सनातन, इस्लाम, या ईसाई, धर्म चाहे कोई भी हो सभी में मृत्यु को एक परम सत्य मानते हुए उसे मानव के जीवन का आधार बताया गया है। आज भी समाज में रह रहे चंद लोगों कि माने तो यदि किसी महिला का पति मर गया है तो फिर उसे जीने का कोई अधिकार नहीं है। पुरानी मान्यता है कि अगर महिला का पति मर जाये तो पति की मृत्यु के ठीक बाद महिला का जीवन वहीं रुक जाता है वहीं समाप्त हो जाता है। लेकिन अगर हम वृंदावन के आश्रमों में रह रही विधवाओं को देखें तो शायद हमारी सोच बदल जाये। PICS : कहीं गुलाल में रंगे विदेशी तो कहीं लाठियां खाते पुरुष, भारत में कुछ यूं खेली गयी होली
जी हां हम बात कर रहे हैं वृंदावन में रह रही उन महिलाओं की जिन्होंने विधवा होने के बावजूद होली मनाई और समाज को ये बताया कि विधवाओं को भी जीने का अधिकार है साथ ही इन महिलाओं ने समाज को ये भी सन्देश दिया कि जीवन रुकने का नहीं बल्कि चलते रहने का नाम है। तो आइये देखें तस्वीरों में कैसे खेली गयी इन विधवाओं द्वारा होली।

वृंदावन में होली के रंग में रंगी विधवाएं
जी हां ये तस्वीर है मथुरा में होली के रंग में रंगी उन बंगाली विधवाएं की जिन्होंने समाज को ये बताया कि औरों की तरह इन्हें भी खुशियां मनाने और अपनी भावनाओं को प्रकट करने का अधिकार है।

वृंदावन में होली के रंग में रंगी विधवाएं
वृंदावन में ली गयी इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि कैसे ये महिलाऐं खुशियां मना रही हैं।

वृंदावन में होली के रंग में रंगी विधवाएं
आज भी समाज में रह रहे चंद लोगों कि माने तो यदि किसी महिला का पति मर गया है तो फिर उसे जीने का कोई अधिकार नहीं है।

वृंदावन में होली के रंग में रंगी विधवाएं
पुरानी मान्यता है कि अगर महिला का पति मर जाये तो पति की मृत्यु के ठीक बाद महिला का जीवन वहीं रुक जाता है वहीं समाप्त हो जाता है।

वृंदावन में होली के रंग में रंगी विधवाएं
वृंदावन में रह रही इन महिलाओं की जिन्होंने विधवा होने के बावजूद होली मनाई और समाज को ये बताया कि विधवाओं को भी जीने का अधिकार है साथ ही इन महिलाओं ने समाज को ये भी सन्देश दिया कि जीवन रुकने का नहीं बल्कि चलते रहने का नाम है।



Click it and Unblock the Notifications











