भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग के अलावा और भी कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां महादेव की पूजा बहुत ही भक्ति और श्रद्धा के साथ की जाती है। वहीं दूसरी ओर धार्मिक कहानियों में अक्सर महादेव के निवास स्थान के रूप में गुफाओं का भी उल्लेख मिलता है।
हमारे देश के अलग-अलग राज्यों में ऐसी कई गुफाएं हैं, जहां महादेव की पूजा करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। इन गुफाओं में सबसे अधिक प्रसिद्ध अमरनाथ की गुफा है। इसके अलावा और भी कई गुफाएं हैं, जहां भगवान शिव की पूजा की जाती है।

महाशिवरात्रि के इस स्पेशल आर्टिकल में हम आपको महादेव की प्रसिद्ध गुफाओं के बारे में बता रहे हैं -
1. अमरनाथ की गुफा
भगवान शिव की प्रसिद्ध गुफाओं में सबसे पहला नाम अमरनाथ की गुफा का ही आता है। यह गुफा जम्मू के अनंतनाग में स्थित है। इस गुफा में महादेव बाबा बर्फानी के रूप में निवास करते हैं। हर साल निर्धारित समय पर इस गुफा में प्राकृतिक बर्फ से महादेव का शिवलिंग तैयार होता है जो कुछ समय बाद धीरे-धीरे पिघल जाता है।

मान्यताओं के अनुसार इस जगह पर भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरता की कथा सुनायी थी। हैरान करने वाली बात है कि गुफा के बाहर गिरने वाली बर्फ भूरभूरी होती है लेकिन शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है।
2. पाताल भुवनेश्वर
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है। अपने नाम की तरह ही यह गुफा पहाड़ों पर नहीं बल्कि जमीन से 90 फीट नीचे बनी हुई है। गुफा के अंदर जाने का रास्ता काफी संकरा है जहां सहारे के लिए लोहे की मोटी जंजीर लगी हुई है। गुफा के अंदर प्रवेश करने पर सबसे पहले एक ऐसी आकृति नजर आती है, जिसे देखकर ऐरावत हाथी जैसा लगता है।

पौराणिक मान्यताओं में कहा जाता है कि इस मंदिर में भगवान गणेश के कटे हुए सिर को स्थापित किया गया था। गुफा के अंदर चमकिली पत्थर दिखाई देती है जो भगवान शिव की जटाओं को दर्शाता है। कहा जाता है कि इस गुफा के 4 द्वार थे, रणद्वार, पापद्वार, धर्मद्वार और मोक्षद्वार। रावण की मृत्यु के बाद पापद्वार और कुरुक्षेत्र में महाभारत की लड़ाई के बाद रणद्वार को बंद कर दिया गया था। अब श्रद्धालु धर्मद्वार से गुफा में प्रवेश करते हैं।
3. शिवखोड़ी गुफा

जम्मू के रयासी जिले में स्थित है 150 मीटर लंबी शिवखोड़ी गुफा। इस गुफा के बारे में मान्यता है कि यहां भगवान शिव अपने पूरे परिवार माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय के साथ विराजमान है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि शिवखोड़ी की गुफा के दूसरी तरफ ही अमरनाथ की गुफा मौजूद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस गुफा में किसी को भगवान शिव के दर्शन मिलने के बाद भी जो व्यक्ति आगे बढ़ता है वह कभी लौटकर वापस नहीं आता है। हालांकि इन बातों में कितनी सच्चाई है, इस बात का पता नहीं चल सका है।
4. एलीफेंटा की गुफाएं

महाराष्ट्र में मुंबई से लगभग 10 किमी की दूरी पर मौजूद एलीफेंटा की गुफाएं यूनेस्को की विश्व धरोहर लिस्ट में शामिल हैं। यहां कुल 7 गुफाएं हैं और मुख्य गुफा में 26 स्तंभ हैं। इनमें से भगवान शिव की कई स्वरूपों को उकेरा गया है। बताया जाता है कि इस गुफाओं का निर्माण 5वीं से 9वीं शताब्दी के बीच किया गया था। हालांकि यह एक सक्रिय पूजा स्थल नहीं है लेकिन यह एक प्रमुख दर्शनीय स्थल जरूर है, जहां हर साल हजारों पर्यटक घूमने आते रहते हैं।
5. बादामी गुफाएं
कर्नाटक के बादामी में स्थित गुफाओं के वास्तुकला की तुलना जॉर्डन के पेट्रा की वास्तुकला से की जाती है। इतिहासकारों का मानना है कि बादामी गुफाओं का निर्माण लगभग डेढ़ हजार साल पहले चालुक्य राजवंश के राजाओं ने करवाया था। इन गुफाओं की दीवारों पर शैव, वैष्णव और जैन धर्म के प्रतिकों को उकेरा गया था।

यहां कुल 4 गुफाएं हैं, जिसमें से 3 गुफाएं हिंदू देवताओं और चौथी गुफा जैन धर्म के संस्थापक महावीर को समर्पित है। पहली गुफा भगवान शिव को समर्पित है, जिसके गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। गुफा की दिवारों, छत और स्तंभों पर भी भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश व कार्तिकेय की मूर्तियां अंकित हैं।



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