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गार्डन सिटी से बीचटाउन मैंगलोर तक का सफर

Written By: Goldi

समुद्रतट के पास स्थित मैंगलोर शहर गार्डन सिटी कहे जाने वाले बैंगलोर से 352 किमी की दूरी पर स्थित है। दक्षिण कन्‍नड़ जिले में मैंगलोर सबसे बड़ा शहर माना जाता है। ये भारत के सबसे अधिक शहरी गैर-महानगरीय शहरों में से एक है।

इस शहर का नाम मंगला देवी मंदिर की देवी के नाम पर पड़ा है। शुरुआती समय में मैंगलार पर कादंब और केलादी नायक का राज हुआ करता था। इसके बाद इस शहर की सत्ता पुर्तगालियों के हाथ में चली गई थी। आखिरकार, इसे 1956 में मैसूर राज्य से जोड़ दिया गया था।

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इसे 1345 में विजयनागर राजवंश के शासनकाल में पहचान मिली थी। उस दौर की अनेक संरचनाएं आप यहां देख सकते हैं। ये अरब सागर के प्रमुख बंदरगाहों में से एक है। स्‍मार्ट सिटी मिशन के अंतगर्त मैंगलोर को भी स्‍मार्ट सिटी बनाने के लिए चुना गया है।

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इसके अलावा यहां पर तुलु और कोंकणी भाषा मुख्‍य रूप से बोली जाती है। यहां के लोग हिंदी और अंग्रेजी भाषा बोलने में भी माहिर हैं।

मैंगलोर आने का सही समय

मैंगलोर आने का सही समय

नवंबर से फरवरी तक सर्दियों के मौसम में मैंगलोर घूमना सबसे बढिया रहता है। इस दौरान यहां पर तापमान 20 डिग्री सेल्‍सियस से ऊपर नहीं आता है और सर्दी के मौसम में उमस भी नहीं रहती है।

मार्च से मई के दौरान गर्मियों में यहां का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक चढ़ जाता है। मॉनसून में भी मौसम अच्‍छा रहता है लेकिन बारिश की वजह से आपकी ट्रिप खराब हो सकती है।

PC: Karunakar Rayker

कैसे पहुंचे मैंगलोर

कैसे पहुंचे मैंगलोर

वायु मार्ग द्वारा : मैंगलोर में एयरपोर्ट है। शहर के केंद्र से 15 किमी दूर और बाज्‍पे के पास स्थित है मेंगलुरू इंटरनेशनल एयरपोर्ट। ये कर्नाटक का दूसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा है। यहां पर बैंगलोर से सीधे फ्लाइट आती हैं। बैंगलोर से मैंगलोर तक 50 मिनट का समय लगता है।

रेल मार्ग द्वारा : 1907 से मैंगलोर में अपना रेलवे स्‍टेशन स्‍थापित है। यहां पर दो स्‍टेशन मैंगलोर सेंट्रल और मैंगलोर जंक्‍शन हैं। बैंगलोर से यहां के लिए लिए 4 ट्रेनें चलती हैं। ट्रेन से बैंगलोर से मैंगलोर पहुंचने में 17 घंटे का समय लगता है।

सड़क मार्ग द्वारा : मैंगलोर से बैंगलोर तक तीन रूट हैं।

पहला रूट : बैंगलोर - कुनिगल - चन्‍नारायपटना - सकलेश्‍पुर - एनएच 75 से मैंगलोर।

352 किमी लंबे इस सफर को तय करने में लगभग 6 घंटे 36 मिनट का समय लग सकता है।

दूसरा रूट : बैंगलोर - मंड्या जिला - पुट्टुर - एनएच 275 से मैंगलोर।

401 किमी लंबी इस यात्रा में आपको 8 घंटे का समय लगेगा।

तीसरा रूट : टुमकुर - हिरियुर - कादुर - एनएच 48 और एनएच 73 से मैंगलोर।

449 लंबे इस सफर में 9 घंटे 9 मिनट का समय लगता है।

पहला रूट छोटा है और इसमें समय की बचत भी होगी इसलिए आपको पहले रूट से जाना चाहिए।

बैंगलोर कुनिगल

बैंगलोर कुनिगल

बैंगलोर से कुनिगल की दूरी 70 किमी है और यहां तक पहुंचने में आपको एक से डेढ़ घंटे का समय लगेगा। कुनिगल का लोकप्रिय सिद्धहलिंगेश्‍वर मंदिर द्रविड शैली में बला है। ये मंदिर महान वीरशैव शिक्षक टोटादा सिद्धलिंग को समर्पित है। सिमशा नदी पर मार्कोनहल्‍ली बांध बना है। इस बांध को मुख्‍य रूप से सिद्धलिंगेश्‍वर मंदिर को डूबने से बचाने के लिए बनाया गया है। पिकनिक के लिए आप यहां आ सकते हैं।

PC: Akshatha Inamdar

श्रावणबेलगोला

श्रावणबेलगोला

जैन धर्म के लोगों का महत्‍वपूर्ण तीर्थस्‍थल है श्रावणबेलगोला। ये 57 फीट लंबे बाहुबली की मूर्ति के लिए मशहूर है। ये मूर्ति दुनिया की सबसे लंबी मोनोलिथिक पत्‍थर की मूर्ति है।PC:Arpa Ghosh

चन्‍नारायपटना

चन्‍नारायपटना

बैंगलोर के छोर से 70 किमी दूर चननापटना पहुंचने में आपको 2 घंटे का समय लगेगा। चन्‍नापटना लकड़ी से बने खिलौलों के लिए मशहूर है। खिलौनों के अलावा चन्‍नापटना नारियल के उत्‍पादों और कच्‍चे रेशम के लिए भी मशहूर है। ये सभी किफायती दाम पर यहां मिल जाता है। चन्‍नापटना एक छोटा सा धार्मिक स्‍थल भी है जहां आप अनेक मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं।PC: Ycsanster

सकलेश्‍पुर

सकलेश्‍पुर

आपका अगला स्‍टॉप होगा सकलेश्‍पुर जोकि यहां से 80 किमी की दूरी पर है और इसमें आपको एक से डेढ़ घंटे का समय लगेगा। ट्रैकिंग पर जाने के लिए सकलेश्‍पुर एक खूबसूरत जगह है। हरे-भरे सकलेश्‍पुर का आखिरी बिंदु कुक्‍के सुब्रमन्‍या है। सकलेश्‍पुर में आप जेनुक्‍कल गुड्डा पर हाइकिंग भी कर सकते हैं। सकलेश्‍पुर का काफी खूबसूतर झरना है मांजेहल्‍ली। भगवान शिव को समर्पित प्राचीन सकलेश्‍वर मंदिर भी बहुत लोकप्रिय है। से होयसालन शैलली में बना है।

मैंगलोर

मैंगलोर

सकलेश्‍पुर से मैंगलोर 130 किमी दूर स्थित है। इस सफर में आपको 3 घंटे का समय लगेगा। जानिए मैंगलोर पहुंचने पर आप क्‍या कर सकते हैं

PC: Subharnab Majumdar

मंगला देवी मंदिर

मंगला देवी मंदिर

मैंगलोर के बोलार में स्थित इस मंदिर के पीछे एक मान्‍यता छिपी है। कहा जाता है कि इस मंदिर को 9वीं शताब्‍दी में अलुपा राजवंश के कुंदवर्मन द्वारा बनवाया गया था। वहीं किवदंती है कि इस मंदिर को परशुराम द्वारा स्‍थापित किया गया है।

इस मंदिर को मालाबार/केरल शैली में बनाया गया है। मंदिर की संरचना लकड़ी से की गई है। ये मंदिर मंगला देवी को समर्पित है जोकि बौद्ध धर्म के वाजरायन समुदाय से संबंधित हैं।PC: Vinay bhat

पनामबुर तट

पनामबुर तट

मैंगलोर का खूबसूरत तट है पनामबुर बीच। ये भारत का सबसे सुरक्षित तट है। यहां पर हर समय तट के आसपास सुरक्षाकर्मी तैनात रहते ळैं। जेत्‍सकी, बेाटिंग, कैमल राइड और एटीवी के अलावा आप यहां पैरासेलिंग, वॉटर स्‍कूटर और सर्फिंग का मज़ा ले सकते हैं। पनामबुर बीच पर आप डॉल्फिन भी देख सकते हैं....PC:Dr. Rushikesh joshi

कादरी मंजुनाथ मंदिर

कादरी मंजुनाथ मंदिर

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिरों में से एक है। मान्‍यता है कि इस मंदिर को दसवीं और ग्‍यारहवीं शताब्‍दी में बनवाया गया था। कादरी मंजुनाथ मंदिर हिंदू और जैन धर्म से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि दसवीं शताब्‍दी तक बुद्ध यहीं थे।

PC: Ssriram mt

सैंट एलॉयसिस चैपल

सैंट एलॉयसिस चैपल

1880 में बना ये खूबसूरत गिरजाघर है। इस गिरजाघर की स्‍थापत्‍य कला रोम के कई चैपलों से मिलती है। इस गिरजाघर की दीवारों पर कई सुंदर चित्र लगे हैं जोकि आपको भारत के अन्‍य गिरजाघरों में देखने को नहीं मिलेंगें। ये गिरजाघर एलॉयसिअस गांगज़ा को समर्पित है जिन्‍होंने अपना पूरा जीवन मानव कल्‍याण में बिता दिया था।PC:Haydn Blackey

रोज़ारिओ कैथेड्रल

रोज़ारिओ कैथेड्रल

कनारा क्षेत्र में बना यह पहला रोमन कैथोलिक चर्च है। 1568 में बना यह चर्च कर्नाटक का सबसे प्राचीन गिरजाघर माना जाता है। कहा जाता है कि समुद्र में मछुआरों द्वारा वर्जिन मैरी की तस्‍वीर को पकड़ लिया गया था और बाद में उसे इस चर्च में स्‍थापित कर दिया गया। 1784 में इस गिरजाघर को टीपू सुल्‍तान द्वारा नष्‍ट कर दिया गया था। 1813 में इसे दोबारा बनवाया गया।PC: Krishna Mohan

तन्निरभावी तट

तन्निरभावी तट

अरब सागर का खूबसूरत बीच है तन्निरभावी तट। पनामबुर तट पर काफी भीड़ रहती है जबकि यहां पर शांति है। यहां पर वॉटर स्‍पोटर्स की सुविधा भी उपलब्‍ध है। इस जगह खाने के लिए भी कई रेस्‍टोरेंट हें। पिकनिक के लिए आप यहां आ सकते हैं लेकिन यहां पर सूर्यास्‍त का खूबसूरत नज़ारा देखना ना भूलें।PC: Dr.himshree

सुल्‍तान बैटरी

सुल्‍तान बैटरी

टीपू सुल्‍तान द्वारा बनाया या वॉचटॉवर है सुल्‍तान बैटरी। यहां से टीपू सुल्‍तान गुरपुर नदी को देखा करते थे। इस इमारत को देखकर ये वॉचटावर से ज्‍यादा एक खूबसूरत किला दिखाई पड़ता है। हालांकि, अब ये नष्‍ट हो चुका है। मैंगलोर के सोमश्‍वर और तन्‍नीर भावी भी अन्‍य खूबसूरत तटों में से एक हैं।PC: Premnath Kudva

प्रसिद्ध रेस्‍टोरेंट

प्रसिद्ध रेस्‍टोरेंट

मैंगलोर में खाने के लिए कई लोकप्रिय जगहें हैं। मैंगलोर के गोलिबाजे जरूर खाएं। ये सभी तरह के आटे से मिलकर बनता है और इसमें काफी कम मसाला होता है। मैंगलोर का मशहूर आईसक्रीम पार्ल है पब्‍बास। इसकी गुडबुड आइस्‍क्रीम बहुत बढिया है। अगर आप मांसाहारी हैं तो मैंगलोर में चिकन घी रोस्‍ट जरूर खाएं।PC: Saint235

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