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उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से आने वाली गाड़ियों पर लगेगा Green Cess, कितना चुकाना पड़ेगा शुल्क?

अगर आप निजी गाड़ी या किराए पर गाड़ी लेकर उत्तराखंड घूमने जाने की योजना बना रहे हैं, तो ध्यान दें। आपके लिए बेहद जरूरी खबर। अगर आप किसी ऐसी गाड़ी में उत्तराखंड की सीमा को पार कर रहे हैं, जो उत्तराखंड में रजिस्टर्ड नहीं है, तो आपको शुल्क चुकाना पड़ेगा। हम यहां टोल टैक्स का शुल्क नहीं बल्कि Green Cess (हरित उपकर) की बात कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से प्रवेश करने वाली गाड़ियों पर Green Cess लगाया जाएगा, जिसके लिए अब गाड़ियों को अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ेगा।

uttarakhand green cess

Hindustan Times की रिपोर्ट में उत्तराखंड सरकार के एक अधिकारी के हवाले से जानकारी दी गयी कि राज्य के बाहर से आने वाले वाहनों को ₹20 से ₹80 के बीच शुल्क चुकाना पड़ेगा। यह निजी और किराए दोनों तरह की गाड़ियों पर ही लागू होगा। हालांकि दो पहिया वाहन, इलेक्ट्रिक व CNG वाहन, जो वाहन उत्तराखंड में रजिस्टर्ड हैं और आपातकालिन सेवाओं से जुड़े वाहनों जैसे एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड आदि पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। बताया जाता है कि उत्तराखंड सरकार Green Cess शुल्क को दिसंबर के अंत से लागू करने की योजना बना रही है।

कैसे कटेगा Green Cess का शुल्क?

मीडिया रिपोर्ट में उत्तराखंड के संयुक्त कमिश्नर (यातायात) सनत कुमार सिंह के हवाले से बताया गया कि जो वाहन उत्तराखंड से बाहर के होंगे, उनकी पहचान ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्नाइजेशन कैमरा की मदद से कर ली जाएगी। उन वाहनों के लिए जो शुल्क लागू होगा, वह सीधे वाहन पर लगे FASTag वॉलेट से कट जाएगा। सनत कुमार सिंह ने बताया कि हम दिसंबर के अंत तक इस सिस्टम को लागू करने की योजना बना रहे हैं।

uttarakhand green cess rates

कितना होगा शुल्क (Rates)?

  • तीन पहिया वाहन - ₹20
  • चार पहिया वाहन - ₹40
  • मध्यम आकार के वाहन - ₹60
  • भारी वाहन - ₹80

संयुक्त कमिश्नर से मिली जानकारी के अनुसार एक दिन में उत्तराखंड में प्रवेश करने के आधार पर Cess का शुल्क लिया जाएगा लेकिन वाहन मालिकों को यह विकल्प भी दिया जाएगा कि अगर वे चाहे तो विस्तारित वैधता वाले पास के लिए भी अधिक शुल्क का भुगतान कर दें। अगर को वाहन चालक तीन महीनों के लिए पास बनवाना चाहता है तो उसे दैनिक शुल्क का 20 गुना शुल्क और अगर कोई वार्षिक पास बनवाना चाहता है तो उसे 60 गुना शुल्क चुकाना पड़ेगा।

गौरतलब है कि उत्तराखंड एक पहाड़ी टूरिस्ट डेस्टिनेशन है, जहां साल भर बाहरी राज्यों से आने वाली गाड़ियों की भीड़ जमा रहती है। खासतौर पर साल के कुछ महीनों के दौरान, जब उत्तराखंड के विभिन्न पर्वतीय तीर्थ स्थल जैसे केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री व अन्य खुले रहते हैं, बाहरी राज्यों से आने वाली गाड़ियों की संख्या में भी काफी इजाफा हो जाता है।

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