लाखों की तादाद में समुद्र से बाहर निकलकर समुद्रतट पर इधर-उधर घूम रहे जैतून के रंग वाले कछुए...कछुओं से भर चुका समुद्रतट। कुछ समुद्र से बाहर निकलकर तट की तरफ बढ़ते हुए तो कुछ तट से रेंगकर समुद्र की गहराईयों की तरफ बढ़ते हुए।
इसके कुछ दिनों बाद ही शुरू होता लाखों की तादाद में समुद्र की ओर दौड़ लगाते नन्हें कछुओं की रेस...। अगर इस तरह के नजारों का दीदार करना चाहते हैं तो यहीं है बेस्ट समय। पैक कर लिजीए अपना बैग और सवार हो जाइए ओडिशा जाने वाली ट्रेन में।

हर साल लाखों की संख्या में ओलिव रिडले कछुए ओडिशा के समुद्रतटों का रुख करते हैं। पहले समुद्र से लाखों की संख्या में मादा कछुए बाहर आती हैं जो समुद्रतट पर रेत में अपना घोसला बनाती और वहां अंडे देती है। इसके बाद मादा कछुओं के वापस समुद्र में लौटने का सिलसिला शुरू हो जाता है। अंडे देने के 45-60 दिनों बाद अंडों से ओलिव रिडले कछुए के बच्चे बाहर निकलते हैं जो अपनी जान बचाने के लिए समुद्र की ओर रेस लगाते हैं।
इनमें से काफी कछुए इस रेस को जीत भी लेते हैं और एक नये जीवनचक्र की शुरुआत करने समुद्र में पहुंच जाते हैं लेकिन कुछ कछुए इस रेस के दौरान ही मांसाहारी पक्षियों और समुद्री जीवों की भेंट भी चढ़ जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है समुद्र में पहुंचने वाले 100 ओलिव रिडले कछुओं में से सिर्फ 1 ही वयस्क होने तक जीवित रह पाता है।
ओलिव रिडले कछुओं को देखने का बेस्ट समय

यूं तो ओलिव रिडले कछुओं का समुद्रतट पर आने का सिलसिला नवंबर के अंत से शुरू हो जाता है लेकिन फरवरी के अंत से लेकर अप्रैल के अंत तक सबसे अधिक संख्या में ये दुर्लभ ओलिव रिडले कछुए अंडे देने के लिए समुद्र से बाहर आते हैं। ओडिशा के गंजम जिले के गहिरमाथा समुद्रतट पर ओलिव रिडले कछुए लाखों की तादाद में पहुंचते हैं। साल 2022 में 25 से 29 मार्च के बीच समुद्री ओलिव रिडले कछुए सबसे अधिक संख्या में गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य में पहुंचे थे।
इस दौरान 5 लाख समुद्री कछुए आए थे। वहीं साल 2021 में 9 से 23 मार्च के बीच सर्वाधिक ओलिव रिडले कछुए सामूहिक रूप से समुद्र से बाहर आए थे। पिछले साल 12 मार्च को सिर्फ 72 घंटों के अंदर ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में गहिरमाथा समुद्रतट पर 2,14,058 कछुओं ने अंडे दिये थे और लगभग 90 हजार कछुए अंडे देने के लिए समुद्रतट पर पहुंच चुके थे।
ओडिशा सरकार ने उठाएं हैं कई महत्वपूर्ण कदम

दुर्लभ ओलिव रिडले कछुए नवंबर से मई के बीच में प्रजनन, घोसला बनाना और अंडे देने के साथ ही इसी समयकाल में अंडों से बच्चे बाहर निकलते हैं। इसलिए पिछले साल नवंबर में अगले 7 महीनों के लिए ओडिशा की सरकार ने केंद्रपाड़ा और समुद्री इलाकों में 20 किमी के दायरे में मछली पकड़ने पर निषेधाज्ञा जारी कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार धमरा, देवी और रुसिकुल्या नदियों के मुहाने पर सर्वाधिक ओलिव रिडले कछुए अंडे मिलन करते और अंडे देते हैं। इसलिए 1 नवंबर से 31 मई तक हर साल इन इलाकों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इस वजह से लगभग 10,600 मछुआरों की आजीविका पर बुरा असर पड़ता है जिसकी भरपाई के लिए हर मछुआरे परिवार को 15,500 रुपए राज्य सरकार की तरफ से दिया जाता है।
ओलिव रिडले कछुए से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियां

- ओलिव रिडले कछुए प्रशांत, हिंद और अटलांटिक महासागर में पायी जाने वाली कछुए की एक दुर्लभ प्रजाति है।
- अमूमन इनकी लंबाई 24-28 इंच और वजन 35-45 किलो तक होती है।
- यह दुनिया का दूसरा सबसे छोटा समुद्री कछुआ होता है।
- इन कछुओं का ऊपरी कवच ओलिव ग्रीन (जैतून जैसा हरा) रंग का होता है, जिससे इन्हें अपना नाम मिला।
- भोजन की तलाश में ओलिव रिडले कछुए समुद्र के अंदर 500 फीट तक की गहराई में गोता लगाते हैं।
- एक मादा ओलिव रिडले कछुआ हर साल एक सीजन में लगभग 100 अंडे देती है। वह 3 बार घोसला बनाती है।
- एक मादा ओलिव रिडले कछुआ का बच्चा 13 साल की उम्र के बाद ही अंडे दे सकती है।
- अगर मादा कछुआ का अंडा गर्म वातावरण में रहा तो उससे फीमेल कछुआ और अगर ठंडे वातावरण में रहा तो उससे मेल कछुआ पैदा होता है।
- ओलिव रिडले कछुआ आमतौर पर लॉबस्टर, शैवाल, केंकड़े, मोलस्क आदि समुद्री जीवों का शिकार करते हैं।



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