मदुरै को मुख्य रूप से तमिलनाडु की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है। मदुरै के बारे में जब भी बात होती है, तब सबसे अधिक मीनाक्षी अम्मन मंदिर के बारे में ही चर्चा की जाती है। लेकिन एक पैलेस जिसे अक्सर लोग नजरंदाज कर जाते हैं वह है तिरुमलाई नायक पैलेस।
17वीं शताब्दी में निर्मित यह पैलेस द्रविड़ियन और इस्लामी वास्तुकला का शानदार मिश्रण है। 1636 में इस महल का निर्माण मदुरै के तत्कालिन नायक शासक तिरुमलाई नायक ने करवाया था। इस महल के बारे में कहा जाता है कि यह तमिलनाडु की सबसे अधिक धर्मनिरपेक्ष निर्माण है। कहा जाता है कि एक इटैलियन वास्तुकार की मदद से इस महल का निर्माण करवाया गया था।

इस महल का निर्माण दो हिस्सों में करवाया गया था, जिसमें से एक था स्वर्गविलास और दूसरा था रंकविलास। इनमें से स्वर्गविलास राजा का निवास और रंकविलास नौकरों का निवास स्थान हुआ करता था। कहा जाता है कि इन दोनों हिस्सों के अलावा महल में रानीवास, मनोरंजन के लिए एक थिएटर, शस्त्रागार, पालकी और शाही बैंडस्टैंड रखने की जगह, रिश्तेदारों के लिए कमरे, तालाब और बागिचा आदि भी हुआ करते थे।
महल चारों तरफ से दिवार से घिरा हुआ था। कहा जाता है कि जिस समय इस शाही महल का निर्माण करवाया गया था, तब यह आज के मुकाबले करीब 4 गुना अधिक बड़ा था।

बाद में इस महल को तिरुमलाई नायक के पोते चोक्कनाथ नायक ने ध्वस्त कर दिया और इस महल में लगाये गये लकड़ी के काम और कीमती पत्थरों को निकालकर उसने अपना महल बनाने में इस्तेमाल किया। साल 1866 से 1872 में अपने कार्यकाल के दौरान इस महल की मरम्मत मद्रास के गवर्नर लॉर्ड नैपियर ने करवाया था।
वर्तमान में इस महल की देखरेख की जिम्मेदारी तमिलनाडु आर्कियोलॉजिकल विभाग द्वारा की जाती है। वर्ष 1980 में इस महल में म्यूजियम तैयार किया गया जिसमें उस समय की कई तरह के हथियार समेत राजा-महाराजाओं द्वारा इस्तेमाल की गयी वस्तुओं को भी प्रदर्शित किया जाता है।

तिरुमलाई नायक पैलेस हर दिन सुबह 8 बजे से शाम को 5 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। यहां घूमने में पर्यटकों को 1 से 2 घंटा का समय लग सकता है। यह पैलेस मदुरै में मीनाक्षी अम्मन पैलेस से महज 2 किमी की दूरी पर मौजूद है। जब भी आप तमिलनाडु के इस शानदार शहर मदुरै में घूमने का प्लान बनाएं तो अपनी Itinerary में तिरुमलाई नायक पैलेस को जरूर शामिल करें।



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