
कर्नाटक के चिकमगलूर में स्थित है पर्वतीय शहर श्रृंगेरी। इस स्थान पर आदि शंकराचार्य ने आठवीं शताब्दी में प्रथम मठ की स्थापना की थी। इस मठ को श्रृंगेरी शरद पीठ के नाम से जाना जाता है एवं यह तुंगा नदी के तट पर स्थित है।
गेरी नाम ऋष्याश्रृंगा गिरि से लिया गया है। मान्यता है कि इस पर्वत पर मुनि विबांदका और उनके पुत्र ऋष्याश्रृंगा वास करते थे। रामायण में बाल कांड में ऋष्याश्रृंगा का जिक्र किया गया है। रोमापद के राज्य में ऋष्याश्रृंगा ने सूखा से निजात दिलाई थी।

कैसे पहुंचे
वायु मार्ग : यहां से 66 किमी दूर मैंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट निकटतम हवाई अड्डा है। देश के सभी प्रमुख शहरों से इस हवाई अड्डे पर फ्लाइट्स आती रहती हैं।
रेल मार्ग : श्रृंगेरी का निकटतम रेलवे स्टेशन है मैंगलोर जंक्शन। राज्य के आसपास के शहरों से ये रेलवे स्टेशन अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग : श्रृंगेरी पहुंचने का सबसे सही रास्ता है सड़क मार्ग। इस शहर की सड़कें काफी दुरुस्त हैं और श्रृंगेरी के लिए प्रमुख शहरों से नियमित बसें चलती हैं।
शुरुआती बिंदु : बैंगलोर
गंतव्य : श्रृंगेरी
आने का सही समय : सालभरPC:Sharada Prasad CS

ड्राइविंग रूट
बैंगलोर से श्रृंगेरी की दूरी 442 किमी है। यहां के लिए तीन रूट इस प्रकार हैं -:
पहला रूट : बेंगलुरु - नेलामंगला - कुनीगल - हसन - बेलूर - चिकमगलुर - एनआर 75 के माध्यम से श्रृंगेरी
दूसरा रूट : बेंगलुरु - नेलामंगला - तुमाकूरु - हिरयूर - तारिकेरे - कोप्पा - एनएच 48 और एसएच 24 के माध्यम से श्रृंगेरी
पहले रूट से ट्रैवल करने पर एनएच 75 से श्रृंगेरी पहुंचने में 6 घंटे का समय लगेगा। इस रूट पर हसन, बेलूर और चिकमगलूर जैसे शहर भी देख सकते हैं।
सड़क व्यवस्था दुरुस्त होने के कारण 327 किमी लंबा ये सफर आसानी से कट जाएगा।
अगर आप दूसरे रूट से जाते हैं तो आपको एनएच 48 और एसएच 24 से बैंगलोर से श्रृंगेरी तक 378 किमी की दूरी में 7.5 घंटे का समय लगेगा।
वीकेंड के लिए इस ट्रिप को प्लान किया जा सकता है। शनिवार की सुबह निकलकर दोपहर या शाम तक आप यहां पहुंच जाएंगें और उसके बाद रविवार की सुबह वापस बैंगलोर के लिए निकल जाएं।

नेलामंगला और बेलूर
बैंगलोर 26 किमी की दूरी पर स्थित नेलामंगला शहर बेहद खूबसूरत है। बिन्नामंगला को विश्व शांति आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। ये काफी सुंदर पार्क है जिसके साथ पांछुरंगा और विश्वरूप विजय विटला की मूर्तियां हैं। यहां के लक्ष्मी वेंकेटरमन स्वामी मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर में देवी की पूजा गरुड़ के साथ पूजा होती है। इस मंदिर में स्तंभों के बीच तीन मूर्तियां स्थापित हैं जोकि चोला शैली में निर्मित हैं।
इसके अलावा यहां बिन्नामंगला, विश्व शांति आश्रम जैसे शांतिमय पार्क भी हैं जहां पांडुरंगा और विश्वरूप विजय विट्टल की विशाल मूर्तियां स्थापित हैं। यहां गीता मंदिर, अष्टलक्ष्मी मंदिर और विनायक मंदिर भी हैं।
ऐतिहासिक रूपसे महत्वपूर्ण शहर है बेलूर जहां चेन्नाकेशवा मंदिर स्थापित है। ये मंदिर होयसला राजवंश के कलाकारों की उत्कृष्टता को दर्शाता है।
इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर को बनाने में 103 सालों का समय लगा था। इस मंदिर को राजा विष्णुवर्द्धना ने तालाकाडु में चोला राजवंश पर अपनी जीत के उपलक्ष्य में बनवाया था।
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गंतव्य : श्रृंगेरी
मंदिरों के शहर श्रृंगेरी में अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं जिनमें से देवी सरस्वती का शारदंबा मंदिर सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।
शारदंबा मंदिर के अलावा इस शहर में भगवान यिाव का विद्या शंकर मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है।
शारदंबा मंदिर को आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर में देवी की मूर्ति चंदन की लकड़ी से बनी है और इसे आदि शंकराचार्य द्वारा ही यहां स्थापित किया गया था लेकिन बाद में इसे 14वीं शताब्दी में स्वर्ण की मूर्ति से बदल दिया गया।
इस मंदिर में स्फटिक का लिंगम भी स्थापित है जिसके बारे में मान्यता है कि इसे भगवान शिव ने स्वयं आदि शंकराचार्य को भेंट में दिया था। हर रोज़ शाम को 8.30 बजे चंद्रमौलेश्वर पूजा के दौरान इस लिंगम को देख सकते हैं।PC:Some guy 2086

विद्याशंकर मंदिर
विद्याशंकर मंदिर को विद्यारन्या द्वारा बनवाया गया था। विद्यारन्या हरिहर और बुक्का के संरक्षक संत थे और विजयनगर राजवंश के संस्थापक भी थे।
भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर को विद्याशंकर के सम्मान में बनवाया गया था। इस मंदिर को बड़ी अनोखी शैली में बनाया गया है एवं यह मंदिर उस समय के कलाकारों की खगोलीय विशेषज्ञता को दर्शाता है।
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सिरिमने झरना
यहां से 12 किमी दूर है सिरिमने झरना। ये झरना पश्चिमी घाट के प्रमुख झरनों में से एक है। किग्गा नामक छोटे से गांव में स्थित इस झरने तक निजी वाहन द्वारा पहुंचा जा सकता है।

श्रृंगेरी शारदा पीठम
आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित किए गए चार प्रमुख मठों में से एक है श्रृंगेरी शारदा पीठम। शंकरा द्वारा स्थापित अन्य मठ पुरी, द्वारका और बद्रीनाथ में स्थित हैं।
स्मर्थ संस्कृति का केंद्र माना जाता है शारदा पीठम। इस मठ के प्रमुख को जगद्गुरु कहा जाता है और इसे शंकराचार्य की उपाधि भी दी गई है। फिलहाल यहां के प्रमुख पुजारी शंकराचार्य श्री भारती तीर्थ हैंPC:Hvadga



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