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क्या है पर्युषण पर्व? जानिए इसका इतिहास और कौन सी हैं वो जगहें जहां मनाया जाता है यह पर्व?

जैन धर्मावलंबियों का महापर्व होता है पर्युषण पर्व। यह एक ऐसा पर्व है जब जैन धर्म को मानने वाले सभी लोग अपने जीवन पर चिंतन करते और उन लोगों से क्षमा मांगते हैं जिनके साथ उन्होंने गलत किया है। यह पर्व जैन धर्म के दिगंबर और श्वेतांबर दोनों संप्रदायों द्वारा मनाया जाता है।

इस साल 31 अगस्त से 7 सितंबर तक पर्युषण पर्व मनाया जाएगा। पर्युषण का शाब्दिक अर्थ चारों ओर से धर्म की आराधना करना होता है। आइए जैन धर्म के इस महापर्व के विषय में विस्तार से जानते हैं और उन जगहों के बारे में भी जानते हैं जहां इस धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाता है।

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क्या होगा है पर्युषण पर्व?

पर्युषण पर्व जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्व में से एक है। माा जाता है कि जिस समय भगवान महावीर ने शिक्षा दी थी, उस समय पर्यूषण पर्व मनाया जाता है। इस समय जैन समाज के लोग पूरे भक्ति भाव के साथ अभिषेक, पूजा अर्चना, अराधना, तप, ध्यान आदि करते हैं। इस पर्व के दौरान जैन धर्म को मानने वाले लोग आत्मशुद्धि का प्रयास करते हैं। माना जाता है कि सालभर सांसारिक क्रिया-कलापों की वजह से उनके जीवन में जो भी दोष, त्रुटि आदि आ जाते हैं, उन्हें इस पर्व के दौरान दूर किया जाता है।

कहां-कहां मनाया जाता है पर्युषण पर्व?

कुंदलपुर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश का कुंदलपुर जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। सतपुरा की पहाड़ी पर बसे कुंदलपुर में कई जैन धर्म के कई मंदिर भी मौजूद है। इसके साथ ही इस मंदिर में मौजूद है जैन धर्म के संस्थापक की सबसे ऊंची मूर्ति, जिन्हें ऋषभनाथ, आदिनाथ आदि नामों से जाना जाता है। इस मूर्ति की ऊंचाई करीब 15 फीट है, जिसे स्थानीय लोग बड़े बाबा के नाम से पुकारते हैं। बड़े बाबा का मंदिर कुंदलपुर का सबसे पुराना मंदिर भी है।

हनुमंतल, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के जबलपुर में मौजूद है हनुमंतल। यहां भी जैन मंदिर का बड़ा समूह मौजूद है। इस शहर का मुख्य जैन मंदिर हनुमंतल बड़ा जैन मंदिर है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह भारत में मौजूद अपनी तरह का सबसे बड़ा मंदिर भी है। इस मंदिर में कुल 22 शिखर और कई कमरें हैं जिनमें जैन तिर्थंकरों की मूर्तियां और तस्वीरें सजायी हुई हैं। ये सभी तस्वीरें मुगल, मराठा और ब्रिटिश शासनकाल की हैं।

किलेनुमा यह मंदिर देश का एकमात्र मंदिर है, जहां जैन देवी पद्मावती की प्रतिमा स्थापित है। यहां से हर साल महावीर जयंती का जुलूस निकलता है। हनुमंतल में करीब 30 जैन मंदिर मौजूद हैं, जिनमें बहुरिबंद, बड़ा फुहारा और लॉर्डगंज भी शामिल हैं।

धर्मनाथ जैन मंदिर, कर्नाटक

कर्नाटक का धर्मनाथ जैन मंदिर जैन धर्म के 15वें तीर्थंकर धर्मनाथ को समर्पित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह मंदिर कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में मौजूद है। इतिहासकारों का कहना है कि चंद्रगुप्त मौर्य की श्रवणबेलगोला की यात्रा के बाद जैन दक्षिणी राज्य में आए। इसके बाद ही यह एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल बन गया। यहां से तीर्थयात्री दक्षिण की ओर आगे बढ़े, और जैन धर्म का संदेश केरल और तमिलनाडु में भी फैलाया।

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पालीताना, गुजरात

गुजरात के भावनगर में मौजूद शत्रुन्जय पहाड़ी पर मौजूद है पालीताना। यह जैन धर्म का बड़ा तीर्थ स्थल है जहां पहाड़ी पर करीब 3000 जैन मंदिर स्थित हैं। यहां सभी मंदिरों का निर्माण साल-दर-साल हुआ है। लेकिन सबसे पुराना मंदिर करीब 11वीं शताब्दी में बना बताया जाता है।

इन मंदिरों तक पहुंचने के लिए जैन धर्मावलंबियों को लगभग 3,800 पत्थर की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। श्वेतांबर जैन को समर्पित पालिताना के विषयम में कहा जाता है कि यहां तिर्थंकर आदिनाथ ने ध्यान किया था। गुजरात का पालिताना भारत का एकमात्र ऐसा शहर भी है, जहां नॉन-वेज भोजन प्रतिबंधित है।

नेमिनाथ देरासर, गुजरात

नेमिनाथ देरासर गुजरात के सबसे ऊंचे स्थान गिरनार पर्वत पर स्थित है। विशाल गिर वन के बीच में स्थित गिरनार को हिंदुओं के साथ-साथ जैनियों द्वारा भी पवित्र माना जाता है। इस पहाड़ी की चोटी पर कई जैन मंदिर हैं, लेकिन नेमिनाथ देरासर को सबसे प्रसिद्ध माना जाता है।

22वें तीर्थंकर नेमिनाथ को समर्पित इस मंदिर में दर्शन करने के लिए काफी संख्या में भक्त आते रहते हैं। नेमिनाथ उन चार तीर्थंकरों में से एक हैं जो तीर्थयात्रियों के बीच सबसे अधिक भक्ति और श्रद्धा के बारे में बात किया करते थे। कहा जाता है कि गिरनार वहीं स्थान है जहां नेमिनाथ ने 1,000 वर्ष के जीवन के बाद मोक्ष प्राप्त किया था।

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