जन्माष्टमी की रात को हर घर में में भगवन श्री कृष्ण के लिए पालने सजाये जाते हैं..जन्म लेते ही नगरी-नगरी, घर-घर एक दूसरे को बधाई देते हुए लोगों को देखना इस उत्सव का सबसे खुशनुमा पल होता है। "नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की" गाते बजाते लोग उत्साह से भर जाते हैं।
पौराणिक कथा कि,माने तो इस दिन श्रीकृष्ण ने अपना अवतार श्रावण माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है।
जैसा की सभी जानते हैं, कि कान्हा का जन्म उत्तर प्रदेश मथुरा में हुआ था..जन्माष्टमी के पर्व के मौके पर भगवान कान्हा की मोहक छवि देखने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आज के दिन मथुरा-वृन्दावन पहुंचते हैं।
जन्माष्टमी के उपलक्ष में हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं उस वृंदावन से जहां से प्रभु भगवान श्री कृष्ण ने अपनी रासलीला की शुरुआत की थी। एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थस्थल होने के नाते आज वृंदावन में करीब 5000 मंदिर हैं। इनमें से कुछ मंदिर तो काफी प्राचीन हैं, वहीं कुछ समय के साथ नष्ट हो गए। हालांकि कई प्राचीन मंदिर आज भी बचे हुए हैं, जिन्हें देखकर भगवान कृष्ण से जुड़ी कई बातें मालूम पड़ती हैं...

इस्कान मंदिर
इस्कान मंदिर, वृंदावन 1975 में बने इस्कान मंदिर को श्री कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर ठीक उसी जगह पर बना है, जहां आज से 5000 साल पहले भगवान कृष्ण दूसरे बच्चों के साथ खेला करते थे।PC:Nimit Kumar Makkar

श्री कृष्ण जन्मभूमि,मथुरा
श्री कृष्ण जन्मभूमि, पूरे भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम के लिए शुमार हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर इस मंदिर की रौनक तो बस देखते ही बनती है। इस दिन कृष्ण के दीवाने उनकी एक झलक पानें के लिए दूर दूर से दर्शन करने आते हैं। पूरे मंदिर को इस पर्व पर दुल्हन की तरह सजा दिया जाता है, जिसे देख मन प्रफुल्लित हो उठता है। बारह बजते ही इस मंदिर यंहा श्री कृष्ण जन्मोत्शव की धूम तो ही बनती है।PC: Shahnoor Habib Munmun

बांके बिहारी मंदिर
वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर एक हिंदू मंदिर है, जिसे प्रचीन गायक तानसेन के गुरू स्वमी हरिदास ने बनवाया था। भगवान कृष्ण को समर्पित इस मंदिर में राजस्थानी शैली की बेहतरीन नक्काशी की गई है।
PC:आशीष भटनागर

मदन मोहन मंदिर
मदन मोहन मंदिर वृंदावन में काली घाट के पास स्थित है। यह इस क्षेत्र के पुराने मंदिरों में से एक है। आज जिस जगह पर मंदिर बना है, वहां पुराने समय में सिर्फ विशाल जंगल हुआ करते थे। भगवान मदन गोपाल की मूल प्रतिमा आज इस मंदिर में नहीं है। मुगल शासन के दौरान इसे राजस्थान स्थानांतरित कर दिया गया था।

राधा रमन मंदिर
वृंदावन स्थित राधा रमन मंदिर एक प्रसिद्ध प्रचीन हिंदू मंदिर है। इसका निर्माण 1542 में किया गया था और इसे वृंदावन का सबसे पूजनीय और पवित्र मंदिर माना जाता है। मंदिर में की गई खूबसूरत नक्काशी से आरंभिक भारतीय कला, संस्कृति और धर्म की झलक मिलती है। इसका निर्माण गोपाल भट्ट के निवेदन पर किया गया था और इसे बनाने में कई साल लग गए।

राधा रमन मंदिर
वृंदावन स्थित राधा रमन मंदिर एक प्रसिद्ध प्रचीन हिंदू मंदिर है। इसका निर्माण 1542 में किया गया था और इसे वृंदावन का सबसे पूजनीय और पवित्र मंदिर माना जाता है। मंदिर में की गई खूबसूरत नक्काशी से आरंभिक भारतीय कला, संस्कृति और धर्म की झलक मिलती है। इसका निर्माण गोपाल भट्ट के निवेदन पर किया गया था और इसे बनाने में कई साल लग गए।PC: offical site

श्री राधा रास बिहारी अष्ट सखी मंदिर
अष्ट सखी मंदिर, वृंदावन कृष्ण जन्मभूमि की जगह पर बना श्री राधा रास बिहारी अष्ट सखी मंदिर भारत का सबसे पुराना मंदिर है। यह मंदिर राधा-कृष्ण और राधा की आठ सखी को समर्पित है। राधा की ये आठ सखी राधा-कृष्ण के प्रेम में घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई थी। राधा और कृष्ण के बीच रासलीला भी यहीं हुई थी।PC: wikimedia.org

राधा गोकुलनंद मंदिर
राधा गोकुलनंद मंदिर केसी घाट और राधा रमन मंदिर के बीच स्थित है। यह एक प्रचीन पवित्र तीर्थस्थल है, जो कई देवियों को समर्पित है। मंदिर में राधा, विजया और गोविंदा के अलावा अन्य को प्रतिष्ठापित किया गया है। पुराने समय में यहां की देवियों की अलग-ललग पूजा की जाती थी।
PC: Rajibnandi

केसी घाट
केसी घाट, वृंदावन ऐसा माना जाता है कि वृंदावन में ही भागवान कृष्ण ने बचपन का अधिकांश समय बिताया था। ऐसी मान्यता है कि केसी घाट पर ही भगवान कृष्ण दुष्ट राक्षस केशी से लड़े थे और अपने मित्रों व समुदाय को उनकी दुष्टता से बचाया था। आज भी केसी घाट इस घटना को अपने हृदय में समाए हुए विराजमान है।

यमुना नदी
यमुना भारत की पवित्र नदियों में से एक है। यह उत्तराखंड के हिमालय में 6387 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है। इसके बाद यह उत्तर की दिशा में बहती है और वृंदावन व मथुरा होते हुए दिल्ली पहुंचती है।PC: Hemant Shesh

कैसे पहुंचे मथुरा ?
हवाईजहाज द्वारा
मथुरा जाने का नजदीकी एयरपोर्ट दिल्ली का इंद्रागाँधी एयरपोर्ट है..जहां से पर्यटक बस या गाड़ी से मथुरा पहुंच सकते हैं।
ट्रेन द्वारा
मथुरा का नजदीकी स्टेशन मथुरा जंक्शन है..जहां से पर्यटक टैक्सी से आसानी से मथुरा पर्वत पहुंच सकते हैं।PC:आशीष भटनागर

बस द्वार
मथुरा सड़क द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है..मथुरा की निम्लिखित शहरो से दूरी-
दिल्ली-182 किमी
आगरा-56 किमी
लखनऊ-396 किमी
जयपुर-228 किमीPC: Gaura



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