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खाने पीने, घूमने फिरने के अलावा भी बहुत कुछ है कर्नाटक की फ़िज़ाओं में

By Syedbelal

खाली समय या बहुत ज्यादा काम के बाद घूमने से बेहतर कुछ नहीं है। घूमना या ट्रैवलिंग जहां एक तरफ आपको रिलैक्स करती है तो वहीं दूसरी तरफ़ घूमने से आप कई नए तथ्यों सभ्यता और संस्कृतियों से भी अवगत होते हैं। बात जब घूमने की हो और ऐसे में हम दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक का ज़िक्र न करें तो एक हद तक बात अधूरी रह जाती है। आज कर्नाटक का शुमार भारत के सबसे खूबसूरत राज्य में होता है।

आज कर्नाटक, भारत का दक्षिण पश्चिम पर्यटन हब है जो दुनिया भर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। कर्नाटक राज्‍य में पर्यटन बढ़ने के कारण, वर्तमान में यहां भारी संख्‍या में रिसॉर्ट, टूरिस्‍ट प्‍लेस आदि बन गए है जिनसे पर्यटकों को यहां आकर आनंद आता है। आपको बताते चलें कि आज कर्नाटक का शुमार भारत के सबसे खूबसूरत राज्य में होता है।

आज कर्नाटक, भारत का दक्षिण पश्चिम पर्यटन हब है जो दुनिया भर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। कर्नाटक की राजधानी, बंगलौर भी देश में आईटी हब के नाम से जानी जाती है। कर्नाटक राज्‍य में पर्यटन बढ़ने के कारण, वर्तमान में यहां भारी संख्‍या में रिसॉर्ट, टूरिस्‍ट प्‍लेस आदि बन गए है जिनसे पर्यटकों को यहां आकर आनंद आता है। कर्नाटक क्या, पूरे भारत से ली गयी हैं ये होली की ख़ास तस्वीरें कर्नाटक, भौगोलिक रूप से तटीय क्षेत्र में बंटा हुआ है जैसे - कारावली पहाड़ी क्षेत्र या मालेनाडु क्षेत्र।

यह क्षेत्र, पश्चिमी घाट पर स्थित है और इसे भी बायालुसीमे में उत्‍तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। कर्नाटक राज्‍य में कुल 30 जिले है। इस राज्‍य में सैर करने के लिए कई पर्यटन स्‍थल है। तो आइये नीचे दिखाई गयी तस्वीरों के जरिये जानें कि वो कौन सी दस चीजें हैं जो इस राज्य को औरों से अलग औरों से जुड़ा बनाती हैं।

चंदन की लकड़ी और रेशम के लिए मैसूर

चंदन की लकड़ी और रेशम के लिए मैसूर

आज चंदन की लकड़ी का इस्तेमाल करके बनाए गए प्रोडक्ट्स जैसे संदल के साबुन, अगरबत्ती तेल और शो पीस के लिए मैसूर पूरी दुनिया में मशहूर है। साथ ही आपको यहां पूरे विश्व और फैशन जगत में लोकप्रिय मैसूर सिल्क की साड़ियाँ भी मिलेंगी। मैसूर सिल्क की साड़ियों की सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि ये शुद्ध रेशम और जरी के काम से बनाई जाती हैं जिन्हें यहां की स्थानीय फैक्ट्रियों में तैयार किया जाता है। यदि आप मैसूर में हों तो मैसूर पैलेस देखना भी न भूलें रात के समय इसकी सुंदरता देखते बनती है।

हम्पी

हम्पी

जब आप हम्पी का नाम सुनते हैं, तो आप तुरंत प्रसिद्ध अवशेषों के बीच विजयनगर के विशाल शहर की सुंदर वास्तुकला के बारे में सोचते हैं। विजयनगर साम्राज्य की राजधानी और शान से होयसल की परंपरागत वास्तुकला शैली को प्रदर्शित करता विजयनगर या हम्पी पत्थर की एक गाथा है। हालांकि हम्पी एक प्राचीन शहर है और इसका जिक्र रामायण में भी किया गया है और इतिहासकारों के अनुसार इसे किष्किन्धा के नाम से बुलाया जाता था, वास्तव में 13वीं से 16वीं सदी तक यह शहर विजयनगर राजाओं की राजधानी के रुप में समृद्ध हुआ। कर्नाटक के उत्तरी भाग में स्थित हम्पी बेंगलुरु से केवल 350 किलोमीटर दूर है, और सड़क मार्ग द्वारा बेंगलुरु से हम्पी तक केवल कुछ घंटों में पहुंचा जा सकता है।

एडवेंचर के लिए दांदेली

एडवेंचर के लिए दांदेली

दांदेली कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित एक छोटा सा कस्बा है। पश्चिमी घाट के घने पतझड़ जंगलों सो घिरा दांदेली दक्षिण भारत के साहसिक क्रीड़ा स्थल के रूप में जाना जाता है। दांदेली एक प्रमुख पर्यटक स्थल है ऐसा इसलिए क्योंकि यहां एक साथ आप कई रोमांचक खेलों का आनंद एक ही स्थान पर ले सकते हैं।

चन्नापटना के खिलौने

चन्नापटना के खिलौने

चन्नापटना, कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर से 60 किलोमीटर दूर एक छोटा सा शहर है। ये शहर पूरे कर्नाटक में अपने खास लकड़ी के खिलौनों के कारण एक विशेष मुकाम रखता है। स्थानीय लोगों में लकड़ी के इन खिलौनों को चन्नापटना खिलौनों के नाम से जाना जाता है। इतिहासकारों कि मानें तो चन्नापटना में इन खिलौनों कि शुरुआत टीपू सुल्तान के समय की है। ज्ञात हो कि राज्य में उत्पन्न होने वाली अलग अलग लकड़ियों से इन खूबसूरत खिलौनों का निर्माण किया जाता है।

मैंगलोरियन क्यूजीन

मैंगलोरियन क्यूजीन

खूबसूरत मैंगलोर शहर अरब सागर के नीले पानी और पश्चिमी घाट के हरे, विशाल पहाड़ों के बीच बसा हुआ है। इस शहर का नाम भगवान मंगला देवी के नाम पर पड़ा, मैंगलोर चहलकदमी से भरा बंदरगाह रहा है। ये शहर जितना खूबसूरत है यहां का खाना उतना ही जायकेदार है तो यदि आप कर्नाटक की यात्रा पर हों तो मैंगलोर अवश्य जाएं और यहां के बेमिसाल खाने का लुत्फ़ अवश्य लें। कोरी रोटी, नीर दोसा, डुकरा मास, मैंगलोर भज्जी यहां के मुख्य भोजन हैं।

हूली के प्राचीन मंदिर

हूली के प्राचीन मंदिर

कर्नाटक के बेलगाम में हूली एक छोटा सा गांव है जो अपने खूबसूरत और प्राचीन मंदिरों के कारण हमेशा से पर्यटन के शौकीनों का पसंदीदा स्थान रहा है। यहां के मंदिर 10 वीं शताब्दी के हैं जिनमें आज ज्यादातर मंदिर खंडहर में तब्दील हो गए हैं। आपको बता दें कि आज यहां मौजूद विश्व प्रसिद्द पंचलिंगेश्वर मंदिर का संरक्षण भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण करता है। यहां के मंदिर अपनी मूर्तियों और अपने अनोखे वास्तु के कारण भी दुनिया भर में जाने जाते हैं।

होगेनक्कल झरना

होगेनक्कल झरना

होगेनक्कल झरना बेंगलुरु से 135कि.मी. दूर तमिलनाडु के धरमपुरी जि़ले में कावेरी नदी पर स्थित है। अकसर 'भारत का नियाग्रा फाल्स' कहा जाने वाला होगेनक्कल झरना अपने जल के औषधीय गुणों और स्पेशल नौका सवारी के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पाई जाने वाली कार्बोनाईट चट्टानें दक्षिण एशिया और पूरी दुनिया की सबसे प्राचीन चट्टानों में से हैं।

भारत का बेस्ट डेस्टिनेशन - कूर्ग

भारत का बेस्ट डेस्टिनेशन - कूर्ग

कुर्ग या कोडागु, कर्नाटक के लोकप्रिय पर्यटन स्‍थलों में से एक है। कूर्ग, कर्नाटक के दक्षिण पश्चिम भाग में पश्चिमी घाट के पास एक पहाड़ पर स्थित जिला है जो समुद्र स्‍तर से लगभग 900 मीटर से 1715 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। कूर्ग को भारत का स्‍कॉटलैंड कहा जाता है और इसे कर्नाटक का कश्‍मीर भी कहा जाता है। यह स्‍थान यहां पाई जाने वाली हरियाली के कारण के प्रसिद्ध है, यहां की सुंदर घाटियां, रहस्‍यमयी पहाडि़यां, बड़े - बड़े कॉफी के बागान, चाय के बागान, संतरे के पेड़, बुलंद चोटियां और तेजी से बहने वाली नदियां, पर्यटकों का मन मोह लेती है।

यक्षगान - कर्नाटक की पारंपरिक कला

यक्षगान - कर्नाटक की पारंपरिक कला

यक्षगान, कर्नाटक की पारंपरिक कला है जिसे नृत्य के अलावा संवादों से भी प्रस्तुत किया जाता है। आपको बताते चलें कि यक्षगान को मुख्यतः मॉनसून के दौरान प्रस्तुत किया जाता है क्योंकि कर्नाटक राज्य की ज्यादातर संस्कृति कृषि के इर्द - गिर्द घूमती है।

रेडियो पायनियर डॉ. एम वी गोपालस्वामी

रेडियो पायनियर डॉ. एम वी गोपालस्वामी

आपने आकाशवाणी का नाम ज़रूर सुना होगा जो एक रेडियो सेवा थी। क्या आप जानते हैं इसकी शुरुआत कैसे हुई ? नहीं तो चलिए अब हम आपको बताते हैं। इसकी शुरुआत कर्नाटक के मैसूर में रहने वाले डॉ. एम वी गोपालस्वामी ने अपने घर पर करी थी। आज इस सेवा का लाभ भारत के अलावा और देशों के लोग भी उठा रहे हैं। अतः ये कहा जा सकता है कि रेडियो ने भी अपनी आँख कर्नाटक में खोली।

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