Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »कर्नाटक : बागलकोट की सैर के दौरान इन स्थानों का भ्रमण जरूर करें

कर्नाटक : बागलकोट की सैर के दौरान इन स्थानों का भ्रमण जरूर करें

By Nripendra Balmiki

कर्नाटक स्थित बागलकोट एक प्राचीन शहर है, जो अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह शहर बैंगलोर से 523 कि.मी की दूरी पर स्थित है। यहां से प्राप्त शिलालेखों के अनुसार इस शहर का प्राचीन नाम बगाडिगे (bagadige) हुआ करता था। पौराणिक किवंदती के अनुसार यह शहर रावण के द्वारा भजनत्री (गायन मंडली) को दिया गया था। बागलकोट का इतिहास बताता है कि यहां कई शक्तिशाली दक्षिण शासकों का शासन रहा है, जिनमें विजयनगर साम्राज्य, पेशवा, मैसूर रियासत, मराठा और ब्रिटिश प्रमुख थे।

यह शहर 1818 के दौरान अंग्रेजों के अधीन आया था। इसके अलावा यह शहर आजादी के आंदोलन के दौरान एक प्रमुख केंद्र भी था। बागलकोट का भ्रमण कई उद्देश्यों के लिए खास है, यहां आप उन ऐतिहासिक संरचनाओं को देख सकते हैं, जो आज भी अपने अतीत के साथ खड़ी हैं। साथ ही दक्षिण के इतिहास को बेहतर तरीके से समझने के लिए आप यहां आ सकते हैं। इस लेख के माध्यम से जानिए प्रयर्टन के लिहाज से बागलकोट आपकों किस प्रकार आनंदित कर सकता है।

प्राचीन जैन मंदिर

प्राचीन जैन मंदिर

PC- Shivajidesai29

बागलकोट भ्रमण की शुरुआत आप पट्टाडकल के जैन मंदिर से कर सकते हैं, यह एक तीन मंजिला प्राचीन मंदिर जो मलप्रभा नदी के किनारे स्थित है। प्राचीन साक्ष्यों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट साम्राज्य के राजा कृष्णा द्वितीय द्वारा किया गया था। कुछ विशेष वास्तुशिल्प विशेषताओं के आधार पर इसे एक महत्वपूर्ण मंदिर के तौर पर देखा जा सकता है।

मंदिर का गर्भगृह चौकोर आकार का बना हुआ है, जो परिपत्र (गोल) पथ से धिरा हुआ है, जिसे प्रदक्षिणापथ कहा जाता है। मंदिर की दीवारों पर आप आकर्षक नक्काशी देख सकते हैं। इतिहास और कला प्रेमियों के लिए यह प्राचीन जैन मंदिर काफी ज्यादा मायने रखता है।

विरुपाक्ष मंदिर

विरुपाक्ष मंदिर

PC- Anil Kusugal

जैन मंदिर के अलावा आप यहां के प्रसिद्ध विरुपाक्ष मंदिर को देखना न भूलें। यह बागलकोट का एक लोकप्रिय मंदिर है, जिसका निर्माण 733 और 745 ईस्वी के मध्य विक्रमादित्य द्वितीय की रानी लोकमाहादेवी द्वारा किया गया था। यह मंदिर श्री लोकेश्वर-महा-शिला-प्रसाद या लोकेश्वर के नाम से जाना जाता है। मंदिर का नाम रानी के नाम से प्रभावित है। विरुपाक्ष मंदिर, कांचीपुरम में कैलाशनाथ मंदिर की प्रतिकृति (रेप्लिका) है। यह मंदिर कांचीपुरम के पल्लवों पर चालुक्य की जीत की खुशी में बनया गया था।

मंदिर को द्रविड़ वास्तुकला शैली में बनाया गया है, जिसकी आंतरिक दीवारों, स्ंतभों, छत को विशेष नक्काशी और आकृतियों के साथ सजाया गया है। इसके अलावा आप यहां कई खूबसूरत मूर्तियां भी देख सकते हैं।

बादामी गुफा

बादामी गुफा

PC- Klsateeshvarma

प्राचीन मंदिरों के अलावा आप यहां के प्राचीन गुफाओं को भी देख सकते हैं, यहां मौजूद बादामी गुफाएं न सिर्फ देश बल्कि विश्व भर के इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। दरअसल बादामी गुफाएं चार गुफा मंदिरों का खूबसूरत समुह है, जो बादामी नगर की बलुआ पत्थर की पहाड़ियों में स्थित है।

यह नगर कभी चालुक्यों का राजधानी हुआ करता था और इन मंदिरों का निर्माण चालुक्य राजाओं ने छठी से आठवीं शताब्दी के दौरान कराया था। मंदिरों के निर्माण में नगारा और द्रविड़ शैली मिश्रण साफ दिखता है। एक शानदार अनुभव के लिए आप यहां आ सकते हैं।

रावणपहाड़ी गुफा

रावणपहाड़ी गुफा

PC- Ms Sarah Welch

प्राचीन बादामी की गुफाएं के अलावा आप यहां रावणपहाड़ी गुफा भी देख सकते हैं। यह एक गुफा मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है। छठी शताब्दी क दौरान बनाया गया यह मंदिर इस जिले के प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। चारों तरफ से दीवारों से घिरे इस मंदिर का गर्भागृह बादामी गुफा मंदिर के गर्भागृह से बड़ा है।

गर्भागृह में आप शिवलिंग को देख सकते हैं, जो कई प्राचीन आकृतियों से घिरा है। इतिहास से संबंधित ज्ञान का विस्तार करने के लिए आप यहां आ सकते हैं।

पुरातत्व संग्रहालय

पुरातत्व संग्रहालय

PC- Ms Sarah Welch

उपरोक्त स्थानों के अलावा आप ऐहोल के पुरातात्विक संग्रहालय की सैर का प्लान बना सकते हैं। यह संग्रहालय यहां के दुर्गा मंदिर परिसर के पास स्थित है। यह एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह संग्रहालय 100 से ज्यादा प्राचीन मदिरों का घर है, जो छठी से आठवी शताब्दी के दौरान चालुक्य साम्राज्य द्वारा बनाए गए थे।

इस स्थल को 1987 में एक पुरातात्विक संग्रहालय बनाया गया। यह मंदिर विभिन्न काल और आस्था से संबधित मूर्तियों और आकृतियों को प्रदर्शित करने का का करता है। अगर आप अपने पर्यटन के क्षेत्र का विस्तार करना चाहते हैं तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।

यात्रा पर पाएं भारी छूट, ट्रैवल स्टोरी के साथ तुरंत पाएं जरूरी टिप्स

We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Nativeplanet sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Nativeplanet website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more