेन्नई को जोड़ता है। खास बात है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के बाद यह भारत का दूसरा सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होने वाला है।

चलिए सूरत-चेन्नई एक्सप्रेसवे की विशेषताओं के बारे में आपको जानकारी देते हैं :
6 राज्यों के प्रमुख शहरों को जोड़ेगा
सूरत और चेन्नई के बीच की दूरी लगभग 1600 किमी की है। लेकिन सूरत-चेन्नई एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद यह दूरी काफी घट जाएगी। times now की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1,270 किमी लंबा यह एक्सप्रेसवे भारत का दूसरा सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होने वाला है।
जिन से राज्यों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे :
- गुजरात
- महाराष्ट्र
- कर्नाटक
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
- तमिलनाडु
यह एक्सप्रेसवे सुरत को चेन्नई से जोड़ने के क्रम में जिन प्रमुख शहरों को आपस में जोड़ेगा उनमें तिरुपति, कडप्पा, कुरनूल, कालाबुर्गी, सोलापुर, अहमदनगर और नासिक प्रमुख है। यानी अब सड़क मार्ग से नासिक, सोलापुर या अहमदनगर से दक्षिण भारत जाना या खासतौर पर आंध्र प्रदेश में स्थित विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी के मंदिर में दर्शन करने जाना आसान होने वाला है।

कितनी लागत और कब तक होगा शुरू?
मिली जानकारी के अनुसार सुरत-चेन्नई एक्सप्रेसवे को बनाने में करीब ₹45,000 से ₹50,000 करोड़ की लागत आयी है। इसके साथ ही सुरत-नासिक-अहमदनगर-सोलापुर एक्सप्रेसवे को लगभग ₹30,000 करोड़ और सोलापुर-चेन्नई इकोनॉमिक कॉरिडोर को लगभग ₹15,000 करोड़ की लागत से तैयार किया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सूरत-चेन्नई एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसंबर 2025 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह एक्सप्रेसवे ग्रीनफिल्ड और ब्राउनफिल्ड दोनों तरह से बनाया जाता है।
समय की होगी बचत
सूरत से चेन्नई तक का सफर 1600 किमी का सफर तय करने में लगने वाले समय में एक्सप्रेसवे के बन जाने से पहले के मुकाबले लगभग 6 घंटे का समय कम लगने की संभावना है। इससे न सिर्फ यह सफर आसान होगा बल्कि आरामदायक भी बन जाएगा। एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ती गाड़ियां निर्धारित समय से काफी कम समय में ही इस दूरी को तय कर लेंगी जिससे इस क्षेत्र में या इससे जुड़े कई शहरों में व्यापार व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।



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