फेसबुक और व्हाट्स ऐप के जमाने में भारत ने रचा इतिहास और धरती के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) में पोस्ट ऑफिस का तीसरा ब्रांच खोल दिया है। एक ओर जहां व्हाट्स ऐप, ई-मेल के माध्यम से बस कुछ ही पलों में संदेश से लेकर फोटो, वीडियो और ऑडियो देश और दुनिया के किसी भी कोने में पहुंच जाते हैं।
लोगों ने आपसी संपर्क को बनाए रखने के लिए ख़त लिखना लगभग बंद कर दिया है। ऐसे में पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव में भारत ने पोस्ट ऑफिस का तीसरा ब्रांच खोल दिया है। पर कौन लिखेगा इस बर्फिले देश में चिट्ठियां, जहां जीवन का नामोंनिशान तक नहीं है। क्या है इस बर्फिले देश का पिन कोड? अंटार्कटिका में और कहां-कहां खुली हैं India Post की शाखाएं?

चलिए सबसे पहले आपको अंटार्कटिका में खुली भारतीय डाक घर की तीसरी शाखा के विषय में बताते हैं :
अंटार्कटिका में भारत रिसर्च मिशन पर है। सुनसान और वीरान अंटार्कटिका में भारत के 50 से 100 वैज्ञानिक काम करते हैं। भारत का तीसरा डाकघर अंटार्कटिका में मौजूद भारतीय अनुसंधान केंद्र में खोला गया है। बताया जाता है कि अंटार्कटिका में खुले नये और तीसरे डाकघर का पिन कोड फिलहाल प्रयोगात्मक रूप से MH-1718 रखा गया है। यह नया ब्रांच खोलने की नियमावली के अंतर्गत ही आता है।
5 अप्रैल को आधिकारिक रूप से इस डाकघर को खोल दिया गया। 5 अप्रैल का दिन भी एक खास वजह से ही अंटार्कटिका में तीसरा डाकघर खोलने के लिए चुना गया था। दरअसल, 5 अप्रैल नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR) का 24वां स्थापना दिवस था। मिली जानकारी के अनुसार अंटार्कटिका के डाकघर से होने वाली कमाई NCPOR के पास ही भेज दी जाती है।

कौन भेजेगा अंटार्कटिका में चिट्ठियां?
उस बर्फिले देश, जहां इंसानों का नामों निशान नहीं है, वहां भला कोई किसी को ख़त क्यों लिखेगा? दरअसल, अंटार्कटिका में वहीं लोग पत्र भेजते हैं, जिनको स्टैम्प जमा करने या खासतौर पर अंटार्कटिका का स्टैम्प जमा करने का शौक है। मिली जानकारी के अनुसार पूरे साल अंटार्कटिका के लिए आने वाली चिट्ठियों को जमा किया जाता है। फिर उन्हें एक बार में अंटार्कटिका ले जाकर वहां का स्टैम्प लगाकर वापस ले आया जाता है।
इससे पहले कब और कौन से खुले थे डाकघर?

अंटार्कटिका में डाकघर की पहली शाखा 1984 में दक्षिण गंगोत्री स्टेशन पर खोला गया था। बताया जाता है कि पहले साल ही इस डाकघर में 10,000 से अधिक चिट्ठियां भेजी गयी थी। लेकिन 1988-89 के दौरान उक्त अनुसंधान केंद्र पूरी तरह से बर्फ के नीचे दब गया था।
इसके बाद अंटार्कटिका में डाकघर की दूसरी शाखा को 26 जनवरी 1990 को खोला गया। इसे मैत्री अनुसंधान केंद्र में खोला गया था। अभी भी डाकघर की इस शाखा में पत्र भेजा जाता है। बताया जाता है कि इन दोनों डाकघरों के बीच की दूरी लगभग 3000 किमी है। और दोनों डाकघर गोवा डाकघर सर्कल के अंतर्गत आती हैं।
तो आप कब भेज रहे हैं पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव में अपनी चिट्ठी?



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