स्वतंत्रता दिवस वाले दिन अधिकांश ऑफिसों में छुट्टी जरूर होती है। अगर 15 अगस्त को आपके ऑफिस में भी छुट्टी है तो फिर इस दिन का इस्तेमाल बस यूं ही दोस्तों और परिवारजनों के साथ गप्पे मार कर और खाने-पीने या एंजॉयमेंट में बर्बाद न करके क्यों न अपने देश को थोड़ा करीब से जाना जाएं, उसके इतिहास को थोड़ा सा और समझ लिया जाए।
अगर 15 अगस्त को काम की वजह से आप बाहर नहीं जा सकते तो कम से कम इस वीकेंड पर हैदराबाद से हम्पी का एक ट्रिप तो प्लान किया ही जा सकता है। जब पूरा देश आजादी के 77वें साल का जश्न मना रहा होगा उस समय पड़ोसी राज्य कर्नाटक में छिपे हमारे देश के इतिहास के इतने बड़े खजाने को कैसे Miss किया जा सकता है।

तो चलिए आपको बता देते हैं कि हम्पी में ऐसी कौन-कौन सी ऐतिहासिक जगहें छिपी हुई हैं, जिनके जरिए आप अपने देश के इतिहास को थोड़ा बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
धरोहरों को संभाले हुए हैं आज भी
हम्पी 16वीं सदी का एक प्रसिद्ध शहर है। यह अपने समय का एक बेहद समृद्ध शहर था। यहीं वह शहर है जहां किसी समय राजा कृष्णदेव राय और उनके बुद्धिमान सलाहकार तेनालीराम रहा करते थे। इतिहासकारों के अनुसार हम्पी का इतिहास सम्राट अशोक के समय मिलता है। यहां कई राजवंशों का शासन रहा है लेकिन राजा कृष्णदेव राय के काल में इसने अतुलनीय ऊंचाईयां हासिल की थी।
कर्नाटक के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में स्थित यह ऐतिहासिक शहर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूचियों में शामिल है। हम्पी के मंदिरों में आज भी आसपास रहने वाले लोग पूजा करने आते हैं। और सबसे खास बात है कि इन मंदिरों में पूजा की वहीं पद्धति आज भी अपनायी जाती है, जो सैंकड़ों साल पहले थी। इस तरह से कहा जा सकता है कि वर्तमान भी अतीत के इस प्राचीन नगर की भव्यता और संस्कृति को संजोए हुए है।

बजरंग बली का जन्म स्थान
हम्पी से महज 4 किमी की दूरी पर मौजूद है आंजनेय पर्वत की चोटी। कहा जाता है कि इसी स्थान पर भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। इस मंदिर में जाने के लिए हम्पी से 4 किमी दूर एक तुंगभद्रा नदी पार करनी पड़ती है। नदी के उस पार मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां मिल जाएंगी। सुबह के समय जब सूरज की पहली किरण पड़ती है तो ऐसा लगता है कि आंजनाद्रि पर्वत क्षेत्र पिघले हुए सोने सा है। यहां सूर्योदय का नजारा बहुत ही अद्भूत होता है।
क्वीन बाथ
क्वीन बाथ संभवतः किसी पुराने महल का हिस्सा है, जिसे किसी राजा ने अपनी पत्नियों के शाही स्नान के लिए बनवाया होगा। आज यह जगह खंडहर बन चुकी है लेकिन आपका दिल जीतने में यह कहीं भी पीछे नहीं रहेगी। यह एक गुंबद के आकार की छत के साथ सामने विशाल आंगन का क्षेत्र है। इसमें छोटी खिड़कियां तो है ही साथ में बराम्दे और बीच में ईंटों से बना एक आयताकार कुंड है।
लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के नरसिम्हा अवतार के बारे में तो आपने जरूर सुना होगा। भगवान विष्णु का वहीं अवतार जिसमें सिर शेर का और धड़ इंसान का है। हम्पी के लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर में आप भगवान नरसिंह की एक विशाल मूर्ति देखने को मिलेगी जो शेषनाग पर बैठे हुए हैं। इसके साथ ही माता लक्ष्मी की मूर्ति भी यहां सुशोभित मिलेगी। हालांकि वर्तमान में यह मूर्ति खंडित अवस्था में है, लेकिन इसे देखकर ही समझ में आता है कि किसी समय यह कितना भव्य रहा होगा।

लोटस महल
हम्पी का लोटस महल उन लोकप्रिय और शानदार इमारतों में से एक है, जिनकी चमक कभी भी नहीं खोती है। हैदराबाद से हम्पी तक की यात्रा करेंगे और बिना लोटस महल घूमें यह यात्रा पूरी कैसे होगी। हम्पी के लोटस महल को चित्रगणी महल के नाम से भी जाना जाता है। यह महल कमल के आकार का है जिसकी संरचना और वास्तुकला की तारीफ पूरी दुनिया में होती है।
बड़व लिंग
यह हम्पी के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार हम्पी नामक एक गरीब आदिवासी ने अपनी किसी इच्छा के पूरा होने पर किसी विशाल पत्थर को तराशकर महादेव के इस शिवलिंग का निर्माण किया था। यह शिवलिंग लगभग 9 फीट ऊंचा है। इस संरचना के आसपास के नहर का पानी बहता रहता है। शिवलिंग पर महादेव के त्रिनेत्र भी अंकित हैं। एक अन्य लोक कथा के अनुसार किसी देहाती महिला ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी।

विरुपाक्ष और विट्ठल मंदिर
तुंगभद्रा नदी के किनारे पर स्थित विरुपाक्ष मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है। यह मंदिर द्रविड़ स्थापत्य शैली में निर्मित है। मंदिर के गोपुरम का निर्माण करीब 500 साल पहले हुए था। इस मंदिर में कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं। माना जाता है कि हम्पी ही रामायणकाल का किष्किंधा रहा होगा। वहीं हम्पी का विट्ठल मंदिर भी कई मंदिरों का समूह है। विट्ठल मंदिर के परिसर में ही आपको पत्थरों से निर्मित वह रथ दिखाई देगा जो आपके 50 रुपए के नोट पर छपा होता है। यह रथ इस शहर के गौरवशाली इतिहास का एक प्रतिक है।
गोलाकार नावें
जी हां, हम्पी में आपको गोलाकार नावें मिलेंगी, जो गोल-गोल घूमती हुई आगे बढ़ती थी। तुंगभद्रा नदी में पर्यटकों के लिए सुबह से लेकर शाम तक गोल नावों की सवारी उपलब्ध होती है। एक नाव में अधिकतम 6 से 8 लोगों को बैठाया जाता है। अगर आप अकेले किसी नाव की सवारी करना चाहते हैं, तो ऐसा भी संभव है। इन गोल-गोल नावों को स्थानीय भाषा में हरागोलु तेप्पा कहा जाता है। इन नावों का चलन विजयनगर साम्राज्य के समय में भी होता था। समय बदला, साम्राज्य बदला, शासन बदला लेकिन इन नावों ने अपना अस्तित्व नहीं खोया।
कैसे जाएं
हम्पी का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट कर्नाटक का हुबली है। जो हम्पी से करीब 166 किमी की दूरी पर मौजूद है। इसके अलावा कर्नाटक का बेलगाम एयरपोर्ट भी हम्पी से 270 किमी की दूरी पर मौजूद है। लेकिन हम्पी जाने का सबसे अच्छा तरीका ट्रेन है। हम्पी से मात्र 13 किमी की दूरी पर हॉस्पेट स्टेशन है। बैंगलोर और हैदराबाद से हम्पी के लिए हॉस्पेट के लिए नियमित ट्रेन मिलती है। हुबली से कर्नाटर राज्य रोड कॉर्पोरेशन की बसें नियमित रूप से हम्पी के लिए खुलती रहती हैं।



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