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पेरिस के बारे में वो जानकारी जो उड़ा देगी होश : दो बार कबाड़ियों को बेचा जा चुका है एफिल टावर

फ्रांस की राजधानी पेरिस में मौजूद एफिल टावर, जिसे देखने के लिए हर दिन लोगों की भीड़ यहां जमा होती है। इस टावर को फ्रांस की शान कहा जाता है। दुनिया की सबसे ऊंची संरचना के रूप में विख्यात एफिल टावर की कुल लम्बाई 324 मीटर है। लेकिन क्या आप जानते हैं, अलग-अलग मौसम या यूं कहे तापमान में एफिल टावर की ऊंचाई बदल भी जाती है।

वर्ष के सबसे गर्म और सबसे ठंड दिनों के दौरान इस टावर के सिकुड़ने की वजह से लंबाई में 6 इंच तक का फर्क आ सकता है। एफिल टावर को बनाने के लिए लगभग 18,000 धातु के हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था। क्या आप जानते हैं शुरुआत में यह फैसला लिया गया था कि एफिल टावर को महज 20 सालों तक ही रखा जाएगा। उसके बाद इसे तोड़ दिया जाएगा। ये तो हो गयी एफिल टावर के निर्माण से जुड़ी कुछ खास बातें।

fun fact about eiffel tower

लेकिन क्या आप जानते हैं, एफिल टावर को कबाड़ी के पास बेच दिया गया था, वो एक नहीं बल्कि दो-दो बार...। ऐसा किया था दुनिया भर के सबसे मशहूर एक ठग ने...कहानी कुछ जानी-पहचानी सी लगी न...जी हां, बॉलीवुड फिल्म 'बंटी और बबली' की कहानी भी कुछ-कुछ इससे ही मेल खाती है।

किस्सा है साल 1890 का जब ऑस्ट्रिया-हंगरी (वर्तमान चेक गणराज्य) के होस्टिन में जन्म हुआ विक्टर लस्टिग का। बचपन से ही बेहद शातिर विक्टर लस्टिग का मन पढ़ाई-लिखाई में नहीं लगता था। उसकी दिलचस्पी तो नयी-नयी भाषाएं सीखने में थी। बड़े होने तक एक-एक कर विक्टर ने 5 भाषाएं सीख ली थी।

विक्टर की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह बड़ी ही आसानी से लोगों से घुलमिल कर उनसे सभी जरूरी जानकारियां हासिल कर लेता था। बस फिर क्या था, अपनी इस खूबी का इस्तेमाल कर विक्टर लस्टिग ने लोगों को ठगना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे वह दुनिया भर में मशहूर हो गया। कहा तो यहां तक जाता है कि इस ठग का असली नाम भी विक्टर लस्टिग नहीं था।

साल 1925 के दौरान वह फ्रांस आ गया जब ठगी के कई मामलों में कनाडा और अमेरिका की पुलिस को उसकी तलाश थी। इस दौरान वह पेरिस में आकर बस गया। पहला विश्व युद्ध खत्म होने के बाद पेरिस का नवनिर्माण का काम जोरों पर चल रहा था। इस दौरान विक्टर के हाथ एक दिन का अखबार लगा जिसमें एफिल टावर की मरम्मत की खबर छपी थी। बस फिर क्या था, विक्टर का शातिर दिमाग भी एक्टिवेट हो गया।

eiffel tower firecrackers

प्रिंटिंग प्रेस से फर्जी दस्तावेज बनवाए जिसमें एफिल टावर से जुड़ी सभी जानकारियां मौजूद थी। डाक व टेलीग्राफ मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर का भेष बनाया और पहुंच गया शहर के चुनिंदा व्यापारियों के पास। वहां जाकर उसने कहा कि सरकार के लिए इसकी मरम्मत करवाना बेहद मुश्किल काम है, इसलिए उसे गुप्त रूप से बेचने की योजना बनायी गयी है।

व्यापारी आ गये झांसे में

विक्टर की चिकनी-चुपड़ी बातों में व्यापारी आ गये और होटल में 6 व्यापारियों ने उससे अलग बैठक भी की। बैठक के बाद एक व्यापारी ने विक्टर लस्टिग को फोन किया और कहा कि वह एफिल टावर को खरीदना चाहता है। इसके बदले में विक्टर ने व्यापारी से मोटी रिश्वत मांगी। व्यापारी को लगा कि सरकार कर्मचारी अक्सर इस तरह के काम के लिए घूस लेते हैं। विक्टर भी ऐसा ही कर रहा है।

उसने विक्टर को घूस में मांगे गये सभी रुपए पहुंचा भी दिये। रुपए लेकर विक्टर रातों-रात फरार हो गया और व्यापारी जब अगले दिन होटल में रजिस्ट्री के लिए पहुंचा तब जाकर उसे ठगे जाने का अहसास हुआ। लेकिन तब तक कुछ नहीं किया जा सकता था क्योंकि विक्टर लस्टिग को उस समय पकड़ पाना असंभव सा हो गया था।

eiffel tower paris

6 महीने में दूसरी बार बेच दिया एफिल टावर

6 महीने बाद विक्टर लस्टिग फिर से पेरिस वापस लौटा और उसने फिर से कुछ व्यापारियों को अपने झांसे में लिया। इस बार भी घूस का बहाना बनाकर विक्टर लस्टिग ने व्यापारी से मोटी रकम वसूली और रुपए लेकर फरार हो गया। लेकिन दूसरा व्यापारी थोड़ा चालाक निकला।

पहले व्यापारी ने तो ठगी के बारे में किसी से कोई बात नहीं की लेकिन दूसरे व्यापारी ने उसकी करतूत दुनिया के सामने रख दी। हालांकि इस बार भी वह पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा लेकिन फिर कभी कोई व्यापारी एफिल टावर खरीदने के लिए उसके झांसे में नहीं आया।

(मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के आधार पर)

FAQs
एफिल टावर को बेचने वाला ठग क्या पकड़ा गया था?

एफिल टावर को बेचने की कोशिश ठग विक्टर लस्टिग ने की थी, इस बारे में फ्रांस के सभी को पता चल गया था। पुलिस को खबर भी दी गयी थी लेकिन पुलिस को चकमा देकर भागने में ठग कामयाब हो गया था।

क्या एफिल टावर को सही में बेच दिया गया था?

नहीं, एफिल टावर को ठग विक्टर लस्टिग ने बेचने का झांसा देकर 2 व्यापारियों को लूटा था। लेकिन वह उन्हें बेच नहीं पाया था।

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