केंद्र सरकार 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश करने वाली है। उसी दिन से संसद का बजट सत्र भी शुरू हो जाएगा। इस साल लगातार 8वीं बार बतौर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं। इससे पहले सर्वाधिक बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नाम था, जिन्होंने अपने वित्तमंत्री के कार्यकाल के दौरान कुल 10 बार केंद्रीय बजट पेश किया था।
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के नाम पर 9 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। सरकार किसी की भी हो और बजट भले ही किसी भी वित्त मंत्री ने पेश किया हो, लेकिन एक चीज जो हर साल कॉमन रही है, वह है बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्रालय में मनाया जाने वाला हलवा सेरेमनी। क्या होता है यह हलवा सेरेमनी और क्यों मनाया जाता है? वित्त मंत्रालय में कब पहली बार मनाया गया था हलवा सेरेमनी?

चलिए जानते हैं क्या है वित्त मंत्रालय के हलवा सेरेमनी का इतिहास...
कब मनाया जाता है हलवा सेरेमनी?
हलवा सेरेमनी वित्त मंत्रालय के लॉक-इन पीरियड के शुरू होने के ठीक पहले मनाया जाता है। इस साल 24 जनवरी की शाम को हलवा सेरेमनी मनायी गयी थी। हलवा सेरेमनी का मतलब बजट बनाने का काम पूरा हो चुका है और बजट तैयार करने वाले अधिकारी लॉक-इन पीरियड में जा रहे हैं। अब बाकी है तो बस बजट की छपाई का काम, जो इस सेरेमनी के बाद शुरू हो जाता है।
दरअसल, बजट तैयार होने के बाद जब इसकी फाईनल छपाई का काम शुरू होता है, उसके बाद लगभग 10-12 दिन बजट का मसौदा बनाने से जुड़े सभी अधिकारियों को बाहर आने-जाने नहीं दिया जाता है। उन्हें संसद के नॉर्थ ब्लॉक परिसर में ही रहना पड़ता है। न तो अपना फोन इस्तेमाल करने की अनुमति होती है और न ही किसी से मिलने-जुलने की ताकि बजट की गोपनियता को बनायी रखी जा सके और उससे जुड़ी कोई जानकारी बाहर लीक न हो जाए। एक तरह से कहा जा सकता है कि हलवा सेरेमनी बजट को बनाने में की गयी मेहनत के सफल होने की खुशी में मनाया जाता है।
कब पहली बार मनाया गया था हलवा सेरेमनी?
मीडिया रिपोर्ट में इतिहासकारों के हवाले से बताया गया है कि हमारे देश में पहली बार 1860 में बजट पेश करने की शुरुआत हुई थी। इसके बाद 1947 में देश को आजादी मिलने के बाद वर्ष 1950 में संविधान लागू होने के साथ ही बजट पेश किया जाने लगा। उस समय जॉन मथाई वित्त मंत्री हुआ करते थे। यह ऐसा दौर था जब बजट तैयार होने के बाद राष्ट्रपति भवन की प्रिंटिंग प्रेस में उसे छपने के लिए भेजा जाता था।
बताया जाता है कि 1950 में जब बजट छपकर आयी, तब उसका कुछ हिस्सा लीक हो गया था। आरोप लगाया गया वित्त मंत्री ने देश के उद्योपति घरानों के हित में काम किया है। इन आरोपों में तत्कालिन वित्त मंत्री ऐसे घिरे कि उन्हें इस्तीफा तक दे देना पड़ा। इसके बाद बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन की प्रेस में करने के बजाए मिंटो रोड में सरकारी प्रेस में की जाने लगी।

पहली मनी हलवा सेरेमनी
साल 1980 में वित्त मंत्रालय ने अपनी प्रिंटिंग प्रेस मंत्रालय के बेसमेंट में लगवा दी। कहा जाता है कि यह 1950 में हुए बजट लीक से सबक लेकर ही किया गया था। अगले साल यानी 1951 में जब बजट तैयार किया गया तब इस काम से जुड़े लोगों को मंत्रालय में ही रहने की हिदायत दी गयी।
बस यहीं पड़ी हलवा सेरेमनी की नींव। बजट को छपाई के लिए भेजने से पहले मंत्रालय के बेसमेंट में बड़ी सी कड़ाही में बनाया गया हलवा...जिसे हलवा सेरेमनी के तौर पर मनाया गया। इसके बाद 9-10 दिनों के लिए सभी अधिकारी पूरी दुनिया से पूरी तरह कट गये।
हलवा सेरेमनी में कौन-कौन होता है शामिल?
हर साल वित्त मंत्री की अगुआई में ही हलवा सेरेमनी मनायी जाती है। हलवा पकाते तो वित्त मंत्रालय के रसोईए हैं, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी हर साल इसमें उनकी मदद करती हैं। इसके साथ हलवा बन जाने के बाद वित्त मंत्रालयों के आला अधिकारियों को वह अपने हाथों से हलवा परोसकर सबका मुंह मीठा भी करती हैं। हलवा सेरेमनी को वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण की स्वीकारिता के रूप में देखी जाती है।
जब नहीं मनी हलवा सेरेमनी
कहा जाता है कि 1980 में पहली बार हलवा सेरेमनी की शुरुआत होने के बाद से लेकर अब तक लगभग हर साल यह सेरेमनी जरूर मनायी गयी। लेकिन बीच में कुछ साल ऐसे रहे जब इस सेरेमनी को बंद कर दिया गया था। दरअसल, साल 2022 में जब पूरी दुनिया पर कोरोना महामारी का प्रकोप छाया हुआ था, उस समय कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए हलवा सेरेमनी नहीं मनायी गयी थी।
इस साल बजट की छपाई भी नहीं हुई थी, बल्कि इसे डिजिटल रूप से ही पेश किया गया था। बताया जाता है कि उस साल हलवा के बजाए अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच मिठाई बांटी गयी थी। अगले साल से फिर हलवा सेरेमनी मनायी जाने लगी।



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