• Follow NativePlanet
Share
» »चलिए चले एलोरा गुफा की यात्रा पर!

चलिए चले एलोरा गुफा की यात्रा पर!

Posted By: Namrata Shatsri

दुनियाभर में भारत एक ऐसा देश है जहां आपको अतुल्य इमारतें देखने को मिलेंगी। इन्हीं में से एक है महाराष्ट्र की अद्भुत एलोरा की गुफाएं। इन गुफाओं को बड़ी-बड़ी चट्टानों को काट कर बनाया गया है और इसीलिए इसे यूनेस्को ने भी विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया है। इन गुफाओं की दीवारों पर सुंदर नक्काशी और चित्रों को उकेरा गया है। इन्हें 600-1000 सी.ई दशक का बताया जाता है।

इस मंदिर में झूलती है मीनारे....वैज्ञानिक भी है हैरान

एलोरा में सौ गुफाए हैं जिनमे से 34 गुफाओं को पर्यटकों के लिए खोला गया है। यह गुफाएं बौद्ध, हिंदु और जैन धर्म की कलाकृतियों और वास्तु कला का अद्भुत नमूना है। इनमें से अधिकतर गुफाओं को हिंदु शासकों के राज में बनवाया गया था जैसे कि राष्ट्रकूट और यादव वंश आदि। 16वीं गुफा में विशाल चट्टान को काट कर कैलाश मंदिर बनाया गया है। पूरी दुनिया में आपको इस मंदिर जैसी कारीगरी और शिल्पकला देखने नही मिलेगी। ये गुफाएं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकृत रखी गई हैं।

एलोरा गुफाओं के दर्शन का सही समय

एलोरा गुफाओं के दर्शन का सही समय

एलोरा गुफाएं घूमने का सबसे सही समय सर्दी के मौसम का अक्टूबर से लेकर फरवरी तक होता है। इस दौरान यहां का मौसम ठंडा और बर्फीला रहता है. मॉनसून के मौसम यानि जून से सितम्बर तक के बीच भी यहा का मौसम सुहावना रहता है। वहीं गर्मी के मौसम में सूरज की तपती किरणें और गर्मी आपके घूमने के मजे को किरकिरा कर सकती है।

मुम्बई से एलोरा गुफाओं का मार्ग-

मुम्बई से एलोरा गुफाओं का मार्ग-

रूट-1: चेद्दा नगर- एन.एच 160 - मोगारे रोड - घोटी - शिर्डी रोड - सिन्नार का एन.एच 160 - उदापुर - सोनेवाडी का मुथालाने रोड - एलोरा में एन.एच 52- एलोरा की गुफाएं (327 किमी - 6 घंटे)।

रूट - 2: चेद्दा नगर - इस्टर्न एक्स्प्रेस हाइवे - एन.एच 160 - एम.एच एस.एच 30 विजयपुर रोड - औरांगाबाद - मालेगांव रोड़ - एलोरा में एन.एच 52 - एलोरा की गुफाएं (341 किमी 6 घंटे 10 मिनट)।

रूट - 3: चेद्दा नगर - एन.एच 61 - एन.एच 60 - उदापुर - वैदूवाडी में मुथालाना रोड - औरंगाबाद - एलोरा में मैलेगांव रोड़ 0 एन.एच 52 - एलोरा की गुफाएं (364 किमी - 7 घंटे 30 मिनट)।

महुली किले पर ट्रेकिंग का मजा

महुली किले पर ट्रेकिंग का मजा

ये किला शिवाजी महाराज के नियंत्रण में था जोकि अब ट्रैकिंग प्रेमियों की पसंदीदा जगह बन चुकी है। थाणे जिले में महुली किला सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है। महुली किला मुम्बई से 70 किमी दूर है। असनगांव विलेज में ये एतिहासिक किला मौजूद है। इस किले को दो से तीन पर्वत श्रृंखलाओं के शिखर पर बनाया गया है। किले के चारों ओर एक शिव मंदिर और तीन गुफाएं बनी हुई हैं। महुली किले के आसपास के वन क्षेत्र को अभ्यारण्य घोषित किया जा चुका है।

PC:Sanmukh.putran

इगतपुरी

इगतपुरी

असनगांव से 50 किमी की दूरी पर स्थित है इगतपुरी हिल स्‍टेशन। यहां प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है साथ ही महाराष्‍ट्र के नासिक में रहने वाले लोगों के लिए इगतपुरी बेहतरीन पर्यटन स्‍थल है। इगतपुरी में अम्रुतेश्‍वर मंदिर, कैमल वैली, भाट्सा घाटी, कलसुबाई पर्वत श्रृंख्‍ला और आर्थुर झील दर्शनीय स्‍थल हैं। इन जगहों के समीप आकर आप प्रकृति को अपने बेहद करीब पाएंगें और प्राकृतिक सौंदर्य से आपका मन सराबोर हो जाएगा।PC:Gargi Gore

सिन्‍नार का गोंडेश्‍वर मंदिर

सिन्‍नार का गोंडेश्‍वर मंदिर

सिन्‍नार में शानदार काले पत्‍थरों से बना श्री गोंडेश्‍वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। ये मंदिर हेमादपंथी वास्‍तुकला से निर्मित है। मंदिर के चार किनारों पर भगवान शिव के अलावा भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान विष्‍णु और सूर्य देव की मूर्तियां भी स्‍थापित हैं। इन मूर्तियों का निर्माण 1069 शताब्‍दी में हुआ था। हेमादपंथी शैली की वास्‍तुकला में निर्मित ये मंदिर यादव वंश द्वारा बनवाया गया है। उस समय इस शैली में अनेक मंदिरों का निर्माण किया गया था। गोंडेश्‍वर मंदिर उन मंदिरों में से एक है जो आज भी बिलकुल सही आकारा में खड़े हैं।

PC:Abhishek Bauskar

शिर्डी

शिर्डी

भारत के सबसे महत्‍वपूर्ण और पवित्र तीर्थस्‍थलों में से एक है शिर्डी जोकि सिन्‍नार से 58 किमी की दूरी पर स्थित है। मान्‍यता है कि 20वीं शताब्‍दी में साईं बाबा ने यहां रहकर अपने भक्‍तों का कल्‍याण किया था। इसलिए ये तीर्थस्‍थल अनेक मंदिरों का गढ़ बन चुका है। शिर्डी में गुरुस्‍थान वह जगह है जहां पर साईं बाबा ने अपने जीवन का अधिकतर समय व्‍यतीत किया था। गुरुस्‍थान सुबह 5 बजे से लेकर शाम 10 बजे से सप्‍ताह के सभी दिन खुला रहता है। शिर्डी में समाधि मंदिर और द्वारका माई भी अन्‍य दर्शनीय स्‍थल हैं।

PC:~Beekeeper~

एलोरा की गुफाएं

एलोरा की गुफाएं

ऐतिहासिक रूप से एलोरा की गुफाएं धार्मिक स्‍थल है। इसकी कु्छ गुफाओं को मठ, कुछ मंदिर और कुछ अन्‍य धार्मिक स्‍थलों के रूप में श्रद्धालुओं के लिए विभाजित किए गए हैं। एलोरा गुफाएं बौद्ध धर्म, हिंदू और जैन धर्म को समर्पित हैं। इन गुफाओं में ये तीन धर्म के गुरुओं के मंदिर बनाए गए हैं। 1 से 12 गुफा बौद्ध, 13 से 29 गुफा हिंदू और 30 से 34 गुफा जैन धर्म को समर्पित की गई है।

विश्‍वकर्मा गुफा

विश्‍वकर्मा गुफा

बौद्ध गुफाओं की बारह गुफओं में से एक है विश्‍वकर्मा गुफा। ये दस नंबर की गुफा है जोकि अन्‍य बारह गुफाओं में से सबसे ज्‍यादा लोकप्रिय मानी जाती है। इस गुफा को कारीगारों ने इतनी मेहनत और कुशलता से बनाया और सजाया है कि उन्‍हीं के नाप पर इसे काश्‍तकार की गुफा कहा जाता है। इस गुफा में इतनी बेहतरीन नक्‍काशी की गई है कि आप इसे देखकर आश्‍चर्यचकित हो जाएंगें। ये सिर्फ प्रार्थना सभा और चैत्‍य गृह है एवं इसमें गौतम बुद्ध की 15 फीट लंबी और विशाल प्रतिमा बनी हुई है। इस गुफा में आठ सहायक कक्ष भी हैं।

कैलाश मंदिर

कैलाश मंदिर

एलोरा की सोलहवीं गुफा में कैलाश मंदिर है। इस मंदिर को मात्र एक चट्टान को काटकर बनाया गया है। दुनियाभर में एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया ये एकमात्र हिंदू मंदिर है। ये खूबसूरत कैलाश मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मान्‍यता है कि इस मंदिर को राष्‍ट्रकूट वंश के राजा कृष्‍णा 1 ने बनवाया था। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस मंदिर को बनाने के लिए चट्टान को पहले ऊपर से नीचे की ओर काटा गया था। ऐसा संभव नहीं है कि उत्‍खनन सामने से शुरु हुआ होगा। एलोरा में आप रामेश्‍वर मंदिर और दशावतारा मंदिर जैसे दो और खूबसूरत और भव्‍य मंदिर देख सकते हैं। इनकी वास्‍तुकला भी अद्भुत है।

जैन मूर्तियां

जैन मूर्तियां

जैन गुफाओं में जैन धर्म के भगवान बुद्ध की मूर्तियां स्‍थापित हैं। इन मूर्तियों की कलाकृति और नक्‍काशी यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्‍ध कर देती हैं। 32वीं गुफा को नौंवीं शताब्‍दी में खोदा गया है। यहां पर इंद्र सभा है जिसमें अखंड मूर्तिंया स्‍थापित हैं। 30 नंबर की गुफा को कैलाश मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है और इसी कारण इसे छोटा कैलाश भी कहा जाता है।

गृश्‍नेश्‍वर मंदिर

गृश्‍नेश्‍वर मंदिर

भारत के बारह ज्‍योर्तिलिंगों में आखिर में गृश्‍नेश्‍वर मंदिर का नाम आता है। भगवान शिव के अनुयायियों के लिए ये मंदिर प्रमुख तीर्थस्‍थल माना जाता है। एलोरा गुफाओं से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गृश्‍नेश्‍वर मंदिर। ये मंदिर दक्षिण वासतुकला का अद्भुत नमूना है। पूर्व में हिंदू-मुस्लिम के झगड़ों के कारण मंदिर का काफी हिस्‍सा क्षतिग्रस्‍त हो चुका है। इसलिए अब इसके पुनरुद्धार का काम चल रहा है।

औरंगाबाद

औरंगाबाद

औरंगाबाद, ऐतिहासिक शहर है जो मुगल शासक औरंगजेब की राजधानी रह चुकहै। एलोरा से ये शहर केवल 30 किमी की दूरी पर स्थि‍त है। एलोरा आने वाले पर्यटकों को औरंगाबाद जरूर देखना चाहिए। आगरा के ताजमहल की तर्ज पर यहां बीबी का मकबरा बनाया गया है। ये ताजकहल की हूबहू प्रतिकृति लगता है। पंचचक्‍की वॉटर मिल, दौलताबाद का किला, सलीम अली झील जैसे कुछ अन्‍य पर्यटन स्‍थल भी औरंगाबाद में देख सकते हैं।PC: wikimedia.org

यात्रा पर पाएं भारी छूट, ट्रैवल स्टोरी के साथ तुरंत पाएं जरूरी टिप्स

We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Nativeplanet sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Nativeplanet website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more