अयोध्या का राम मंदिर हो, केसरिया (बिहार) का विराट रामायण मंदिर हो, वृंदावन का चंद्रोदय मंदिर हो या जम्मु में हाल ही में बनकर तैयार हुआ बालाजी का मंदिर हो। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पिछले कुछ सालों में मंदिरों के निर्माण पर काफी अधिक जोर दे रही है। सिर्फ निर्माण ही नहीं बल्कि...

देशभर में मौजूद सालों पुराने मंदिरों के जीर्णोद्धार या मरम्मत का कार्य भी उतनी ही तेजी से ही आगे बढ़ रहा है। चाहे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण हो, केदारनाथ त्रासदी के बाद मंदिर निर्माण व सुन्दरीकरण हो या उज्जैन में महाकाल लोक का निर्माण हो, केंद्र सरकार इन सभी मंदिरों को पहले से भी कहीं अधिक भव्य व आकर्षक बना रही है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि क्यों केंद्र सरकार मंदिरों के निर्माण पर इतना अधिक जोर दे रही है?
सोशल मीडिया पर पूछे गये सवाल 'क्यों नरेंद्र मोदी सरकार मंदिरों के निर्माण और जीर्णोद्धार पर अधिक जोर दे रही है?' का लोगों ने कई तरह के जवाब दिये। कुछ ने इसे राजनीतिक पार्टियों की धार्मिक आस्था से जोड़कर बताया तो कुछ ने इस सवाल का बड़ा ही रोचक जवाब दिया। आइए आपको इस प्रश्न के कुछ रोचक उत्तर बताते हैं।
मंदिरों को किया गया था नष्ट

सोशल मीडिया पर पूछे गये इस प्रश्न का उत्तर देते हुए एक व्यक्ति ने कहा, "मुगल शासनकाल के 600 साल, अंग्रेजी हुकूमत के 200 साल और दूसरी राजनीतिक पार्टियों के पिछले 60 सालों के शासन के दौरान मंदिरों का सिर्फ विनाश किया गया। नये मंदिरों का निर्माण तो नहीं किया गया बल्कि पुरानी मंदिरें जो भारतीय धरोहर और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, उन मंदिरों को भी तोड़ा गया। उन मंदिरों की अवहेलना की गयी, नतीजन मंदिरों की और भी दयनीय स्थिति हो गयी। इसलिए अब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार मंदिरों की मरम्मत और उनके निर्माण का कार्य कर रही है।"
परिवार के साथ घूमने की जगह मिलती है
सोशल मीडिया पोस्ट के कमेंट बॉक्स में इस प्रश्न का उत्तर देते हुए एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, "मैं मूर्तिपूजा का समर्थक नहीं हूं। इसलिए मंदिरों के निर्माण की सराहना तो नहीं करुंगा। लेकिन मंदिर को और भी भव्य बनाने का एक फायदा जरूर हुआ जिसका उल्लेख मैं करना चाहता हूं। एंटरटेंमेंट पार्क या समुद्र तट जैसी जगहों पर परिवार के बुजूर्ग सदस्य जाना पसंद नहीं करते हैं। इन जगहों पर वे असहज महसूस करने लगते हैं। लेकिन मंदिरों में भव्य कॉरिडोर बनने से घर के बुजूर्ग सदस्यों को काफी राहत मिली है।
इन जगहों पर वे ना सिर्फ अपने हमउम्र साथियों के साथ आते हैं बल्कि परिवार में अपने बेटे-बहु या पोते-पोतियों का हाथ थामकर भी बिना किसी झिझक के आराम से घूम पाते हैं और थोड़ा समय व्यतित कर पाते हैं। इसके साथ ही मंदिरों में लंगर या भोग बांटने की व्यवस्था होती है। कई मंदिर प्रशासनों द्वारा वृद्धाश्रमों का संचालन भी किया जाता है, जो समाज के इन बुजूर्गों का आसरा बनता है।" उक्त व्यक्ति ने आगे लिखा, "मंदिरों को केंद्र कर अब शहरों या गांवों का भी विकास हो रहा है। इसलिए केंद्र सरकार का मंदिरों का जीर्णोद्धार या नये मंदिरों का निर्माण एक सकरात्मक पहल है।"
देश सिर्फ अहिंसा से नहीं चलती

एक युवा ने इस सवाल के जवाब में सोशल मीडिया पर लिखा है, "पिछले 800 सालों के दौरान बौद्ध धर्म ने हमें अहिंसा सिखाया जिसका हमेशा से ही गलत मतलब निकाला गया है। अगर सिर्फ अहिंसा से ही किसी देश पर शासन किया जा सकता तो सुरक्षा के लिए डिफेंस फोर्स की जरूरत ही क्यों होती? इसका आसान सा जवाब है कि बाहरी घुसपैठियों को रोकने के लिए हमें अपने हथियारों की मदद से लड़ना पड़ता है। वर्ना सभी बुरी ताकतें जीत जाती और दुनिया पर राज करती। केंद्र की मोदी सरकार भी मंदिरों का निर्माण और जीर्णोद्धार भी इसी उद्देश्य से कर रही है ताकि बुरी ताकतों पर हमारा देश हमेशा विजय पाता रहे।"
एक अन्य व्यक्ति ने इस सवाल के जवाब में लिखा है कि किसी भी देश का विकास हमेशा बहुसंख्यकों के सहारे ही होता है। भारत में हिंदू धर्म को मानने वाले लोग बहुसंख्यक हैं। साथ ही केंद्र सरकार को मंदिरों से काफी आय होती है। लेकिन उसी स्थान किसी मस्जिद या चर्च से सरकार की कोई आय नहीं होती है। इस वजह से मंदिरों की मरम्मत और नये मंदिरों के निर्माण पर इतना जोर दिया जाता है। अधिकांश मंदिरों के साथ आश्रम, चैरिटेबल क्लिनिक व वृद्धाश्रम जुड़े होते हैं।
हमें उम्मीद है इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप भी जरूर इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे, कि आखिर केंद्र सरकार मंदिरों की मरम्मत और निर्माण पर इतना जोर क्यों दे रही है। अगर आपको इस सवाल का जवाब मिलता है तो नीचे कमेंट बॉक्स में हमें अपना जवाब बताना बिल्कुल मत भूलिए।



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