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निमिशांबा मंदिर..जहां एक मिनट माता करती हैं भक्तों की मुश्किलों को दूर

By: Namrata Shatsri

निमिशा का मतलब होता है एक मिनट और माना जाता है कि इस मंदिर में पूजी जाने वाली देवी अपने भक्‍तों की मुरादों को एक मिनट में पूरा कर देती हैं। निमिशांबा, देवी पार्वती का ही एक रूप है। यह मंदिर कावेरी नदी के तट पर स्थित है।

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निमिशांबा मंदिर का इतिहास
इस मंदिर को 400 साल पहले मुम्‍मादी कृष्‍णराज वोडेयर के शासनकाल के दौरान बनवाया गया था। देवी के बिलकुल सामने एक पत्‍थर पर श्री चक्र बना हुआ है। इस मंदिर में एक छोटा सा गर्भगृह भी है जिसमें सात कक्ष और विशाल प्रवेख स्‍तंभ है।

Nimishamba In Srirangapatna

PC: nimishambhatemple.kar.nic.in

माना जाता है कि श्री चक्र को एक पत्थर पर मुकदरराज नामक राजा द्वारा उत्‍कीर्ण किया गया था, जो बाद में आत्मनिर्भर हो गया था जिसके बाद ये आत्‍मनिग्रह हो गया।

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मान्‍यताएं
इस मंदिर में श्रद्धालु देवी को नीबू और नीबू से बनी माला अर्पित करते हैं। मंदिर के पुजारी नीबू को लेकर उसे श्री चक्र पर और देवी के चरणों में रखकर भक्‍तों को उसे वापस कर देते हैं।पुजारी कहते हैं कि आप इन नीबूओं को अपने साथ ले जाकर अपने घर के पूजन कक्ष में कुछ दिनों तक रखने के बाद उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें या फिर आप इस नीबू का रस बनाकर उसका सेवन भी कर सकते हैं। इससे जीवन में शांति और खुशहाली आती है।

Nimishamba In Srirangapatna

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निमिशांबा के अलावा यहां भगवान शिव, गणेश जी और लक्ष्‍मी नारायण एवं हनुमान मंदिर भी हैं।

प्रमुख त्‍योहार
शुक्रवार के अलावा दसारा पर वरामहालक्ष्‍मी और दुर्गाष्‍टमी के दिन मंदिर में भक्‍तों की भारी भीड़ रहती है। वैसे तो इस मंदिर में ज्‍यादा भीड़ नहीं रहती लेकिन दसारा के मौके पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है।

Nimishamba In Srirangapatna

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समय
सुबह 6.30 से रात 8.30 बजे तक। विशेष अवसर में मंदिर के द्वार सुबह 4.30 बजे ही खुल जाते हैं।

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निमिशांबा मंदिर का स्थान
श्रीरंगपटना से इस मंदिर की दूरी 2 किमी, मैसूर से 17 किमी और बेंगलुरू से 125 किमी है। मैसूर और बेंगलुरू से यहां पर केएसआरटीसी की बसों द्वारा पहुंचा जा सकता है या फिर आप अपने वाहन से भी इस मंदिर के दर्शन करने आ सकते हैं। श्रीरंगपटना में आप अंबेली होटल रिजॉर्ट और मयूरा रिवर व्‍यू में रात को रूक सकते हैं।

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