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मॉनसून के बाद बनाएं राजस्थान के इस खास अभयारण्य का प्लान

पर्यटन के मामले में राजस्थान भारत का एक समृद्ध राज्य माना जाता है, जो साल भर देश-दुनिया के लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। अपनी ऐतिहासिक धरोहरों, प्राचीन संरचनाओं के लिए मुख्यत: प्रसिद्ध यह स्थल विश्व स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करता है। इस राज्य को महान राजाओं और योद्धाओं की भूमि कहा जाता है। राजस्थान न सिर्फ अपने गौरवशाली अतीत बल्कि अपने वन्य जीवन के लिए भी काफी प्रसिद्ध है।

इतिहास प्रेमियों के साथ-साथ यहां प्रकृति प्रेमियों के लिए भी बहुत कुछ मौजूद है। यदि आप मॉनसून के बाद किसी वन्यजीव अभयारण्य की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो राजस्थान आपके लिए एक आदर्श विकल्प हो सकता है। इस लेख के माध्यम से हमारे साथ साथ जानिए राजस्थान के प्रसिद्ध अभयारण्यों में से एक सीता माता वन्यजीव अभयारण्य के बारे में। जानिए यह आपको किसी प्रकार आनंदित कर सकता है।

सीता माता वन्यजीव अभयारण्य

सीता माता वन्यजीव अभयारण्य

सीता माता वन्यजीव अभयारण्य, राजस्थान के चुनिंदा प्रसिद्ध अभयारण्यों में गिना जाता है, जहां दूर-दूर से पर्यटक रोमांचक सैर का आनंद उठाने के लिए आते हैं। लगभग 422.95 वर्ग कि.मी के क्षेत्र में फैला यह वन्यजीव अभयारण्य राज्य के प्रतापगढ़ के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में स्थित है। इस सेंचुरी को निर्माण वन्यजीवों की खास सुरक्षा और उन्हें अनुकूल वातावरण देने के लिए किया गया था।

सीता माता वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को राज्य सरकार द्वारा 1979 में एक आरक्षित वन घोषित किया गया है। प्रतापगढ़ मुख्य शहर से यहां तक की दूरी मात्र 45 की है। आगे जानिए इस अभयारण्य से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

क्यों है आपके लिए खास ?

क्यों है आपके लिए खास ?

PC-Hemant Shesh

पर्यटन के लिहाज से यह वन्यजीव अभयारण्य बहुत ही ज्यादा मायने रखता है, यहां न आप वन्यजीवन को करीब से देख पाएंगे बल्कि आपको यहां प्राकृतिक खूबसूरती का जी भरकर आनंद उठाने का मौका भी मिलेगा। यह क्षेत्र शुष्क पर्णपाती जंगलों से भरा हुआ, जहां आपक कुछ खूबसूरत जल स्रोतों को भी देख सकते हैं।

इस उद्यान में आप करमोई, जाखम और सीतामाता नदियों को देख सकते हैं। बता दें कि अभयारण्य नाम सीता माता के नाम पर पड़ा है। माना जाता है कि यह जंगल है जहां कभी महर्षि वाल्मीकि का आश्रम हुआ करता था।

जलवायु और आने का सही समय

जलवायु और आने का सही समय

PC- Hemant Shesh

चूंकि राजस्थान उत्तर भारतीय राज्य है, इसलिए यह अभयारण्य गर्मियों में आपके लिए उतना अनुकूल नहीं होगा। मई और जून के दौरान सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य काफी गर्मी सहन करता है। आप मॉनसून के बाद यहां का प्लान बना सकते हैं। मॉनसून के बाद यहां का मौसम काफी खुशनुमा हो जाता है। सर्दियां आते-आते यहां का वातावरण बहुत ही खूबसूरत हो जाता है। यहां की सैर का सबसे आदर्श समय सितंबर के अंत से लेकर फरवरी के बीच का है। इस दौरान यहां ठंड काफी पड़ती है, इसलिए आप यात्रा के दौरान ऊनी कपड़े जरूर रखें।

वन्यजीव

वन्यजीव

वन्य जीवन के मामले में सीता माता अभयारण्य एक समृद्ध वन्य क्षेत्र है, जहां आप असंख्य वन्यजीवों की कई प्रजातियों को आराम से देख सकते हैं। स्तनधारी जीवों में आप यहां तेंदुआ, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, सियार, भालू, नीलगाय, चमगादड़, चीतल, जंगली सूअर आदि को देख सकते हैं।

इसके अलावा आप यहां पक्षी विहार का भी आनंद ले सकते हैं। पर्यटकों को यहां रंग-बिरंगे पक्षियों को देखना काफी ज्यादा पसंद है। अगर आप वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के शौकीन हैं तो यहां आ सकते हैं।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

सीता माता वन्यजीव अभयारण्य राज्य का एक लोकप्रिय अभयारण्य है, जहां आप परिवहन के तीनों मार्गों से आसानी से पहुंच सकते हैं, यहां का नजदीकी हवाईअड्डा उदयपुर एयरपोर्ट है, रेल मार्ग के लिए आप मंदसौर रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। अगर आप चाहें तो यहां सड़क मार्गों के द्वारा भी यहां तक पहुंच सकते हैं। यह अभयारण्य राज्य के कई बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

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