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लद्दाख का छिपा खजाना

By Namrata Shatsri

दुनियाभर में ऐसी कई जगहें हैं जो अपनी खासियत के लिए मशहूर हैं। वीडियो और तस्‍वीरों में दिखाई देने वाली जगहों के अलावा भी कई ऐसे स्‍थान हैं जिनके बारे में लोगों को कम पता होता है।

लद्दाख

लेह लद्दाख का गहना..इन्हें घूमना बिल्कुल भी ना भूले

यहां पर कई ऐसी जगहें भी हैं जो ज्‍यादा प्रसिद्ध नहीं हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं। हममे से कई लोग लद्दाख गए होंगें और वहां के लोकप्रिय स्‍थल देखे होंगें लेकिन फिर भी कुछ रास्‍ते और जगहें ऐसी होंगीं जिनके बारे में हमे पता नहीं है। आज हम आपको लद्दाख के छिपे खजाने के बारे में बता रहे हैं।

बास्‍गो

बास्‍गो

लेह से 36 किमी दूर छोटा सा गांव है बास्‍गो। कभी ये शहर आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ करता था और ये स्‍थानीय राजधानी भी था। वर्तमान में यहां ऐसा कुछ भी नहीं बचा है। यहां अब केवल क मठ और शाही महल है जोकि अब खंडहर बन चुका है।

इस मठ के तीन मंदिर हैं जोकि मैत्रेयी बौद्ध को समर्पित हैं। इस क्षेत्र के अन्‍य मठों की तरह इस मठ में भी तांबे की मूर्तियां और भित्ति चित्र हैं जोकि बौद्ध के जीवनकाल को दर्शाते हैं। यहां से कुछ दूरी पर महल भी दिखता है। हालांकि महल और मठ दोनों से ही इस शहर का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। PC:Anilrini

उप्‍शी

उप्‍शी

लेह-मनाली के हाईवे पर स्थित उप्‍शी में रात को रूक सकते हैं। चढ़ाई करने और लंबे सफर के बाद यहां आराम कर सकते हैं। इस जगह कई होटल, गेस्‍ट हाउस और कैंप साइट हैं। इस गांव में छंगठनी बकरियां खूब देखने को मिलती हैं। इनके लंबे और घने बाल होते हैं और यहां पर इन्‍हें आप रोज़ देख सकते हैं। इन बकरियों से बनी ऊन की बहुत मांग रहती है। इसके पशमीना शॉल बहुत मशहूर हैं। PC:Rahul Ajmera

पनामिक

पनामिक

डिस्किट के शहर से 55 किमी दूर पनामिक गांव है जहां कई सल्‍फर के झरने हैं। इससे कुछ किलोमीटर दूरी पर ही बेहद ठंडा सियाचिन ग्‍लेशियर स्थित है।

नुब्रा घाटी में घूमने के लिए पनामिक आखिरी गांव है और सुरक्षा कारणों से आम नागरिकों को अनुमति नहीं है। अगर समय हो तो आप यहां गर्म झरनों में डुबकी भी लगा सकते हैं। कहा जाता है कि इन झरनों के पानी में औषधीय गुण हैं और ये कई तरह के रोगों से छुटकारा दिलाता है।

PC:Elroy Serrao

रूम्‍त्‍से

रूम्‍त्‍से

रूम्‍त्‍से से ही खूबसूरत झील त्‍सो मोरिरी में प्रवेश होता है। ये झील गांव से 165 किमी दूर है। इस झील तक ट्रैकिंग के ज़़रिए पहुंचा जा सकता है। नदी के तट पर हरियाली और पहाड़ स्थित हैं। यहां पर ट्रैकिंग करने पर आपको पता चलेगा कि लद्दाख बंजर भूमि नहीं है बल्कि यहां वनस्‍पति भी है। PC: Raghavan37

छंगठंग

छंगठंग

लद्दाख और तिब्‍बत की संस्‍कृति काफी मिलती-जुलती है। दोनों ही जगह बौद्ध का प्रभाव देखने को मिलता है। 15,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित छंगठंग गर्मियों तक में बहुत ठंडा रहता है। PC: Ksuryawanshi

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