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इस किले में पहुंचने के लिए करना पड़ता है खतरनाक ट्रेक, मानसून में देखने लायक होता है नजारा

भारत में कई तरह के किले होते हैं और लगभग सभी किले अपनी शानदार बनावट, सुरक्षा और बेहतरीन वास्तुकला के लिए फेमस होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे किले के बारे में सुना है जो सबसे ज्यादा ट्रेकिंग के लिए लोकप्रिय है?

harihar fort

आज हम आपको महाराष्ट्र के एक ऐसे ही किले के बारे में आपको बता रहे हैं जहां तक पहुंचने के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक ट्रेकिंग कर पहुंचना होता है। हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के नासिक में स्थित हरिहर फोर्ट की। यह फोर्ट एक गिरी दुर्ग है। जो रोमांच, प्रकृति और इतिहास के बारे में अपनी कहानी कहता है।

आइए आपको हरिहर फोर्ट के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं :

दुर्गम होती है चढ़ाई

हरिहर फोर्ट की चढ़ाई ना सिर्फ दुर्गम बल्कि काफी खतरनाक भी है। सह्याद्री पर्वतश्रृंखला पर स्थित हरिहर किला को हरिहरगढ़ के नाम से भी जाना जाता है। यह पहाड़ी किला नासिक से 41 किमी, इगतपुरी से 43 किमी, त्र्यंबकेश्वर से 22 किमी और कसारा से 51 किमी दूर स्थित है। इस किले की चढ़ाई पूरी तरह से खड़ी चढ़ाई होती है और कई जगहों पर चढ़ाई 90° तक के एंगल पर भी होती है। इस किले को देखने के लिए सालभर पर्यटक आते रहते हैं।

harihar fort

किले का इतिहास

इस किले का निर्माण महाराष्ट्र को गुजरात में मिलाने वाले गोंडा घाट द्वारा व्यापारिक मार्गों पर निगरानी करने के लिए किया गया था। इस किले का निर्माण 9वीं से 14वीं सदी के बीच सेउना या यादव राजवंश द्वारा किया गया था। किले की स्थापना के बाद ही इसपर आक्रमणकारियों का अधिकार हो गया था। यह किला अहमदनगर सल्तन के अधिकार में आने वाले किलों में भी शामिल था। वर्ष 1636 में इस किले के साथ ही कुछ और किलों को भी शाहजी भोंसले ने मुगल जनरल खान जमाल को सौंप दिया था। वर्ष 1818 में जब त्र्यंबक सल्तनत का पतन हुआ तो उस समय इसे अंग्रेजी शासन को सौंपा गया। उस समय इस किले के साथ ही 16 अन्य किलों पर भी अंग्रेजी कैप्टन ब्रिक्स ने अपना अधिकार जमा लिया था।

देखने लायक चीजें

  • सीधी खड़ी सीढ़ियां और उनपर चढ़ाई का रोमांचक अनुभव
  • शिव मंदिर
  • पुष्करणी तीर्थ तालाब
  • मानसून में चढ़ाई करते समय कई प्राकृतिक झरने दिखाई देते हैं
  • किले में बने दो कमरे जिनमें 10-12 लोग रह सकते हैं
  • हरा-भरा जंगल जिसमें ढेरों प्रकार के पक्षी हर समय चहचहाते रहते हैं
  • किले के शिखर से कई पर्वतमालाएं साफ-साफ नजर आती हैं
  • उत्तर में वाघेरा किला और दक्षिण में कवनई और त्रिंगलवाड़ी किले का स्पष्ट नजारा
  • किले का पहला दरवाजा (महादरवाजा) पार करने के बाद गुफाओं से होकर गुजरना पड़ता है

किले के शिखर पर है शिवमंदिर

हरिहर किले के ऊपर भगवान शिव का एक मंदिर और एक विशाल गुफा है जिसमें कहा जाता है कि किसी भी भगवान की मूर्ति नहीं है। इसके अलावा एक हनुमान जी का भी मंदिर है। किले के शिखर तक पहुंचने के लिए आपको रॉक क्लाइंबिंग करते हुए ही पहुंचना पड़ता है। किले में चढ़ाई के लिए कुल 117 सीढ़ियां बनी हुई हैं। हर सीढ़ी पर गड्ढे बनाए हुए हैं, जिससे चढ़ाई करने वालों को अच्छी ग्रीप मिल सके।

harihar fort

मुख्य द्वार पर पहुंचने के बाद आपको झुलते पहाड़ के नीचे से होकर गुजरना पड़ता है। किले के शिखर से चारों तरफ का नजारा बेहद शानदार नजर आता है। खास तौर पर बारिश के मौसम में तो इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। किले के शिखर पर मंदिर के पास आपको एक तालाब भी मिलेगा जिसे 'पुष्करणी तीर्थ' के नाम से जाना जाता है। इस तालाब का पानी इतना साफ होता है कि लोग इस पानी का उपयोग पीने के लिए भी कर सकते हैं।

त्रिकोणिय प्रिज्म पर बना है किला

हरिहर का किला पहाड़ पर एक त्रिकोणिय प्रिज्म पर बना हुआ है। इस प्रिज्म के दो किनारे 90° और एक किनारा 75° के कोण पर झुका हुआ है। दूर से देखने पर यह किला एकदम सीधा खड़ा नजर आता है।समुद्रतल से लगभग 3676 फीट की ऊंचाई पर बना यह किला मुख्य तौर पर एक वॉच टावर के रूप में बनाया गया था। यहां से ना सिर्फ दुश्मनों और उनके सभी हरकतों पर नजरें रखी जाती थी, बल्कि यहां से वातावरण और बरसात का अनुमान भी लगाया जाता था। गर्मी के मौसम में इस किले में राजपरिवार रहा करता था, जिससे उन्हें ठंडक मिलती थी।

pond near harihar fort

किले के शिखर पर दो कमरे भी हैं, जिनमें 10 से 12 लोग आसानी से रह सकते हैं। हरिहर फोर्ट की चढ़ाई के समय खास तौर पर बंदरों से सावधान रहने की जरूरत होती है। क्योंकि वे आपके सामानों पर झपटा मार सकते हैं और इस छिना-झपटी के दौरान आपका संतुलन बिगड़ने से आपकी जान पर भी बन आ सकती है। इस किले की चढ़ाई में आपको 2-3 घंटों का समय लग सकता है और उतरने में भी उतना ही समय लगता है। उतरना उसी रास्ते से होता है। इसलिए उतरते समय खड़ी चट्टानी सीढ़ियों पर खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। हरिहर फोर्ट की चढ़ाई इसके बेस में बने निर्गुणपाड़ा गांव से शुरू होती है।

कब और कैसे पहुंचे किला

यूं तो लोग साल भर हरिहर किला की ट्रेकिंग करते रहते हैं लेकिन यहां पहुंचने का बेस्ट समय अक्टूबर से फरवरी तक का महीना होता है। लेकिन आप चाहे तो मानसून के समय भी हरिहरगढ़ फोर्ट जा सकते हैं। उस समय आपको आसपास की हरियाली और शानदार प्राकृतिक नजारा देखने को मिलेगा

how to reach

अगर आपने मानसून के समय इस फोर्ट की चढ़ाई करने का प्लान बनाया है तो आपको अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इस समय फिसलन की वजह से चढ़ाई करना काफी मुश्किल होता है और कई बार जान को भी खतरा होता है। हरिहरगढ़ किला से नजदीकी एयरपोर्ट मुंबई एयरपोर्ट है, जो 170 किमी की दूरी पर स्थित है। सड़क मार्ग से आने पर आपको सबसे पहले मुंबई से नासिक और नासिक से 40 किमी दूर हरिहरगढ़ किले के लिए कैब लेना होगा।

हरिहर किले के शिखर में बने खंडहर में यादव वंश और अन्य शासकों के बारे में जानकारियां भी मिल सकती हैं। इस चढ़ाई को पूरा करने में 1 दिन का समय लग जाता है। अगर ट्रेकिंग के लिए किसी रोमांचक जगह की तलाश कर रहे हैं तो आपको निश्चित रूप से एक बार हरिहर फोर्ट पर जरूर आना चाहिए।

FAQs
हरिहर फोर्ट में चढ़ाई करने का सबसे अच्छा समय कौन सा होता है?

हरिहर फोर्ट पर सामान्य चढ़ाई के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी तक का होता है। मानसून ट्रेकिंग के लिए बेस्ट समय जून से अगस्त तक का होता है।

हरिहर फोर्ट पर चढ़ाई करने में कितना समय लगता है?

नासिक के हरिहर फोर्ट पर चढ़ाई करने में कम से कम 2 से ढाई घंटों का समय लगता है। हालांकि चढ़ाई करने का यह समय चढ़ाई करने वाले व्यक्ति की रफ्तार पर निर्भर करती है।

क्या हरिहर फोर्ट की चढ़ाई खतरनाक होती है?

हरिहर फोर्ट की चढ़ाई काफी मुश्किल लेवल की होती है। मानसून के समय फिसलन की वजह से सीधी खड़ी सीढ़ियों पर चढ़ना काफी खतरनाक व मुश्किल हो जाता है। इस ट्रेकिंग पर जाते समय हमेशा हाईकिंग जूते जरूर पहन कर जाएं।

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