उत्तराखंड के चमोली में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए रविवार की रात को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बंद कर दिये गये। अब 6 महीने बाद ही बद्रीनाथ धाम मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। इस मौके पर मंदिर में 10,000 से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे और मंदिर को लगभग 15 क्विंटल फूलों से सजाया गया। बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही इस साल के लिए चार धाम की यात्रा भी बंद हो गयी।
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दौरान उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के लिए सैंकड़ों किलो प्रसाद बनाया गया था।

बंद हुए बद्रीनाथ धाम के कपाट
रविवार (17 नवंबर) की रात को 9.07 बजे के शुभ मुहूर्त पर बद्रीनाथ धाम के कपाट को वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि विधान के साथ बंद कर दिया गया। इस दौरान कई अनुष्ठानों का आयोजन भी किया गया। 15 नवंबर से बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इस दिन वैदिक मंत्रोच्चारण (वेद ऋचाओं) को विराम दिया गया, जो शीतकालीन चरण में प्रवेश का संकेत था। इसके बाद वेद उपनिषदों को मंदिर के रावल और अन्य पुजारियों को सौंप दिया गया।
हालांकि बद्रीनाथ धाम मंदिर के बंद होने की प्रक्रिया 13 नवंबर से ही शुरू हो गयी थी, जब श्री गणेश मंदिर के कपाट बंद कर दिये गये। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की पूजा शाम को 6.45 बजे शुरू हुई थी। शाम 7.45 बजे माता लक्ष्मी को मंदिर परिसर में प्रवेश करवाया गया, जिसके बाद रात को 8.10 बजे शयन आरती की प्रक्रिया शुरू हुई। रात को 9 बजे बद्रीविशाल को घृतकंबल ओढाया गया। इसके बाद 9.07 बजे के शुभ मुहूर्त में बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद कर दिया गया। मंदिर के कपाट बंद होने के मौके पर मुख्य रावल और कई पुजारी भी उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही।

शीतकाल में कहां होगी बद्रीविशाल की पूजा?
बद्रीनाथ धाम छोटा चार धामों में से एक और भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर है। शीतकाल के दौरान जितने दिन बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद रहते हैं, उतने दिन जोशीमठ में बद्रीविशाल की पूजा होती है। बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद शीतकाल के दौरान बद्रीविशाल की डोली को जोशीमठ लाया जाता है, जहां नरसिंह मंदिर में उनकी पूजा की जाती है। जोशीमठ से बद्रीनाथ धाम की दूरी करीब 45 किमी है।
जोशीमठ से ऊपर का रास्ता बेहद दुर्गम माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य ने किया था। 19 नवंबर से श्री नृसिंह मंदिर में बद्रीविशाल की शीतकालिन पूजा शुरू होगी, जो अगले साल बद्रीनाथ धाम के फिर से खुलने तक जारी रहेगी।
बता दें, हर साल चार धाम यात्रा अप्रैल-मई के दौरान शुरू हो जाती है। बद्रीनाथ धाम के अलावा चार धाम के अन्य हिस्सों में केदारनाथ धाम, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा का भी प्रावधान है। इस साल भाई दूज के दिन चार धाम के अन्य मंदिरों के कपाट बंद कर दिये गये थे। अब बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही इस साल के लिए चार धाम की यात्रा संपन्न हो गयी। बद्रीनाथ धाम के साथ ही केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाटों को बंद कर दिया गया है।



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