
बेल्लारी दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है, जो खासकर अपने अतीत के लिए जाना जाता है। वर्तमान में यह कर्नाटक का एक बड़ा जिला है, जो कभी विजयनगर साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था। कर्नाटक से पहले बेल्लारी मद्रास प्रेसीडेंसी और आंध्र प्रदेश के अंतर्गत था। भारत की आजादी के बाद 1956 में यह कर्नाटक को सौंपा गया। यह जिला कई समय तक अंग्रेजों के प्रभाव में रहा, जिसका प्रमाण उस दौरान बनाई गईं ब्रिटिश संरचनाएं हैं, जिन्हें आप बेल्लारी भ्रमण के दौरान देख सकते हैं।
वर्तमान में यह जिला माइनिंग इंडस्ट्री के लिए काफी ज्यादा लोकप्रिय हुआ है। इस लेख के माध्यम से जानिए पर्यटन के लिहाज से कर्नाटक का बेल्लारी आपको किस प्रकार आनंदित कर सकता है, जानिए यहां के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों के बारे में।

बेल्लारी फोर्ट
PC- Marc Roberts
बेल्लारी भ्रमण की शुरुआत आप यहां के मुख्य ऐतिहासिक आकर्षण बेल्लारी किले से कर सकते हैं। यह दक्षिण भारत के प्रसिद्ध प्राचीन किलों में से एक है, जो बेल्लारी गुड्डा नाम की पहाड़ी पर बना हुआ है। यह किला दो भागों में बनाया गया था, एक 'अपर फोर्ट' और दूसरा 'लोअर फोर्ट'। अपर फोर्ट का निर्माण हनुमप्पा नायक (विजयनगर साम्राज्य के एक जागीरदार) द्वारा बनाया गया था, लेकिन लोअर फोर्ट का निर्माण हैदर अली द्वारा किया गया था।
लोअर फोर्ट का निर्माण करने वाला एक फ्रेंच इंजीनियर था। उस फ्रेंच इंजीनियर ने अपर फोर्ट के नवीनीकरण का काम भी किया था। माना जाता है कि लोअर इंजीनियर से कम ऊंचाई पर बन गया था, जिससे हैदर अली काफी गुस्सा हुआ और उसने उस फ्रेंच इंजीनियर को फांसी की सजा सुना दी। इतिहास की बेहतर समझ के लिए आप यहां आ सकते हैं।

अंग्रेजों द्वारा बनाई गई संरचनाएं
PC- Philippe Cendron
औपनिवेशिक शासन के दौरान अंग्रेजों ने कई संरचनाओं का निर्माण किया था, जिसका कुछ प्रमाण आप बेल्लारी में भी देख सकते हैं। बेल्लारी भी काफी समय तक अंग्रेजों के प्रभाव क्षेत्र में रहा । बेल्लारी सेंट्रल जेल, सेंट फिलोमेना स्कूल कॉम्प्लेक्स, वार्डलॉ हाई स्कूल कॉम्प्लेक्स, सेंट जॉन्स स्कूल, सेंट जोसेफ स्कूल आदि उस दौरान बनाई गईं ब्रिटिश औपनिवेशिक संरचनाओं के उदाहरण हैं। हालांकि स्कूल की कक्षाएं नई बिल्डिंग में ली जाती है, और पुरानी इमारतों को विरासत भवन के तौर पर रख दिया है।

बेल्लारी की पहाड़ियां
PC- Ravibhalli
बेल्लारी शहर मुख्य रूप से चट्टानी ग्रेनाइट से बनी दो पहाड़ियों (कुम्बर गुड्डा और बेल्लारी गुड्डा) में फैला हुआ है। कन्नड भाषा में पहाड़ी को गुड्डा कहते हैं। इन दो पहाड़ियों के माध्यम से आप दूर तक के नजारों का आनंद उठा सकते हैं। बेल्लारी गुड्डा से अलग कुम्बर गुड्डा को फेस हिल भी कहा जाता है, क्योंकि इस पहाड़ी का दक्षिणपूर्व हिस्सा किसी इंसान के चेहरे जैसा प्रतित होता है। यह पहाड़ी अपने प्राकृतिक रूप से बने नक्काशीदार किनारों के लिए प्रसिद्ध है।

बेल्लारी ग्रेवयार्ड (टर्की के शहीद जवानों का)
आप बेल्लारी में स्थित तुर्की सैनिकों के लिए एक स्मारक के रूप में बनाए गए ग्रेवयार्ड को भी देख सकते हैं। यह कब्रिस्तान हवाई पट्टी के नजदीक स्थित है जहां तुर्की सैनिकों को दफनाया गया था। इन सैनिकों को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों द्वारा 1918 में भारत लाया गया था। यहां एक समाधि-लेख मौजूद है, जिससर दफनाए गए सैनिकों के बारे में बहुत कुछ लिखा हुआ है। इसी स्थान पर तुर्की शाही परिवार के सदस्य अब्दुल साला आगा बाशा की भी कब्र है, जिनकी मृत्यु 1918 अलीपुर जेल में हो गई थी।

बेल्लारी चिड़ियाघर
उपरोक्त स्थानों के अलावा आप बेल्लारी के चिड़ियाघर की रोमांचक सैर का आनंद ले सकते हैं। इस चिड़ियाघर को 1981 में बनाया था, जिसमें बच्चों के खेलने के लिए चिल्ड्रन पार्क भी मौजूद है। लगभग 2.4 हेक्टेयर में फैले इस ज़ू में आप विभिन्न जीव जन्तुओं को भी देख सकते हैं, जिनमें मगरमच्छ, काला हिरण, चीतल, गीदड़, अजगर, कोबरा, पैंथर, भालू और जंगली सूअर आदि शामिल हैं। यहां रोजाना पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है।



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