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2025 में कब-कब लगेंगे सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण? जानिए तारीख और समय

साल 2025 बड़ा ही खास होने वाला है। खासतौर पर आने वाला नया साल उन लोगों के लिए सौगात में काफी कुछ लेकर आने वाला है, जिनकी आसमान, अंतरिक्ष और तारों की दुनिया में गहरी दिलचस्पी होती है। अगले साल कई ग्रह धरती से बिना किसी दूरबीन का इस्तेमाल किये ही नजर आएंगे। इसके साथ ही साल में ऐसे कई दिन होंगे जब आसमान से होने वाले उल्का पिंडों की बारिश के आप साक्षी बन सकते हैं।

बीत रहे इस साल में दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण हुए लेकिन खास बात यह रही कि इनमें से एक भी ग्रहण भारत से दिखाई नहीं दिये।

solar eclipse 2025

इसके विपरित आने वाले साल (2025) में होने वाले सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण भारत से दिखाई देने वाले हैं। तो अगर आपकी इन खगोलिय घटनाओं में दिलचस्पी है या आपके अथवा आपके परिवार में कोई महिला गर्भावस्था में है, तो तैयारियां पहले से करके रख लें। अगर अगले साल आपको यात्रा करना है तो इन कैलेंडर में इन तारीखों पर लाल रंग से एक मार्क जरूर लगा दें, ताकि उसके आधार पर ही आप यात्रा की अपनी योजनाएं बना सकें।

अगले साल कितने सूर्य और चंद्र ग्रहण?

अगले साल यानी 2025 में कुल 4 ग्रहण होने वाले हैं। इनमें से 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण होंगे। हालांकि सभी ग्रहण पूर्ण नहीं होंगे। अगले साल होने वाले दोनों सूर्य ग्रहण आंशिक ही होंगे। वहीं 2 चंद्र ग्रहण में से एक आंशिक और एक पूर्ण ग्रहण होगा।

1. साल का पहला ग्रहण - चंद्र ग्रहण

साल का पहला ग्रहण चंद्र ग्रहण होगा, जो 13-14 मार्च 2025 को लगेगा। भारत के अलावा यह ग्रहण कई और एशियाई देशों, ऑस्ट्रेलिया के एक बड़े हिस्से, अफ्रिका, उत्तर व दक्षिणी अमेरिका, पैसिफिक, अट्लांटिक, आर्कटिक और अंटार्कटिका में भी दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण 13-14 मार्च के अहले सुबह 9 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी। यह आंशिक चंद्र ग्रहण 6घंटा 03 मिनट तक चलने वाला है। हालांकि यह चंद्र ग्रहण आंशिक रूप से कई देशों में दिखाई देगा लेकिन भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देगा।

2. साल का पहला सूर्य ग्रहण -29 मार्च 2025

इस दिन साल का दूसरा और पहला सूर्य ग्रहण होगा। यह पूर्ण नहीं बल्कि आंशिक सूर्य ग्रहण होने वाला है, जो यूरोप, उत्तरी एशिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका के उत्तरी हिस्से में, अट्लांटिक और आर्कटिक में दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार आंशिक सूर्य ग्रहण 29 मार्च को दोपहर 2.20 बजे शुरू होगा।

भारत के अलावा जिन देशों में इस दिन का सूर्य ग्रहण दिखाई देगा उनमें शामिल हैं अल्जिरिया, ऑस्ट्रिया, बार्बाडोस, बेलारुस, बर्मुडा, ब्राजिल, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड, कनाडा, कैरिबियाई नीदरलैंड, डेनमार्क, डोमिनिका, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीनलैंड, गुआना, हंग्री, आयरलैंड, आईसलैंड, सर्बिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड, वेटिकन सिटी, अमेरिका, ब्रिटेन आदि शामिल है।

lunar eclipse 2025

3. साल का एकमात्र पूर्ण ग्रहण - चंद्र ग्रहण

साल का एकमात्र पूर्ण चंद्र ग्रहण 7-8 सितंबर 2025 को होगा। इस दिन चांद को लगने वाला ग्रहण यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रिका, उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी हिस्से, दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी हिस्से, पैसिफिक, अट्लांटिक, हिंद महासागर, आर्कटिक और अंटार्कटिक से दिखाई देंगे। रात को अगर आसमान साफ रहता है तो यह चंद्र ग्रहण हर जगह से दिखाई देगा। कुछ इलाकों से चंद्र ग्रहण स्पष्ट रूप से दिखाई देगा और कुछ जगहों पर ग्रहण के समय ही चांद उगेगा अथवा डूबेगा। इस दिन चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार 7 सितंबर की रात को 8.58 बजे शुरू होगा। चंद्रग्रहण 5 घंटा 27 मिनट तक चलेगा।

4. साल का आखिरी ग्रहण - आंशिक सूर्य ग्रहण

21 सितंबर 2025 को साल का आखिरी ग्रहण लगेगा। इस दिन लगने वाला आंशिक सूर्य ग्रहण ऑस्ट्रिया के दक्षिणी हिस्से, पैसिफिक, अट्लांटिक और अंटार्कटिका में दिखाई देगा। इस दिन के सूर्य ग्रहण की खासियत होगी कि यह शुरू एक जगह होगा और जब खत्म होगा तब सूर्य किसी और जगह पहुंच चुका होगा। भारतीय समयानुसार 21 सितंबर की रात को 10.59 बजे सूर्य ग्रहण शुरू होगा। जिन देशों में यह सूर्य ग्रहण दिखाई देगा उनमें शामिल है अमेरिकन समोआ, अंटार्कटिका, कुक आईलैंड, किरीबाती, न्यू कैलेडोनिया, टोंगा, वानुआटू आदि।


क्या आप जानते हैं- सूर्य ग्रहण कभी अकेला नहीं आता? सूर्य ग्रहण से कुछ दिन पहले चंद्र ग्रहण आता है। एक और बात जो शायद आप नहीं जानते होंगे। सूर्य ग्रहण 4 प्रकार के होते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि सूर्य का कितना हिस्सा चंद्रमा की परछाई से ढंका है, चंद्रमा की छाया का कौन सा हिस्सा पृथ्वी पर पड़ रहा है आदि।

आंशिक सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा अपनी छाया केवल आंशिक रूप से सूर्य पर डालता है और पृथ्वी पर केवल उसका उपच्छाया आता है। ठीक उसी तरह वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य को पूरी ढकने के लिए पर्याप्त नहीं होती और सूर्य के बाहरी किनारे आकाश में आग की अंगूठी की तरह दिखाई देते रहते हैं। क्या आप जानते हैं दो पूर्ण सूर्य ग्रहण कभी एक के बाद एक नहीं आते। बीच में आंशिक ग्रहण जरूर आता है।

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