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ओड़िशा का अद्भुत खजाना, मेघात बुरू-किरीबुरू

By Goldi

29 राज्यों से परिपूर्ण भारत में कई खूबसूरत जगहें, जिन्हें अगर घूमने निकला जाये तो शायद ये जिन्दगी कम पड़ जाये। भारत के कुछ राज्य पर्यटन के मामले में नम्बर वन है जैसे राजस्थान , हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, केरल,तमिलनाडू आदि, इसके विपरीत कुछ ऐसे भी राज्य है, जहां घूमने को तो काफी कुछ है, लेकिन जानकरी के आभाव के कारण हम पर्यटक उन जगहों को नजर अंदाज कर देते हैं।

इसी क्रम में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, एक ऐसी खूबसूरत जगह के बारे में, जो पर्यटकों की बाह जोट रहा है। झारखंड और ओड़िशा भारत के दो ऐसे राज्य है, जो पर्यटकों की घूमने की सूची में बहुत ही कम शामिल किये जाते हैं। लेकिन अगर आप कुछ नया घूमने की सोच रहे हैं, तो आपको एक बार ओड़िशा और झारखण्ड स्थित मेघात बुरू-किरीबुरू की सैर अवश्य करनी चाहिए।

झारखण्ड का अमूमन इलाका पहाड़ों घने जंगलों से घिरा हुआ है, इसलिए यहां एक पर्यटक के लिए काफी कुछ है। मेघात बुरू और किरिबुरु वास्तव में झारखंड और ओडिशा स्थित जुड़वां शहर हैं। यह दोनों खूबसूरत से शहर ओड़िसा और झारखंड के सीमा पर स्थित पर है।मेघाबतुरु दुनिया में सबसे बड़ी हैमाटाइट लौह अयस्क खानोंके लिए भी जाना जाता है। यह शहर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा विकसित किया गया है।

अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो यकीन मानिये एक जगह आप ही के लिए है। मानसून एक मौसम में करीबन 200 सेमी वर्षा प्राप्त करने वाले इस क्षेत्र को ओड़िशा का चेरापूंजी भी कहा जाता है। इसके पास ही घने पर्णपाती सरांडा वन स्थित है , जअहं आप घूमते हुए प्रकृति की सुन्दरता को करीब से निहार सकते हैं। भीषण गर्मियों के दौरान भी इन दोनों शहरों में सुखद मौसम रहता है, गर्मियों में भी यहां सुबह-सुबह धुंध को देखा जा सकता है। मेघात बुरू और किरिबुरु ओड़िशा और झारखण्ड के ऑफबीट डेस्टिनेशन है, जो आपको प्रकृति के करीब ले जाता है।

सरांडा वन पर जाएं

सरांडा वन पर जाएं

सरांडा वन मेघात बुरू और किरिबुरु से घिरा हुआ है, आज भी यह जंगल बेहद घना है, जहां विभिन्न प्रकार के पक्षियों और जंगली जानवरों को देखा जा सकता है। अगर आप इस जंगल की सैर करना चाहते हैं, तो अपने साथ गाइड को लेकर जायें, क्यों कि यह बेहद घना जंगल है, अगर आप अकेले जाते हैं ग़ुम होने का खतरा है।

जंगल में पुंडुल फॉल्स और स्वपनेश्वरी मंदिर देख सकते हैं। मंदिर भेल ही खंडहर हो, लेकिन मंदिर में देवी दुर्गा और शिव की मूर्ति देखी जा सकती है। घूमते हुए आप जंगल में हाथी, भालू, हिरन ,सूयर आदि देख सकते हैं। याद रखें, अगर आप सरांडा जंगल के मुख्य क्षेत्र में जाना चाहते हैं तो आपको डीएफओ से अनुमति लेनी होगी।

एक साथ देखें 700 पहाड़ों को

एक साथ देखें 700 पहाड़ों को

मेघाबतुरु शहर के कोने में गेस्टहाउस में एक अद्भुत दृष्टिकोण है। ऐसा कहा जाता है कि वहां से आप 700 पहाड़ देख सकते हैं। हालांकि ये कोई नहीं जानता कि, ये पहाड़ वाकई में 700 हैं या नहीं, लेकिन नजारा बेहद मनोरम होता है।

खूबसूरत सनसेट देखें

खूबसूरत सनसेट देखें

आप मेघाबतुरु से खूबसूरत सनसेट के नजारे भी देख सकते हैं, यकीन मानिए डूबते हुए सूरज के खूबसूरत नजारा आपकी थकन को चुटकियों में दूर कर सकता है।

एक सैर किरिबुरु और मेघताबुरु लौह अयस्क खान की

एक सैर किरिबुरु और मेघताबुरु लौह अयस्क खान की

अगर आप के पास वक्त है तो आप किरिबुरु आयरन अयस्क खान और मेघताबुरु लौह अयस्क खानों पर जा सकते हैं। लेकिन इन स्थानों पर जाने के लिए सेल प्राधिकरण से पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है।

खांडहर झरने पर जाएं

खांडहर झरने पर जाएं

800 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरने वाला खांडहर झरना किरिबुरु से करीब 150 किमी दूरी पर स्थित है। यह स्थान पिकनिक स्पॉट के रूप में जाना जाता है।

लोकल मार्केट घूमें

लोकल मार्केट घूमें

इन दोनों कस्बों में प्रत्येक मंगलवार को बाजार लगाया जाता है। बाजार का मुख्य आकर्षण जनजातीय लोगों द्वारा लाया और बेचा जाने वाला व्यापार है। यदि आप मंगलवार को वहां हैं, तो स्थानीय बाजार में जाना न भूलें। यह जनजातीय लोगों के जीवन में एक महान अनुभव और उपयोगी अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।

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