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इस बार दीपावली का त्‍योहार भगवान राम की जन्‍मभूमि अयोध्‍या में मनाएं

By: Namrata Shatsri

उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के तट पर स्थित अयोध्‍या शहर भारत के इतिहास से जुड़ा हुआ है। इस पावन धरती पर भगवान राम का जन्‍म हुआ था। ये शहर प्राचीन समय में अयोध्‍या साम्राज्‍य की राजधानी हुआ करता था। हिंदू धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ रामायण में भी इस शहर का उल्‍लेख किया गया है।

किवदंती है कि इस स्‍थान पर भगवान राम का जन्‍म हुआ था एवं ये जगह विवादों से भी जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि 1992 में राम मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस वजह से हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच जंग छिड़ी हुई है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट भी कोई शांतिपूर्ण फैसला ले पाने में असमर्थ रही है।

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विवादों के अलावा ये जगह समृद्ध संस्‍कृति और धार्मिक महत्‍व के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां पर अनेक मंदिर और मुख्‍य आकर्षण हैं जो इस प्राचीन शहर को खास बनाते हैं। 1527 में मीर बाकी ने मुगल बादशाह बाबर के आदेश पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया था लेकिन दुर्भाग्‍यपूर्ण रामनगरी में मुस्लिम धर्म की यह मस्जिद हिंसा और आतंक का कारण बन गई।

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भगवान राम की जन्‍मभूमि होने के कारण इस पावन नगरी में भगवान राम और उनके भक्‍तों जैसे तुलसीदार और हनुमान जी को समर्पित कई मंदिर और स्‍मारक हैं।

मणि पर्वत

मणि पर्वत

रामायण के अनुसार मेघनाद से युद्ध में घायल होने के बाद लक्ष्‍मण जी के प्राणों पर खतरा मंडरा रहा था। ऐसे में हनुमान जी को लक्ष्‍मण जी के प्राणों की रक्षा के लिए भगवान राम ने संजीवनी बूटी लेने हिमालय भेजा था। हिमालय पर पहुंचर हनुमान जी संजीवनी बूटी को पहचान नहीं पाए और इसी असमंजस में वो पूरा ही पर्वत उठा लाए जिसमें बूटी थी। किवंदती है कि उस पर्वत के हिस्‍से को अयोध्‍या में रखा गया और उसे मणि पर्वत का नाम दिया गया।

इस पर्वत माला की चोटि 65 फीट ऊंची है और इसमें अनेक मंदिर स्‍थापित हैं। इस पर्वत से अयोध्‍या शहर का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है।

हनुमान गढ़ी

हनुमान गढ़ी

अयोध्‍या का सुप्रसिद्ध मंदिर है हनुमान गढ़ी जोकि एक टीले के ऊपर स्थित है और इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको 70 सीढियों की चढ़ाई करनी पड़ती है। शुरुआती समय में यह मंदिर एक गुफा स्‍वरूप में था लेकिन अब ये किले की संरचना के रूप में बनकर तैयार है। मुख्‍य मंदिर में माता अंजनि की गोद में बाल हनुमान जी बैठे हैं। हनुमान जी की इस अनोखी प्रतिमा के दर्शन करने रोज़ लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं।

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कनक भवन

कनक भवन

अयोध्‍या के सबसे विशाल और महत्‍वपूर्ण मंदिरों में से एक है भगवान राम और माता सीता को समर्पित कनक भवन। इसे सोने का घर भी कहा जाता है जिसका अर्थ है सोने से बना घर। इस मंदिर में भगवान राम और माता सीता की सोने के मुकुट धारण किए हुए बड़ी ही सुंदर मूर्तियां स्‍थापित हैं।pc:official site

नागेश्‍वर नाथ मंदिर

नागेश्‍वर नाथ मंदिर

भगवान शिव को स‍मर्पित बारह ज्‍योर्तिलिंगों में से एक है अयोध्‍या का नागेश्‍वर नाथ मंदिर। किवदंती है कि एक दिन भगवान राम के अनुज पुत्र कुश ने यहां पर स्थित सरयू नदी में स्‍नान किया था और उनका बाजूबंद गिरकर नदी में बह गया था। तब बाजूबंद को निकालने का प्रयास करते हुए कुश भी नदी में जा गिर थे। नदी में से नाग कन्‍या उन्‍हें बाहर लेकर आई। उस नाग कन्‍या को कुश से प्रेम हो गया। वह नाग कन्‍या भगवान शिव की भक्‍त थी इसलिए कुश ने उस कन्‍या के लिए यहां पर इस मंदिर का निर्माण करवाया था।

कहा जाता है कि चंद्रगुप्‍त मौर्य ने अयोध्‍या नगरी को पुन: विकसित करवाया था। उस समय पूरा शहर खंडहर बन गया था और केवल यही मंदिर शेष रह गया था।pc:official site

रामकोट

रामकोट

इस पवित्र नगरी का मुख्‍य तीर्थस्‍थल है रामकोट। ये तीर्थधाम शहर के पश्चिमी ओर स्थित है। इस स्‍थान पर राम नवमी के अवसर पर भारी भीड़ी रहती है। राम नवमी के दिन भगवान राम का जन्‍म माना जाता है और दीपावली के अवसर पर भगवान राम चौहद साल का वनवास काटकर वापस अयोध्‍या नगरी लौटे थे।

कैसे पुहंचे

कैसे पुहंचे

वायु मार्ग द्वारा : अयोध्‍या से 150 किमी दूर स्थित लखनऊ एयरपोर्ट निकटतम हवाई अड्डा है। ये एयरपोर्ट देश के मुख्‍य हवाई अड्डों जैसे दिल्‍ली, बेंगलुरू, कोलकाता और मुंबई आदि से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग द्वारा : अयोध्‍या में रेलवे स्‍टेशन है जोकि उत्तर प्रदेश के मुख्‍य शहरों और नगरों से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग द्वारा-इस जगह पहुंचने का सबसे बेहतर रास्‍ता है सड़क मार्ग। दिल्‍ली, इलाहाबाद, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों से अयोध्‍या नगरी अच्‍छा तरह से जुड़ी हुई है।pc:Ramnath Bhat

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