लोग उस समय चौंक उठेंगे जब भरी दोपहरी में सूरज की तेज रोशनी के बीच उनकी परछाई भी उनका साथ छोड़कर चली जाएगी। ऐसा 18 अगस्त 2023 को होगा, जिसे आम लोगों की भाषा में 'Zero Shadow Day' कहा जाता है। इस दिन को लेकर आम लोगों से लेकर वैज्ञानिक तक, हर कोई काफी उत्सुक नजर आ रहा है।

साल में दो बार होने वाले इस अनोखे खगोलिय घटना में पृथ्वी पर मौजूद सीधी (Vertical) वस्तुओं की पराछाई पड़नी बंद हो जाती है। हालांकि यह खगोलिय घटना एक साथ ही पूरी पृथ्वी पर नहीं होती है बल्कि अलग-अलग शहरों में यह घटना अलग-अलग समय होती है।
कहां गायब हो जाती है परछाई?
कर्क और मकर रेखा के बीच के क्षेत्रों में जहां सूर्य आकाश में सबसे ऊंचे स्थान पर होता है, वहां Zero Shadow Day होता है। ऐसा साल में दो बार होता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, पृथ्वी सूर्य का चक्कर काटते समय अपनी धुरी पर थोड़ी झुकी रहती है। इसलिए सूर्य की किरणें पृथ्वी पर जिस कोण से पड़ती है, उसके आधार पर ही जमीन पर परछाई भी नजर आने लगती है। लेकिन जिस दिन जिस शहर में Zero Shadow Day होता है, उस दिन दोपहर के समय सूर्य उस शहर में सिर के ठीक ऊपर होता है। इस वजह से किसी भी व्यक्ति या वस्तु की परछाई जमीन पर नहीं पड़ती है।

क्यों महत्वपूर्ण है Zero Shadow Day
Zero Shadow Day का सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों से ही काफी महत्व है। Zero Shadow Day वैज्ञानिकों व खगोलशास्त्रियों को पृथ्वी के अक्षीय झुकाव और सूर्य से इसकी स्थिति के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। इसके कारण ही पृथ्वी के सूर्य की परिक्रमा का विज्ञान समझना और सूर्य का प्रकाश विभिन्न अक्षांशों में कैसे वितरित होता है, इस बारे में सभी जानकारियां मिल पाती हैं।
दूसरी तरफ Zero Shadow Day का सांस्कृतिक महत्व भी है। इसने दुनिया भर के कई मिथकों, उनसे जुड़ी कहानियों व सांस्कृतिक परंपराओं को प्रभावित किया है। Zero Shadow Day दुनिया के कई क्षेत्रों में विशेष रीति-रिवाजों और उत्सवों से जोड़ा जाता है। यह कई सांस्कृतिक रहस्यों को भी खोलता है।
18 अगस्त 2023 को बैंगलोर में Zero Shadow Day होने वाला है। दोपहर को ठीक 12.24 बजे बैंगलोर की सड़कों पर पड़ने वाली परछाई पूरी तरह से गायब हो जाएंगी। कुछ पलों के बाद ही जमीन पर परछाई का पड़ना फिर से शुरू हो जाएगा।



Click it and Unblock the Notifications














