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जन्माष्टमी : ससुराल में राधा रानी के रूप में विराजमान हैं महादेव और श्रीकृष्ण के रूप में देवी पार्वती

श्रीकृष्ण से संबंधित विभिन्न जगहों जैसे वृंदावन और मथुरा से लेकर गुजरात में स्थित द्वारकाधिश मंदिर के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा। यहां के मंदिरों और उनसे जुड़ी कहानियां भी जरूर सुनी होगी। लेकिन क्या आपने एक ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जो कहलाता तो राधाकृष्ण का मंदिर है, लेकिन वहां महादेव और माता पार्वती विपरित लिंग के देवताओं के रूप में विराजमान हैं? नहीं समझे!

यानी इस मंदिर में महादेव राधा रानी और माता पार्वती श्रीकृष्ण के रूप में विराजमान। है न बड़ा अनोखा मंदिर। आइए इस साल जन्माष्टमी पर हम आपको इस अनोखे मंदिर के बारे में विस्तार से बताते हैं।

kankhal radhakrishna temple

कहां है यह मंदिर?

राधाकृष्ण का यह मंदिर महादेव के ससुराल में मौजूद है। यह मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के कनखल में स्थित है, जो प्रजापति दक्ष की राजधानी कहलाता था। वहीं दक्ष, जिनकी पुत्री देवी सती से महादेव का विवाह हुआ था। मान्यता है कि हरिद्वार के पास स्थित कनखल के इस मंदिर में दर्शन और पूजा करने से विवाह से संबंधित सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस मंदिर में साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन सावन, शिवरात्रि और जन्माष्टमी जैसे ऐसे त्योहार जो महादेव और श्रीकृष्ण से जुड़े हैं तब यहां आने वाले भक्तों की भीड़ कई गुना बढ़ जाती है।

किसने करवाया था निर्माण?

इस मंदिर में महादेव राधा रानी और देवी पार्वती श्रीकृष्ण के रूप में क्यों विराजमान हैं, इस बारे में तो कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार मंदिर का निर्माण लंढौरा रियासत की महारानी ने करवाया था। कहा जाता है कि लंढौरा रियासत की महारानी धर्मकौर काफी धर्मप्रिय महिला थी, लेकिन वह अपने बेटे की वजह से बेहद परेशान रहा करती थी।

अपनी परेशानी से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने मथुरा और वृंदावन की यात्रा की और वहां उन्होंने श्रीकृष्ण का मंदिर बनवाने की इच्छा जाहिर की। कहा जाता है कि इसके बाद श्रीकृष्ण ने सपने में उन्हें आदेश दिया कि हरिद्वार के कनखल में गंगा के किनारे उनका मंदिर बनवाया जाए। इसके बाद ही महारानी धर्मकौर ने इस मंदिर का निर्माण करवाया।

दूर होती है विवाह से संबंधित सभी बाधाएं

भगवान शिव और माता पार्वती के इस अनोखे मंदिर को लेकर मान्यताएं हैं कि अगर किसी युवक अथवा युवती की शादी में किसी तरह की बाधा आ रही हो तो उसे 40 दिनों तक सच्चे मन से इस मंदिर पर आकर श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा करनी चाहिए। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इससे शादी में आ रही सभी रुकावटें दूर हो जाती है। सिर्फ विवाह ही नहीं कहा जाता है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गयी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि एक बार महादेव व देवी पार्वती विपरित लिंग के रूप में रास रचाना चाहते थे। लेकिन ऐसा उनके वास्तविक स्वरूप में संभव नहीं था। इसलिए माता पार्वती ने श्रीकृष्ण और महादेव ने राधा रानी का रूप लिया था।

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