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भोपाल का ताजमहल, वास्तुकला से लेकर लागत तक पूरी जानकारी

ताजमहल के बारे में तो हम सभी ने सुना होगा, जो उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित है। लेकिन क्या आपने कभी उन ताजमहलों के बारे में जानने की कोशिश की, जो देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित है। आज हम आपको एक ऐसे ही ताजमहल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित है, जिसे 'भोपाल का ताजमहल' कहा जाता है।

भोपाल में स्थित यह ताजमहल आगरा के ताजमहल की तरह ही बेहद खूबसूरत है, जिसका दीदार करने के लिए देश के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते हैं। तो आइए नजर डालते हैं इस ताजमहल के इतिहास पर व रोचक तथ्यों पर....

भोपाल का ताजमहल

भोपाल का ताजमहल किसने बनवाया था?

भोपाल के ताजमहल की कोई प्रेम कहानी नहीं है और ना ही इसे किसी की याद में बनवाया गया है आपको जानकर हैरानी होगी कि यह यहां किसी की कब्र नहीं है बल्कि यह एक महल है, जिसे शाह जहां बेगम ने रहने के लिए बनवाया था, जो भोपाल रियासत की बेगम थीं।

भोपाल के ताजमहल का पुराना नाम क्या था?

इस महल में सैकड़ों कमरे बनावाए गए थे। इसके अलावा इसमें आठ बड़े हॉल भी है, जहां दावत और बैठक हुआ करती थी। इसके अलावा इसे काफी भव्यता के साथ बनाया गया था। इसकी खूबसूरती के लिए ही इसे ताजमहल नाम दिया गया। कहा जाता है कि जब ये इमारत बन कर तैयार हुई थी, तब इसे राजमहल के नाम से जाना जाता था।

भोपाल का ताजमहल कब बनवाया गया था?

इसका निर्माण साल 1871 ईस्वी में चालू करवाया गया था, जो 13 वर्षों बाद 1884 ईस्वी में बनकर तैयार हुआ था। शाह जहां बेगम वास्तुकला में काफी रूचि रखती थी, जिसका प्रमाण आज भी इस महल में देखा जा सकता है। महल की डिजाइन और इसमें की गई नक्काशी मंत्रमुग्ध कर देते हैं। कहा जाता है कि उस समय इसे बनवाने में कुल लागत 3 लाख रुपये आई थी।

भोपाल का ताजमहल

अंग्रेजों को नहीं पसंद था ये महल

इस महल को इस तरह से बनाया गया था कि जब भी कोई इसमें प्रवेश करें तो सिर झुकाकर करें। ऐसे में अंग्रेजों को यह महल बिल्कुल पसंद नहीं था। एक बार अंग्रेजी हुकूमत ने बेगम से दरवाजे पर लगे कांच हटवाने की बात कही थी, जिस पर बेगम ने साफ मना कर दिया था और फिर अंग्रेजों ने लगातार 100 राउंड कर दी थी, जिसके बाद भी गेट तोड़ने में वे असफल रहे।

महल में स्थित है 'सावन-भादो मंडप'

महल में स्थित 'सावन-भादो मंडप' को लेकर कहा जाता है कि ये कश्मीर के शालीमार बाग की तरह दिखाई देता है। यहां लगे कृत्रिम झरने के पास बैठकर बेगम बारिश का आनंद उठाया करती थीं।

भोपाल के ताजमहल के बारे में कुछ तथ्य...

1. भोपाल का ताजमहल 17 एकड़ में फैला है।

2. इसकी खूबसूरती के आधार पर ही इसे ताजमहल का नाम दिया गया था।

3. महल के प्रत्येक दरवाजें करीब एक टन वजनी है, जिसे कई हाथी भी मिलकर नहीं तोड़ सकते।

4. ताजमहल की भांति यहां किसी की कब्र नहीं है, बल्कि यह एक निवास स्थान (महल) है।

5. इससे बनने में 13 साल लगा था।

6. दरवाजों में रंगीन कांच का इस्तेमाल किया गया है, इसीलिए इसे शीशमहल भी कहा जाता है।

7. इन दरवाजों को पार करने के लिए आपको अपना सिर झुकाना पड़ेगा।

8. महल में एक सुरंग भी है, जो कुछ दूर जाने पर रायसेन में खुलती है।

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