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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के बाद अब 8 हजार करोड़ की लागत से बन रही है श्रीकृष्ण की 'लीलानगरी'

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्रीराम की प्रतिमा स्थापित होने के साथ ही रामभक्तों का करीब 500 साल पुराना सपना साकार हो चुका है। ऐसे में भला श्री कृष्ण के भक्त कैसे पीछे रह सकते हैं। लेकिन जरा रुकिए, हम श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा की बात नहीं कर रहे हैं।

हम बात कर रहे हैं मथुरा से लगभग 1370 किमी की दूरी पर मौजूद पश्चिम बंगाल राज्य के मायापुर में तैयार हो रहे दुनिया के सबसे विशाल हिंदू मंदिर की।

बता दें, मायापुर इस्कॉन का मुख्यालय भी है। श्रीकृष्ण अवतार की कई कहानियां हम सबने सुनी है और हर कहानी में जो समानताएं हैं, वो हैं श्रीकृष्ण की नटखट लीलाएं। ऐसे में मायापुर में बन रहे इस विशाल मंदिर को अगर श्रीकृष्ण की 'लीलानगरी' कहा जाए, तो यह कहना गलत नहीं होगा। इस मंदिर का नाम टेम्पल ऑफ वैदिक प्लेनेटोरियम (TOVP) रखा गया है। इसे चंद्रोदय मायापुर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर न सिर्फ दुनिया का सबसे विशाल मंदिर होगा बल्कि इसका गुंबद भी सबसे विशाल होगा।

साल 2010 में ही हुई है इस Project की शुरुआत

कोलकाता से लगभग 130 किमी दूर नदिया जिले के मायापुर में इस विशालाकार मंदिर का निर्माण कार्य 2010 में शुरू हुआ था। अमेरिका के कैपिटल बिल्डिंग की डिजाइन से प्रेरित होकर इस मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। जुलाई 1976 को वाशिंग्टन की यात्रा के दौरान श्रील प्रभुपाद (जो इस्कॉन के संस्थापक हैं) कैपिटल बिल्डिंग की डिजाइन से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मायापुर में नये मंदिर का निर्माण करवाने का सोचा।

उन्होंने ही अंबरीश दास को इस मंदिर के निर्माण लागत में योगदान का अनुरोध भी किया था। बता दें, अंबरीश दास का असली नाम अल्फ्रेड फोर्ड हैं, जो प्रसिद्ध मोटर कंपनी फोर्ड के संस्थापक हेनरी फोर्ड के परपोते हैं। इस्कॉन में शामिल होने के बाद 1975 को उन्होंने अपना नाम बदल लिया था। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार इस मंदिर के निर्माण में उन्होंने ₹500 करोड़ का दान दिया है।

3 हिस्सों में तैयार हो रहा है TOVP

टेम्पल ऑफ वैदिक प्लेनेटोरियम का निर्माण 3 हिस्सों में किया जा रहा है।
पहले हिस्से में राधा-कृष्ण का मुख्य मंदिर होगा। इस मंदिर का निर्माण कार्य लगभग 70% पूरा हो चुका है। संभावना है कि साल 2025 से इसमें पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। इस मंदिर में 18 फीट ऊंचे द्वारपाल, जय और विजय भी होंगे जो मंदिर में प्रवेश करने वाले हर भक्त का स्वागत करेंगे। इस मंदिर में राधा-कृष्ण के साथ उनकी अष्ट सखियों की आदमकद मूर्तियां भी स्थापित होगी।

दूसरे हिस्से में भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार का मंदिर होगा। यहीं हिस्सा सबसे पहले खुलने वाला है और संभावना है कि मार्च माह से इसमें पूजा शुरू हो जाएगी।
तीसरा हिस्सा वैदिक तारामंडल का होगा, जो अभी 20% ही बन पाया है। इस हिस्से में 100 एकड़ के क्षेत्र में फैला बागिचा भी होगा। संभावना है कि साल 2030 तक यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। वैदिक तारामंडल में ब्रह्मांड के निर्माण की कहानी को अध्यात्मिक तरीके से दिखाया और समझाया जाएगा। इसके साथ ही यहां संस्कृत के महत्व को भी बताया जाएगा।

टेम्पल ऑफ वैदिक प्लेनेटोरियम की खासियतें

  • मायापुर चंद्रोदय मंदिर का निर्माण 8 हजार करोड़ रूपए की लागत से की जा रही है।
  • मंदिर के हर तल पर कम से कम 10 हजार भक्तों के खड़े होने की जगह होगी। उन्हें इतनी अधिक जगह मिलेगी कि इस्कॉन की परंपरा के अनुसार वे श्रीकृष्ण के सामने दिल खोलकर नृत्य और गा सकेंगे।
  • नृसिंह मंदिर के गुंबद का व्यास 177 फीट है, जिसपर गोल्ड लीफ लगे होंगे।
  • मंदिर की वास्तुकला पूर्वी और पाश्चात शैली का मिश्रण होगी। यहां 2.5 एकड़ के क्षेत्र में पुजारीतल का निर्माण होगा।
  • दूर से देखने में यह मंदिर कम और किसी महल जैसा ज्यादा दिखेगा, जो अध्यात्म के केंद्र के रूप में उभरेगा।
  • 20 मीटर लंबे वैदिक झुमर लगाएं जाएंगे जिसमें 60 मीटर व्यास की मंदिरनुमा आकृति होगी।
  • मंदिर परिसर को 750 एकड़ के क्षेत्र में बनाया जा रहा है।

3 साल में बनीं नींव

टेम्पल ऑफ वैदिक प्लेनेटोरियम का निर्माण करते समय यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यह कम से कम 1000 सालों तक यह टिका रहे। ठीक जैसा राम मंदिर के निर्माण के समय किया गया था। मंदिर के निर्माण में लोहे के जिस सरिया का इस्तेमाल किया गया है, उस पर स्टेनलेस स्टील को कोटिंग चढ़ाई गयी है। ताकि सरिया की आयु बढ़ सकें। खास बात है कि इस मंदिर का निर्माण पूरी तरह से केवल दान में मिले रूपयों से ही किया जा रहा है।

मायापुर नदिया जिले में गंगा और जलांगी नदी के संगम का डेल्टा क्षेत्र है। इस मंदिर के पश्चिमी तरफ से गंगा नदी और दक्षिण तरफ से जलांगी नदी बहती है। इसलिए यहां की मिट्टी काफी नरम है। कई आधुनिक टेस्टिंग करने के बाद आखिरकार 3 साल में नींव तैयार हो सकी है। बता दें, इस प्रोजेक्ट के लिए बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने 750 एकड़ जमीन दी है। साथ ही इसके पंजीकरण और रूपांतरण का 1000 करोड़ रुपए शुल्क भी माफ किया है।

इस मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने के बाद मायापुर मंदिर न सिर्फ धार्मिक बल्कि पर्यटन के दृष्टिकोण से भी विश्व के मानचित्र पर उभरेगा। मायापुर में सिर्फ मंदिर ही नहीं बल्कि इसे एक स्मार्ट सिटी के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में हर साल करीब 6 लाख भक्त मायापुर आते हैं। उम्मीद की जा रही है वैदिक प्लेनेटोरियम व मंदिर का निर्माण हो जाने से हर साल यहां लगभग 6 करोड़ कृष्णभक्तों का जनसैलाब उमड़ेगा जिसमें दुनिया के हर कोने से आने वाले श्रद्धालु शामिल होंगे।

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