Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »घूमें प्राचीन भारत के वो विश्वविद्यालय जो फिर कभी पुनर्जीवित नहीं हुए

घूमें प्राचीन भारत के वो विश्वविद्यालय जो फिर कभी पुनर्जीवित नहीं हुए

लाइफ से थोड़ा ब्रेक लेकर प्राचीन भारत के इन विश्वविद्यालयों के इतिहास और शिक्षा के इतिहास के बारे में जानें।

By Kanishka kandy

विश्व में भारत हर क्षेत्र में अग्रणी रहा है। फिर वह आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, विज्ञान, चिकित्सा या शिक्षा ही क्यों ना हो, भारत निरंतर ही बिना किसी मोघ के सभी ऐतिहासिक लीड्स के पीछे का प्रमुख स्तम्भ रहा है।

भारत में, शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी गई है और ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में शिक्षा की अहम भूमिका रहती है। वेदों में भी इस बात का जिक्र है कि गुरुकुल और आश्रम ही बच्चों की शिक्षा का प्रथिमिक स्रोत थे।

यहीं पर छात्रों को प्रारंभिक शिक्षा, विभिन्न विषयों और व्यावहारिक जीवन के बारे में पढ़ाया जाता था। यदि आप भी भारत के शैक्षिक इतिहास के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं और प्राचीन भारत के कुछ ऐसे महत्वाकांक्षी विश्वविद्यालयों के गलियारों से गुजरना चाहते हैं, जो फिर दुबारा कभी पुनर्जीवित नहीं हुए, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं।

नालंदा विश्वविद्यालय (बिहार)

नालंदा विश्वविद्यालय (बिहार)

दूरी- पटना से 2 घंटे की दूरी

यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित यह विश्वविद्यालय विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में से एक है। नालंदा विश्वविद्यालय विश्व भर से हजारों शिक्षकों और छात्रों के लिए विद्या का केंद्र था। 5वीं शताब्दी में सम्राट शक्रदित्य द्वारा स्थापित यह विश्वविद्यालय 700 वर्षों तक गुप्ता साम्राज्य के अंतर्गत फला-फूला और फिर 12वीं सदी के अंत तक हर्ष साम्राज्य में विकसित हुआ| बड़े-बड़े कमरों से लेकर व्याख्यान कक्ष और विश्व की सबसे बड़ी पुस्तकालय तक नालंदा में वो सब कुछ था जिसकी कामना हजारों शिक्षार्थी र्और शोधकर्ताओं वाले आदर्श विश्वविद्यालय को होती है।Pc: Amannikhilmehta

नालंदा विश्वविद्यालय (बिहार)

नालंदा विश्वविद्यालय (बिहार)

चीन, जापान, तिब्बत, इंडोनेशिया और कई अन्य देशों के छात्र इस विश्वविद्यालय में पढ़ने आते थे। नालंदा की पुस्तकालय में अलग अलग विषयों जैसे की व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, खगोलशास्त्र, चिकित्सा और विज्ञान की पुस्तकों, लाखों लिपि और ग्रंथों का विशाल संग्रह था। इस पुस्तकालय को जिसे धर्मागंज के नाम से भी जाना जाता था में रत्नासगरा, रत्नादधि, और रत्नरंजक नामक तीन बहुमंजिली इमारत थी। नालंदा विश्वविद्यालय सात सदियों तक बढ़ा और फला-फूला और अंततः बख्तियार खिलजी के हमले के तहत इसका अंत हुआ । आज के समय में यह विश्वविद्यालय सिर्फ इतिहास प्रेमियों जो आज भी इस विश्वविद्यालय की विशालता और महानता को समझने की कोशिश करते हैं के लिए एक पर्यटन स्थल बनकर रह गया है।Pc: Hideyuki KAMON

तक्षशिला विश्वविद्यालय (अब पाकिस्तान में)

तक्षशिला विश्वविद्यालय (अब पाकिस्तान में)

दूरी- इस्लामाबाद से2 घंटे

विश्व के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में शुमार तक्षशिला विश्वविद्यालय को भी अपने महान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्ज़ा प्राप्त है। 10000 से भी अधिक छात्रों की क्षमता वाला यह विशाल विश्वविद्यालय एक समय पर प्राचीन भारत में शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था। क्यूंकि यह शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र था इसलिए ग्रीस, चीन, जापान, अरब और कई अन्य देशों के छात्र विभिन्न कलाओं को सिखने के लिए तक्षशिला आते थे। यहाँ तक्षशिला में लोग विज्ञान, खगोल विज्ञान, ज्योतिष, आयुर्वेद, दर्शन, व्याकरण, तीरंदाजी, राजनीति, कृषि आदि के विभिन्न क्षेत्रों में अपने रूचि को शिक्षा के रूप में अपनाने तक्षशिला आते थे।Pc:Sasha Isachenko

 तक्षशिला विश्वविद्यालय (अब पाकिस्तान में)

तक्षशिला विश्वविद्यालय (अब पाकिस्तान में)

तक्षशिला का उल्लेख कई बौद्ध जातक कथाओं, चीनी यात्रियों की कथाओं , पुराणों, और भारत के प्राचीन ग्रंथों में पाया जा सकता है। 800 वर्षों के समृद्ध और सफल इतिहास के बाद इस भविष्यवादी विश्वविद्यालय का पतन आक्रमणकारियों द्वारा हमले में हुआ। तक्षशिला निश्चित ही अपने समय से आगे थी और परिणामस्वरूप, चाणक्य, चंद्रगुप्त मौर्य और विष्णु शर्मा जैसे कई विद्वान पुरुषों का निर्माण किया।Pc:Furqanlw

सोमपुरा विश्वविद्यालय (अब बांग्लादेश में)

सोमपुरा विश्वविद्यालय (अब बांग्लादेश में)

दूरी- ढाका से 7 घंटे दूर

एक बौद्ध मठ के रूप में प्रसिद्द यह सोमपुरा विश्वविद्यालय का इतिहास पाल राजवंश से जुड़ा है और 8वीं सदी में राजा धर्मपाल द्वारा बनाया गया था। इस चौकोर रूप की संरचना के बीचों बीच एक विशाल स्तूप था और यह 27एकड़ के जमीनी इलाके में फैली हुई थी| यह शांतिपूर्ण मठ धार्मिक परंपरायें जैसे बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिंदू धर्म की शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।Pc:Syed Sajidul Islam

सोमपुरा विश्वविद्यालय (अब बांग्लादेश में)

सोमपुरा विश्वविद्यालय (अब बांग्लादेश में)

177 कमरे, अनेकों मंदिर, स्तूप, अनगिनत इमारत और धार्मिक नक्काशियों के साथ शुशोभित सोमपुरा अपने समय में सभी महाविहारों में सबसे बड़ा था।

400 वर्षों के ऐतिहासिक अस्तित्व के बाद12 वीं सदी के अंत से इसका पतन शुरू हो गया| नालंदा में मौजूद रिकॉर्ड यह बताते हैं की सोमपुरा का अंत विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा किये गए हमले में आग लगने की वजह से हुआ था।

आज, यह सिर्फ एक पर्यटन स्थल है, और पर्यटक इसके खण्डहरों के अंश को देख इसकी छानबीन कर सकते हैं।
Pc:Masum-al-hasan

विक्रमशिला विश्वविद्यालय (बिहार)

विक्रमशिला विश्वविद्यालय (बिहार)

दूरी- भागलपुर से 1 घंटे की दूरी

नालंदा में शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट के परिणामस्वरूप, विक्रमशिला का जन्म हुआ| पाल राजवंश के राजा धर्मपाल द्वारा निर्मित इस सुंदर मठ में 100से अधिक शिक्षक थे और1000 से अधिक छात्र के साथ यह विश्वविद्यालय नालंदा को कड़ी टक्कर दे रहा था। विक्रमशिला पाल राजवंश के दौरान सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक थीं, दूसरों में सोमपुरा, नालंदा और ओदंतपुरी थे।Pc: Tonandada

विक्रमशिला विश्वविद्यालय (बिहार)

विक्रमशिला विश्वविद्यालय (बिहार)

वर्तमान में बिहार के भागलपुर जिले में स्थित, यह विश्वविद्यालय कई देशो के शिक्षार्थियों के लिए शिक्षा का केंद्र हुआ करता था और विश्व भर से आए छात्रों को यहाँ कुशलता और कुशाग्रता का पाठ पढ़ाया जाता था| दर्शन, व्याकरण, तत्वमीमांसा और तर्क के अलावा, तंत्रविद्या सबसे महत्वपूर्ण विषय था। विक्रमशिला भी बख्तियार खिलजी के हमले का शिकार हुआ था और कई हमले झेलने के बाद 12वीं शताब्दी के अंत में यह पूर्ण रूप से नष्ट हो गया| आज, इस जगह में केवल खंडहर और विनाश का भयानक अतीत है। और यदि आप इसके विशाल अतीत को जानने के इक्छुक हैं तो इसके इसके अतीत की यात्रा का करीब से पालन करें।Pc:Prataparya

पुष्पगिरी विश्वविद्यालय (ओड़िसा)

पुष्पगिरी विश्वविद्यालय (ओड़िसा)

दूरी- जयपुर, ओड़िसा से 1.5 घंटे

प्राचीन भारत के एक और प्रमुख शिक्षण केंद्र, पुष्पागिरि की स्थापना 3 शताब्दी में हुई और 12 वीं शताब्दी के अंत तक यह काफी सफल रही थी। ओडिशा के लैंगूनी पहाड़ियों पर स्थित, पुष्पगिरि विश्वविद्यालय कई शिक्षकों और उनके शिष्यों के लिए शिक्षण का केंद्र थी, जिनका ध्यान आयुर्वेद और चिकित्सा के क्षेत्र में शोध पर केन्द्रित था।Pc:Ashishkumarnayak

 पुष्पगिरी विश्वविद्यालय (ओड़िसा)

पुष्पगिरी विश्वविद्यालय (ओड़िसा)

हाल ही में हुई खोज के मुताबिक यह पता चला है की इस शिक्षण संस्थान का निर्माण सम्राट अशोक द्वारा करवाया गया था। चीनी यात्री युआनज़ांग के कई लेखों में पुष्पगिरि का उल्लेख मिल जाता है। अन्य बौद्ध मठों के समान आज इस शिक्षण केंद्र के भी बस अवशेष देखे जा सकते हैं।

इसलिए, ये प्राचीन भारत के वो प्रमुख विश्वविद्यालय हैं जो फिर कभी पुनर्जीवित नहीं हुए। दुर्भाग्य से, केवल उनके अवशेष ही आज देखे जा सकते है हालांकि, इनके निराशाजनक हाल के बीच सफलता की भी अपनी ही कहानी है। इन पर एक नज़र डालें और ज्ञान के इतिहास की गहराई में गोते लगायें।Pc:Ashishkumarnayak

More News

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+