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मुंबई की चहल पहल और भीड़ भाड़ से दूर कहां मनाएं हॉट एंड हैपनिंग वीकेंड

By Syedbelal

जीवन में काम चाहे कितना ही हो, हम यही चाहते हैं कि उसको निपटा कर फुर्सत के कुछ पल अपने लिए निकालें। प्रायः ये देखा गया है कि इन फुर्सत के पलों में व्यक्ति या तो घर पर रहकर परिवार को समय देना पसंद करता है या फिर दोस्तों, परिवार के साथ या फिर अकेले घूमने जाना चाहता है।तो आज का हमारा ये आर्टिकल उनके लिए है जो देश की औद्योगिक राजधानी यानी मुंबई में हैं ।

मुंबई सपनों का शहर है जो भीड़ भाड से भरा हुआ है। यहां लोगों के पास सब कुछ है, अगर कुछ नहीं है उनके पास तो वो है अपने लिए समय।तो आज इस आर्टिकल के जरिये हम आपको ये बताएँगे कि कैसे आप मुंबई में रहते हुए अपने वीकेंड को यादगार और उसकी खूबसूरत यादों को अपने पास संजोकर रख सकते हैं। चाहे लोनावाला या खंडाला की वादियां हों या फिर पंचगनी और महाबलेश्वर मुंबई के आस पास ऐसा बहुत कुछ है जो आपको अपनी खूबसूरती से दीवाना कर देगा।

यदि आप मुंबई के जुहू बीच पर लोगों की भीड़ से तंग आ चुके हैं और अकेले में शांत समुंद्र को शरारत करते हुए देखना चाहते हैं तो इस बार वीकेंड के लिए अलीबाग और मुरुड जंजीरा में भी आप एक खूबसूरत वीकेंड मना सकते हैं।तो आइये इस आर्टिकल के माध्यम से और गहराई से जानें मुंबई में रहते हुए खूबसूरत और यादगार वीकेंड के लिए कहां कहां जा सकते हैं आप।अधिक जानकारी के लिए स्लाइड्स पर क्लिक करना न भूलें।

कर्नाला

कर्नाला

अपने किलों के लिए प्रसिद्द कर्नाला महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले में स्थित है। यह समुद्र सतह से लगभग 475 किलोमीटर की ऊँचाई पर स्थित है और चारों ओर से घने हरे जंगलों और एक ओर से ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है। कर्नाला का पक्षी अभ्यारण्य इसे प्रकृति प्रेमियों और पक्षी प्रेमियों के बीच प्रसिद्द बनाता है। यह अभ्यारण्य लगभग 150 प्रकार के पक्षियों की घरेलू जातियों और 37 प्रवासी पक्षियों का घर है। इस पर्यटन स्थल पर ट्रेकिंग की भी व्यवस्था भी है। इस पर्यटन स्थल का भ्रमण साल में कभी भी किया जा सकता है।

कर्जत

कर्जत

महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले के शहर और उप जिले में कर्जत एक मनोहर पहाड़ी भू भाग है। यह सहयाद्री श्रेणियों, पश्चिमी घाट और साथ ही साथ भोर घाट में भी फैला हुआ है। यह कोंकण क्षेत्र में उल्हास नदी के किनारे स्थित है। कर्जत प्राकृतिक संपदा, चट्टानी भाग और बहुत सारे झरनों से संपन्न भव्य स्थान है जो मानसून के दौरान पूर्ण रूप से खिले रहते हैं। कर्जत मुंबई महानगर से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और उन लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है, जो शहरी जीवन से परेशान हो जाते हैं और साहसिक और बाहरी गतिविधियाँ पसंद करते हैं।

खंडाला और लोनावाला

खंडाला और लोनावाला

एक व्यस्त सप्ताह के बाद तनाव मुक्त होने के लिए महाराष्ट्र में स्थित खंडाला सबसे उपयुक्त हिल स्टेशन (पर्वतीय पर्यटन स्थल) है। सह्याद्री श्रेणी के पश्चिमी भाग में स्थित यह स्थान समुद्र सतह से 625 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और भारत का एक प्रसिद्द दर्शनीय स्थल है। जबकि मुंबई के भीड़ भरे महानगरीय जीवन से दूर रोमांटिक छुट्टियां बिताने के लिये, लोनावाला महाराष्ट्र राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में एक लोकप्रिय पहाड़ी क्षेत्र है। समुद्र स्तर से 625 मीटर ऊंचाई पर स्थित, यह अति सुंदर पहाड़ी क्षेत्र, लुभावनी सहयाद्री पहाड़ियों का एक हिस्सा है और विस्तार में 38 वर्ग किलोमीटर के आसपास है। लोनावाला मुंबई से 97 किमी और पुणे से केवल 64 किमी दूर है।

माथेरान

माथेरान

महाराष्ट्र में माथेरान एक अदभुत हिल स्टेशन है - सबसे छोटा और सबसे अधिक प्रसिद्द। लगभग 2650 फुट की ऊँचाई पर बसा यह पर्यटन स्थल पश्चिमी घाट श्रंखला के पहाड़ी क्षेत्र में बसा है। बड़े व्यस्त शहरों से माथेरान की निकटता इसे सप्ताहांत पर शीघ्र आश्रय स्थल बनाती है। माथेरान का अर्थ है ‘सिर पर जंगल'। इतिहास यह बताता है कि किसी ह्यू पोलिंट्ज़ मलेट ने 1850 में माथेरान की खोज की थी।

अलीबाग

अलीबाग

रायगढ़ जि़ले के कोंकण क्षेत्र में स्थित अलीबाग, महाराष्ट्र के पश्चिमी तट पर बना एक छोटा सा शहर है। यह मुंबई की प्रसिद्ध मैट्रो के पास है। अलीबाग का अर्थ है, अली का बाग। किंवदंतियों के अनुसार अली ने बहुत सारे आम और नारियल के पेड़ लगाए थे। 17वीं शताब्दी में बनी इस जगह की उन्नति शिवाजी महाराज ने की थी। 1852 में इसे 'तालुका' घोषित किया गया। अलीबाग, बनी इज़राईली यहूदियों का निवास स्थान भी रह चुका है।

मालशेज घाट

मालशेज घाट

मालशेज़ घाट महाराष्ट्र के पुणे जिले के पश्चिमी घाटों की श्रेणी में स्थित एक प्रसिद्ध घाट है। मालशेज़ घाट समुद्र सतह से लगभग 700 मीटर की ऊँचाई पर स्थित एक शानदार पर्यटन स्थल और हिल स्टेशन है जो स्वास्थ्यवर्धक और सुखद जलवायु से परिपूर्ण है। यह स्थान अपनी अनगिनत झीलों, चट्टानी पर्वतों के लिए प्रसिद्ध है और यह प्रकृति प्रेमियों, सुख की खोज करने वालों, साहसिकों और ट्रेकर्स के बीच भी प्रसिद्ध है।

मुरुड जंजीरा

मुरुड जंजीरा

मुरुड जंजीरा एक प्रसिद्द बंदरगाह है जो महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले के अंतर्गत एक तटीय गाँव मुरुड में स्थित है। किसी समय सिद्दी राजवंश द्वारा कब्ज़े में किया गया यह केवल एक ही किला है जो मराठाओं, पुर्तगालियों, डच तथा इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अनेक हमलों के बाद भी खराब नही हुआ और हारा नही। जंजीरा नाम भारतीय मूल का नही है।

पुणे

पुणे

पुणे: देश की शानअगर आप भारत की संस्‍कृति, परम्‍परा, प्रौद्योगिकी, इतिहास को एक साथ देखना चाहते है तो पुणे आइए। महाराष्‍ट्र राज्‍य का सबसे बड़ा शहर पुणे हर सुख-सुविधा से भरा हुआ है। इस शहर को सदाचार का शहर भी कहते है। यहां के शापिंग मॉल, चौड़ी सड़कें, कॉलेज, एजूकेशन सेंटर, पार्क, सरकारी ऑफिस देखकर आपको इंडियन होने पर प्राउड फील होगा। वर्तमान में पुणे एक आईटी हब के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। लेकिन जनाब, पुणे घूमने आएं तो दो बातों का खास ख्‍याल रखें, पहला- तंग समय के साथ पुणे न आएं क्‍योकि कम समय में पुणे को अधूरा घूमना बेकार है और दूसरा- अच्‍छा बजट लेकर आएं क्‍योकि पुणे खर्चो का शहर है यहां की हर चीज आपकी जेब से पैसे निकलवाने में उस्‍ताद है।

नासिक

नासिक

नासिक शहर महाराष्ट्र में स्थित है और अंगूर की उत्पादन मात्रा के कारन भारत की शराब की राजधानी के रूप में जाना जाता है। यह मुंबई से 180 किमी दूर और पुणे से करीब 200 किलोमीटर के आसपास है। नापा घाटी के पश्चिमी घाट पर स्थित है। नासिक पूर्व में सत्वहना राजवंश की राजधानी थी। 16 वीं सदी के दौरान, शहर मुगल शासन के अधीन आया था और गुल्शानाबाद कहा जाता था। उसके बाद यह यह पेशवाओं के पास था, जो 19 वीं सदी के अंत में अंग्रेजों से हार गए थे। वीर सावरकर की तरह प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी नासिक से रहे हैं। ऐसा बताया जाता है कि 14 साल के वनवास के दौरान भगवान राम नासिक के पास एक तपोवन नामक जगह पर रहे थे। इसी जगह भगवान लक्ष्मण ने शूर्पनखा की नाक काटी थी, और इसलिए इस जगह का नाम नासिक पड़ा, जो की एक नाक का ही अनुवाद रूप है।

सिलवासा

सिलवासा

सिलवासा, भारतीय संघ शासित प्रदेश दादरा और नागर हवेली की राजधानी है। इस शहर को पुर्तगाली शासन के दौरान विला डी पाको द अरकॉस के नाम से जाना जाता था। पागल कर देने वाली भीड़ से अलग, सिलवासा एक प्रसिद्ध गंतव्‍य स्‍थल है जहां पर्यटक प्रकृति के शानदार नजारों का लुत्‍फ उठा सकते है और पुर्तगाल की सांस्‍कृतिक विरासत की छाप भी देख सकते है। 19 वीं सदी तक सिलवासा सिर्फ एक गुमनाम गांव था। 1885 में पुर्तगाली प्रशासन ने तय किया कि मुख्‍यालय को दरारा से सिलवासा में शिफ्ट कर दिया जाए। फरवरी 1885 में एक डिक्री पास हुई और सिलवासा की किस्‍मत बदल गई। उसके बाद सिलवासा एक शहर में बदल गया और इसका नाम विला डी पाको द अरकॉस पड़ गया। वर्तमान में सिलवासा, दादरा और नागर हवेली का सबसे परिचित स्‍थल है। वन्‍य जीवन और प्रकृति पर्यटन के क्षेत्र में रूचि रखने वाले पर्यटकों के लिए सिलवासा एक केंद्र है जहां आकर वह भरपूर आनंद उठा सकते है।

दमन

दमन

दमन, गोवा और दादरा एंव नगर हवेली 450 साल से भी ज्यादा समय के लिए पुर्तगाली साम्राज्य का हिस्सा रहा। 19 दिसंबर 1961 में दमन और अरब सागर में विदेशियों के अधीन दूसरे तटवर्ती क्षेत्रों को भारत में मिला दिया गया। हालांकि 1974 तक पुर्तगाल दमन व अन्य क्षेत्रों को अपना ही हिस्सा मानता था। दमन हमेशा से ही अलग-अलग जाति और संस्कृति का संगम स्थल रहा है। इन सभी ने आपस में मिलकर इसे एक खास बहुरंगी पहचान दिया है। अरब सागर के 12.5 किमी लंबे समुद्री किनारे पर इतराने वाला यह केन्द्रशासित प्रदेश शांति और सुकून को पसंद करने वालों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है।

पंचगनी

पंचगनी

पंचगनी और महाबलेश्वर दो हिल स्टेशन हैं जो सौंदर्य को पुनः परिभाषित करते हैं। यहाँ का अमर सौंदर्य सालाना पर्यटकों, घरेलू लोगों और अन्य लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है। पंचगनी की खोज ब्रिटिश लोगों द्वारा की गई जब वे भारत पर राज्य करते थे। इतिहास बताता है कि एक अधीक्षक जिन्हें जान चेसोन के नाम से जाना जाता है वे गर्मियों के इस प्रसिद्ध स्थान की देखभाल के लिए नियुक्त किये गए थे। पंचगनी का अर्थ है पाँच पहाडियाँ और यह समुद्र सतह से लगभग 1,350 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

महाबलेश्‍वर

महाबलेश्‍वर

महाराष्‍ट्र के सतारा जिले में महाबलेश्वर एक प्रसिद्ध हिल स्‍टेशन है। पश्चिमी घाटों में स्थित, यह जगह दुनिया के सबसे खुबसूरत हिल स्‍टेशनों में शामिल है। महाबलेश्वर में पर्यटक गर्मी के मौसम में आना पसंद करते है। महाबलेश्‍वर का शाब्दिक अर्थ होता है- गॉड ऑफ ग्रेट पॉवर यानि भगवान की महान शक्ति। महाबलेश्वर को पांच नदियों की भूमि भी कहा जाता है। यहां वीना, गायत्री, सावित्री, कोयना और कृष्‍णा नामक पांच नदियां बहती है। 4,450 फीट की ऊंचाई पर बसा यह शहर 150 वर्ग किमी. के क्षेत्र में फैला हुआ है। महाबलेश्वर, मुम्‍बई से 220 किमी. और पुणे से 180 किमी. दूर स्थित है।

औरंगाबाद

औरंगाबाद

महान मुगल सम्राट औरंगजेब के नाम पर महाराष्‍ट्र में एक शहर है-औरंगाबाद। औरंगाबाद शब्‍द का शाब्दिक अर्थ है 'सिंहासन द्वारा निर्मित'।राज्‍य के उत्‍तरी इलाके में स्थित यह शहर खाम नदी के किनारों पर बसा हुआ है। इतिहास के अनुसार, सन् 1681 में औरंगजेब ने अपने अभियानों के लिए इस जगह को आधार बनाया था यानि उनकी सारी राजनीति और रणनीति इसी जगह में रची जाती थी।मुगल साम्राज्‍य में भी इस जगह का इस्‍तेमाल किया गया था और छत्रपति शिवाजी पर जीत पाने के लिए यहां रणनीतियां भी बनाई जाती थी। 1956 में इस क्षेत्र को महाराष्‍ट्र राज्‍य में विलय कर लिया गया। इस शहर में मराठी और उर्दू मुख्‍य भाषाएं है। इस शहर को सिटी ऑफ गेटस भी कहा जाता है।

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