उत्तर भारत में जब भी एक खूबसूरत पर्यटन स्थल के बारे में बात की जाती है तो सबसे पहले उत्तराखंड का नाम आता है। देवों की भूमि उत्तराखंड में ऐसी कोई जगह नहीं है, जो पर्यटन के लिहाज से बेहतर ना हो। यहां के हर जिले में अपनी एक अलग ही बात है। ऐसा ही एक जिला है चमोली, जहां की फूलों की घाटी (वैली ऑफ फ्लावर्स) विश्व प्रसिद्ध है। यहां सालभर पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है। लेकिन बारिश के मौसम यहां की बात ही निराली है। मानसून में यहां चारों ओर हरियाली, बरसात के बूंदों से चमकते पेड़ों के पत्तों और फूलों के बागान की खूबसूरती देखने लायक बनती है। इस साल यह घाटी 1 जून 2022 से पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।
कई तरह के फूलों की प्रजातियां है यहां
ये पूरी घाटी विभिन्न प्रकार के दुर्लभ और हिमालयी फूलों से भरी हुई है। यहां करीब 300 से अधिक फूलों की प्रजातियां आपको देखने को मिल जाएगी। इनमें एनीमोन, जेरेनियम, प्राइमुलस, ब्लू पोस्पी और ब्लूबेल जैसे प्रजातियां शामिल हैं। यहां के ब्रह्म कमल की बात की जाए तो सबसे खूबसूरत में इसकी गिनती की जाती है, जो उत्तराखंड का राज्य फूल भी कहा जाता है। अगर आप भी पुष्प प्रेमी है तो यह स्थान आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट जगह है। यहां के फूल और उसकी सुगंध पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसके अलावा यहां एकोनिटम बालफोरी और सेनेसियो ग्रैसिलिफ्लोरस नाम के फूल भी मौजूद हैं, जो काफी जहरीले होते हैं। हम आपको बता दें, किसी भी फूल को छूने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी अवश्य रख लें।

बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है वैली ऑफ फ्लावर
उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में शुमार है ये फूलों की घाटी। यहां के बर्फ से ढके पहाड़, हरियाली और अद्भुत नजारें आपको इसकी ओर आकर्षित करती है। बारिश के दिनों में इसकी खूबसूरती देखने लायक होती है। यहां ट्रेकिंग करना भी एक शानदार अनुभव दिलाता है। आपके लिए यह एक बेहतरीन डेस्टिनेशन साबित हो सकता है।

रामायण और महाभारत में भी 'फूलों की घाटी' का उल्लेख
रामायण के अनुसार, लक्ष्मण जी के लिए हनुमान जी यहीं से संजीवनी बूटी लेकर गए थे। फूलों की इस घाटी को परियों का निवास स्थान भी माना जाता है। यही कारण है कि काफी लंबे समय तक यहां लोग जाने से भी कतराते थे। खास बात यह है कि यहां के फूुलों से दवाई भी बनाई जाती है।

कैसे पहुंचें 'फूलों की घाटी'
यहां का नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो यहां से करीब 310 किलोमीटर के आसपास है। वहीं, यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो यहां से करीब 300 किलोमीटर के आसपास है। इसके अलावा यहां सड़क मार्ग के जरिए भी पहुंचा जा सकता है। इन सभी साधनों से आप सिर्फ गोविंदघाट तक पहुंच सकते हैं, जहां से आपको 16 किलोमीटर का ट्रेक करके फूलों की घाटी तक पहुंचना होता है।




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