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बंगाल का एक गांव जहां हर घर में मिलेंगे 'राम', पिछले 250 सालों से चली आ रही है यह परंपरा

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला की स्थापना का सैंकड़ों साल पुराना सपना पूरा हो चुका है। 22 जनवरी को नवनिर्मित राम मंदिर के भूतल के गर्भगृह में श्रीराम के रामलला स्वरूप की मनमोहक प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हो चुकी है। और अगले दिन यानी 23 जनवरी से राम मंदिर के द्वार आम नागरिकों के लिए खोल दिये गये हैं।

west bengal rampara village

आज देश का हर नागरिक अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने की योजनाएं बना रहा है लेकिन पश्चिम बंगाल का एक गांव ऐसा है जो अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी में भगवान राम से जुड़ा हुआ है। इस गांव के न सिर्फ कुल देवता भगवान राम हैं बल्कि गांव के हर एक व्यक्ति के नाम में श्रीराम का नाम जुड़ा हुआ है। इस गांव में यह परंपरा पिछले करीब 250 सालों से चली आ रही है।

कौन सा है यह अनोखा गांव!

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के पश्चिम सानाबांध का रामपाड़ा गांव बेहद अनोखा गांव है। मान्यताओं में इस गांव में कभी भी भगवान राम के आने का न तो कोई विवरण मिलता है और न ही इस गांव का संबंध रामायण या भगवान राम से जुड़े किसी भी व्यक्ति से है। इसके बावजूद गांव में रहने वाले लोगों का जुड़ाव भगवान राम से इस कदर हो गया है कि इस गांव का नाम ही रामपाड़ा पड़ गया है।

बता दें, बांग्ला भाषा में 'पाड़ा' शब्द का मतलब मुहल्ला होता है। साल 2021 में चुनाव प्रचार के समय बंगाल के सफर पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने चुनावी भाषण में रामपाड़ा गांव का उल्लेख किया था।

हर व्यक्ति के नाम में जुड़ा है श्रीराम का नाम

रामपाड़ा गांव के लोग सिर्फ भगवान श्रीराम को मानते या पूजते ही नहीं हैं बल्कि उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बना चुके हैं। इस गांव में रहने वाले हर पुरुष के नाम में भगवान राम का नाम जरूर जुड़ा होता है। यहां पैदा होने वाले हर नवजात बालक के नाम में भी राम नाम को जरूर शामिल किया जाता है।

भगवान राम का नाम उनके पहले या दूसरे नाम (First or middle name) में हो सकता है लेकिन गांव के हर पुरूष के नाम में राम नाम होता जरूर है। खास बात यह है कि गांव में किसी भी एक नाम को फिर से दोहराया नहीं जाता है। बताया जाता है कि यह परंपरा इस गांव में पिछले करीब 250 सालों से चली आ रही है।

क्यों हर किसी के नाम में शामिल है श्रीराम का नाम

ramlalla statue in the garbhgriha of ram mandir ayodhya

इस गांव में किसी का नाम रामकनाई है तो किसी रमाकांत, किसी का रामदुलाल, किसी का रामकृष्ण तो किसी का रामबदन नाम है। पर गांव के हर पुरूष नागरिक के नाम में भगवान राम का नाम क्यों जोड़ा जाता है? गांव के एक निवासी से मिली जानकारी के अनुसार गांव के एक निवासी रामबदन मुखर्जी के पूर्वजों को एक दिन सपने में भगवान श्रीराम ने गांव में उनका मंदिर बनाने और उन्हें गांव का कुलदेवता मानने का आदेश दिया था।

इसके बाद गांव में भगवान राम का मंदिर बनाकर उसमें शालिग्राम शिला को स्थापित किया गया और श्रीराम के रूप में उनकी पूजा की जाने लगी। रामपाड़ा में जब भी किसी घर में बच्चे का जन्म होता है, तब वंश के गुरुदेव के पास जाकर उसका नामकरण करवाया जाता है।

मनाया गया रामलला के स्वागत का विशेष उत्सव

अयोध्या समेत पूरे देश और विदेशों में भी कई जगहों पर जब राम मंदिर में रामलला के आगमन का उत्सव मनाया जा रहा था, तब पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले का रामपाड़ा गांव भी इस उत्सव में शामिल हुआ। 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन इस गांव के राम मंदिर में भी विशेष पूजा का आयोजन किया गया था।

आखिर गांव के कुल देवता का भव्य मंदिर जो उनकी जन्मभूमि पर बनकर तैयार हुआ है। इस दिन हर घर को फूलों से सजाया गया और शाम के समय देश के अलग-अलग हिस्सों की तरह ही रामपाड़ा गांव में भी असमय दीवाली मनायी गयी। लोगों ने अपने घरों के दरवाजों पर दीया जलाकर रामलला का स्वागत किया।

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