सावन का महीना बस शुरू होने ही वाला है। एक तरफ लोग घर में बैठकर चाय-पकौड़ों के साथ बारिश की फुहार का लुत्फ उठाने की तैयारियां कर रहे होते हैं तो दूसरी तरफ यह महीना शिवभक्तों के उत्सव का होता है। कोई कांवड़ लेकर तो कोई बस यूं ही भगवान शिव के मंदिरों की तरफ निकल पड़ता है।

अगर आपने इन दोनों में से कोई भी विकल्प नहीं अपनाया है तो हम आपको एक तीसरा विकल्प भी बता रहे हैं। हम आपको दिल्ली के आसपास सावन के महीने में घूमने की जगहों के बारे में बता रहे हैं।
मथुरा
सावन का महीना सिर्फ शिवभक्तों के लिए ही नहीं बल्कि कृष्ण भक्तों के लिए भी महत्वपूर्ण महीना होता है। सावन में मथुरा के द्वारकाधिश मंदिर में विशेष हिंडोला का आयोजन किया जाता है। यह समय भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने का भी होता है। इसलिए ब्रजवासी अपनी ही धुन में नाचते-गाते हुए सावन का स्वागत करते हैं।

सावन के महीने में आप मथुरा घूमने का प्लान बना सकते हैं। यहां ना सिर्फ श्रीकृष्ण भक्ति बल्कि आप शिव भक्ति में भी सराबोर हो जाएंगे। सावन और इसके बाद के समय में मथुरा के सभी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।
दिल्ली से मथुरा की दूरी 183 किमी की है जिसे तय करने में 3.30 घंटों का समय लग सकता है।
वृंदावन
श्रीकृष्ण की ब्रजभूमि यानी वृंदावन में सावन के समय से ही कृष्ण जन्माष्टमी के लिए विशेष उत्सवों का आयोजन करना शुरू हो जाता है। भगवान श्रीकृष्ण को हिंडोलों में झुलाया जाता है, रासलीलाएं, गौरांगलीलाओं का आयोजन किया जाता है। सावन में ही वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण के लिए सोने के हिंडोले डाले जाते हैं और उसमें उन्हें झुलाया जाता है।

इसके अलावा वृंदावन में हरियाली तीज भी काफी धुमधाम से मनाया जाता है। ब्रज के प्राचीन राधाबल्लभ मंदिर में हरियाली तीज से लेकर रक्षाबंधन तक चांदी के हिंडोले डाले जाते हैं। सावन में अगर आप वृंदावन की यात्रा पर जाते हैं, तो श्रीकृष्ण भक्ति से जुड़े इन उत्सवों को देखकर आप भाव-विभोर हुए बिना नहीं रह सकेंगे।
दिल्ली से वृंदावन 180.8 किमी दूर है। गाड़ी से जाने पर आपको 3 घंटा 20 मिनट का समय लग सकता है।
हरिद्वार
सावन के महीने में तो हरिद्वार गेरुआ रंग में ही रंग जाता है। देश के अलग-अलग कोने से आने वाले लोग हरिद्वार में हर की पौड़ी में पहले खुद डूबकी लगाते हैं। इसके बाद अपने कांवड़ों में गंगाजल भर कर काशी विश्वनाथ, उज्जैन में महाकाल समेत अन्य ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पर निकल पड़ते हैं।

सावन के मौसम में हरिद्वारा में गंगा अपने उफान पर भी रहती है। इसके अलावा हरिद्वार की प्राकृतिक सुन्दरता भी बारिश की बूंदों के साथ कई गुना बढ़ जाती है। बारिश के समय वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में भी आप घूमने का रोमांच अनुभव कर सकते हैं।
दिल्ली से हरिद्वार 212 किमी दूर है। सड़क मार्ग से जाने पर यहां पहुंचने में साढ़े 4 घंटे का समय लग सकता है।
ऋषिकेश
सावन के समय जब हर तरफ प्रकृति हरियाली की चादर ओढ़ लेती है उस समय ऋषिकेश की सुन्दरता अलग ही स्तर पर पहुंच जाती है। सावन में खास तौर पर त्रिवेणी घाट पर उफनाती गंगा और यमुना आरती देखने का अनुभव ही अलग होता है।

इसके साथ ही अगर आप प्राकृतिक नजारों का भी आनंद उठाना चाहते हैं तो सावन में मानसून के समय नीर गढ़ वाटरफॉल जरूर जाएं। घने हरे जंगलों के बीच से होते हुए वाटरफॉल तक ट्रेकिंग का रास्ता आपको रोमांच से भर देता है। मानसून में उफनती गंगा की सुन्दरता कहें या फिर भयावहता अनुभव करनी हो तो देव प्रयाग जरूर जाएं।
दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी 228 किमी की है। यहां तक सड़क मार्ग से पहुंचने में आपको 6 से 7 घंटे का समय लग सकता है।



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