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मानसून में जाएं बनेश्वर महादेव का दर्शन करने, बाजीराव पेशवा से है गहरा संबंध

महाराष्ट्र में पुणे से लगभग 35 किमी दूर भगवान महादेव का एक मध्यकालिन मंदिर है जिसे बनेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। जंगल के शांत परिवेश में बने इस मंदिर के आसपास के क्षेत्र को एक छोटे पक्षी अभ्यारण्य के तौर पर घोषित किया गया है।

baneshwar temple

खास बात यह है कि इस मंदिर का संबंध पुणे के पेशवा बाजीराव से भी है। मंदिर की वास्तुकला मध्यकालिन वास्तु से काफी मिलती-जुलती है।

आइए आपको बनेश्वर महादेव मंदिर के बारे में विस्तार से बताते हैं :

बनेश्वर का अर्थ

Entrance of the temple

मराठी भाषा में बन का अर्थ 'वन' होता है और ईश्वर का अर्थ 'शासक' (भगवान) होता है। बनेश्वर का अर्थ जंगल का देवता होता है। महाराष्ट्र के पुणे के पास स्थित बनेश्वर मंदिर इसी बात को साबित करता है। जंगलों के बीच स्थापित भगवान बनेश्वर मंदिर के आसपास झरने, मंदिर परिसर में तालाब और विभिन्न तरह के फुल व पक्षियां देखे जा सकते हैं। यह मंदिर प्रकृति प्रेमियों को काफी आकर्षित करता है। सिर्फ प्रकृति प्रेमी ही नहीं, जो व्यक्ति पहाड़ों पर ट्रेकिंग और जंगलों का रोमांच पसंद करते हैं, उन्हें भी यह मंदिर खूब पसंद आएगा।

मंदिर का इतिहास

बनेश्वर मंदिर का निर्माण महान बाजीराव पेशवा के पुत्र बालाजी बाजीराव ने करवाया था। इस मंदिर के निर्माण वर्ष 1749 में किया गया था। मंदिर के निर्माण में कुल खर्च 11,426 रुपये, 8 आने और 6 पैसे हुए थे। मंदिर में एक एंटिक घंटी भी रखी हुई है।

ghanti of chimajee appa

कहा जाता है कि इसे चिमाजी अप्पा (श्रीमंत चिमाजी बल्लाल पेशवा) ने पुर्तगालों के खिलाफ 1739 में बस्तियान किले की लड़ाई को जीतने के बाद अपने जीत की सबूत के तौर पर प्राप्त किया था। शहर की रोजमर्रा की दौड़भाग और प्रदूषण से अगर थोड़ी देर की राहत चाहिए तो इस मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र में घूमने आ सकते हैं। मंदिर में एक दक्षिणमुखी भगवान हनुमान का मंदिर भी है।

मंदिर के आसपास का क्षेत्र

waterfall near temple

बनेश्वर मंदिर के आसपास छोटा सा पक्षी अभ्यारण्य है, जहां ढेर सारे पेड़-पौधे और जंगल जैसा वातावरण है। पक्षी अभ्यारण्य में मालाबार ग्रे हॉर्नबील और भी कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी नजर आते हैं। भगवान शिव के इस मंदिर के ठीक पीछे एक प्राकृतिक झरना है, जहां से ठंडा पानी बहता है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में एक छोटा तालाब है, जिसमें कई तरह की मछलियां और नर्म कवच वाले कछुए रहते हैं। भगवान महादेव के मंदिर के सामने के अलावा इस तालाब के किनारे भी आपको नंदी महाराज विराजमान नजर आएंगे।

कैसे और कब पहुंचे मंदिर

बनेश्वर मंदिर हर रोज सुबह 6 बजे से शाम को 8 बजे तक खुला रहता है। यह मंदिर मुंबई से 200 किमी और पुणे से लगभग 35 किमी दूर स्थित है। मंदिर से सबसे नजदीक का रेलवे स्टेशन नसरापुर जंक्शन है, जो यहां 2-3 किमी दूर है। पुणे से बनेश्वर महादेव के लिए दिन में कई बार सरकारी बसें खुलती हैं। इसके अलावा आप चाहे तो निजी गाड़ियों और टैक्सी से भी कुछ घंटों में ही बनेश्वर महादेव के मंदिर पहुंच सकते हैं।

baneshwar

बनेश्वर महादेव का मंदिर चारों तरफ से जंगलों से घिरा हुआ है। इसलिए इस मंदिर में आने का बेस्ट समय मानसून के समय होता है। जंगल की हरियाली के साथ-साथ मंदिर के निकट स्थित झरने में भी पानी की अधिक मात्रा इसकी सुन्दरता बढ़ाती है। मंदिर के ठीक सामने छोटे-छोटे होटल हैं, जहां आप अपनी गाड़ी पार्क करने के साथ ही चाय-कॉफी और नाश्ते का लुत्फ भी उठाना और पूजन सामग्री भी खरीद सकते हैं।

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