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हरियाणा के खास मंदिर: कहीं भगवान कृष्ण ने दिए थे उपदेश, तो कहीं जान बचाता पहुंचा था दुर्योधन

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भारत में अनेक शहरों का अस्तितिव बेहद पुराना है, जिनमे से कुछ तो पौराणिक काल से अपना अस्तित्व बनाये हुए हैं, इन्ही नगरों में से एक है हरियाणा। अगर आपने महाभारत पढ़ा या फिर सुना है,तो आप भली-भांति महाभारत में हुए कौरव-पांडव युद्ध से परिचित होंगे, कहा जाता है कि, युद्ध हरियाणा की पावन भूमि कुरुक्षेत्र में सम्पन हुआ था। जी हां यही वह जगह है, जहां भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिए थे।

आज भी हरियाणा की सीमा के भीतर भगवान कृष्ण और महाभारत युग की जगहों और अवशेषों को देखा जा सकता है। तो अगर आप धार्मिक इतिहास में रूचि रखते हैं, तो आपको एकबार हरियाणा की सैर अवश्य करनी चाहिए और यहां के खास धार्मिक स्थलों के बारे में जानना चाहिए। आइये इसी क्रम में जानते हैं हरियाणा के खास धार्मिक स्थलों के बारे में

श्री स्थानेश्वर मंदिर

श्री स्थानेश्वर मंदिर

Pc: OjAg
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में स्थित श्री स्थानेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर कुरुक्षेत्र के प्राचीन मंदिरों मे से एक है। इस मंदिर को क्षेत्रीय शैली की वास्‍तुकला में बनाया गया है और इसकी सज्‍जा एक गुंबद से निखरकर सामने आती है।

मंदिर के सामने एक छोटा सा कुंड है। ऐसा माना जाता है कि इसका पानी इतना पवित्र है कि इसकी कुछ बून्दो से राजा बान का कुष्ठ रोग ठीक हो गया था।

पौराणिक कथायों की माने तो, कहा जाता है कि भगवान शिव की शिवलिंग के रुप में पहले बार पूजा इसी स्थान पर हुई थी इसलिए कुरुक्षेत्र की तीर्थ यात्रा इस मंदिर की यात्रा के बिना पूरी नही मानी जाती है। यादि कुरुक्षेत्र तीर्थ धाम की यात्रा जो व्यक्ति करता है वह इस मंदिर में आकर भगवान शिव के दर्शन जरूर करता है और अपनी यात्रा का सफल बनाता है। इस पवित्र स्‍थल का दौरा सिक्‍खों के 9 वें गुरू गुरू तेग बहादुर ने किया था और गुरूद्वारा नवी पादशाही को भी इसी दौरान में बनवा दिया गया था।

ब्रह्म सरोवर

ब्रह्म सरोवर

Pc: Cordavida

ब्रह्मा सरोवर थानेसर में स्थित एक पवित्र तालाब है, जहां सौर ग्रहणों के दौरान हर साल हजारों तीर्थयात्रियों इस पवित्र कुंड में डुबकी लगाने पहुंचते हैं, क्योंकि इस दौरान अपने स्वयं के पापों से मुक्त करने के लिए शुभ माना जाता है। यह जगह महाभारत और कई अन्य प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है; कहा जाता है कि दुर्योधन भी मृत्यु से बचने के लिए इसी कुंड के पास आकर छुपा था।

नबंवर के महीने में गीता जयंती के दौरान सुंदर दिखता है और दिसम्‍बर के शुरू में यहां दीपदान का आयोजन किया जाता है जिसमें पानी में जलती हुए दीपों को बहाया जाता है। कहा जाता है कि इस कुंड में डुबकी लगाने से उतना ही पुण्‍य प्राप्‍त होता है जितना पुण्‍य अश्‍वमेघ यज्ञ को करने के बाद मिलता है।

ज्योतिसार

ज्योतिसार

Pc: Ravinder M A
ज्योतिसर एक पवित्र शहर है जो हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में स्थित है और पर्यटकों और हिंदू भक्तों के बीच यह जगह बरगद के पेड़ के लिए लोकप्रिय है, कहा जाता है, इसी पेड़ के नीचे भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवत गीता का उपदेश दिए थे।

इस जगह पर एक मूर्ति बनी हुई जिसमें भगवान श्रीकृष्‍ण, रथ पर सवार होकर सारथी के स्‍थान पर खडे है और अर्जुन को उपदेश दे रहे है, वहीं अर्जुन हाथ जोडे धरती पर विनम्रतापूर्वक खडे हुए है। इस मूर्ति को 1967 में ज्‍योतिसार में कांची कामा कोटि पीठ के शंकराचार्य द्वारा बनवाई गई है। ज्‍योतिसार में हर शाम को लाइट और सांउड का आयोजन किया जाता है।

वर्तमान में, ज्योतिसर हरियाणा का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल स्थल बन गया है और जहां हजारों हिंदू भक्तों हर साल पहुंचते हैं। यदि आप हरियाणा राज्य में अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को जानने के इच्छुक हैं, तो आपको ज्योतिसर अवश्य आना चाहिए।

मनसा देवी मंदिर

मनसा देवी मंदिर

Pc: flicker
पंचकुला जिले में स्थित माता मानसा देवी मंदिर हरियाणा का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह मनसा देवी अथवा शक्ति को समर्पित है। 100 एकड़ से अधिक भूमि में फैला हुआ यह मंदिर शिवालिक पहाडि़यों की तलहटी में स्थित है। नवरात्रों में लगने वाले मेले में देशभर से भक्त इस मंदिर में आते हैं। मंदिर की दीवारों को भित्तिचित्रों के 38 पैनलों से सजाया गया है। मेहराब और छत फूलों क चित्रों से सजी हुई हैं। हालांकि, ये बहुत कलात्मक नहीं हैं लेकिन फिर भी विभिन्न विषयों को दर्शाती हैं। मुख्य मंदिर की वास्तुकला गुंबदों और मीनारों के साथ मुग़ल वास्तुकला का प्रतिनिधित्व करती है।

अग्रोहा धाम

अग्रोहा धाम

Pc: Archit Ratan
हिसार में स्थित अग्रोहा धाम हिंदुयों का धर्मिक स्थल है, इसका निर्माण 1976 में शुरू किया और 1984 में आठ साल में पूरा हुआ। मंदिर परिसर को तीन हिस्सों में बांटा गया है। बीच वाला भाग देवी महालक्ष्मी को समर्पित है, जो मंदिर के मुख्य देवी है। शक्ति सरोवर नामक एक बड़ा तालाब मंदिर के पीछे है। तालाब को 1988 में भारत की 41 पवित्र नदियों से लाये गए पानी के साथ पवित्रा किया था। शरद पूर्णिमा के अवसर पर हर साल, अग्रोहा महा कुंभ का आयोजन होता है।

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